August 31, 2026 11:55 AM

Krishi Times

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लक्षद्वीप में लॉन्च होगा मिशन रंगीन मछली 2031, सजावटी मत्स्य पालन को मिलेगा नया बढ़ावा!

लक्षद्वीप में 31 अगस्त को मत्स्य मंत्रालय का बड़ा आउटरीच कार्यक्रम, उपराष्ट्रपति जारी करेंगे ‘मिशन रंगीन मछली 2031’

नई दिल्ली/अगत्ती (लक्षद्वीप)। भारत सरकार के मत्स्य पालन विभाग, मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय द्वारा 31 अगस्त 2026 को लक्षद्वीप के अगत्ती द्वीप में एक विशेष आउटरीच कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इस अवसर पर देश के माननीय उपराष्ट्रपति “मिशन रंगीन मछली 2031” नामक सजावटी मत्स्य पालन (ऑर्नामेंटल फिशरीज) के विकास के लिए तैयार की गई रणनीतिक कार्ययोजना का शुभारंभ करेंगे। यह पहल भारत को वैश्विक सजावटी मत्स्य व्यापार में प्रतिस्पर्धी बनाने और तटीय क्षेत्रों में नए रोजगार एवं उद्यमिता अवसर सृजित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह सहित कई गणमान्य होंगे शामिल

कार्यक्रम में केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी तथा पंचायती राज मंत्री राजीव रंजन सिंह, राज्य मंत्री प्रो. एस.पी. सिंह बघेल तथा लक्षद्वीप के प्रशासक प्रफुल्ल खोड़ा पटेल की विशेष उपस्थिति रहेगी। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में मछुआरे, मछली पालक, महिला मत्स्य उद्यमी, स्वयं सहायता समूह, मत्स्य क्लस्टर प्रतिनिधि तथा विभिन्न मंत्रालयों और विभागों के अधिकारी भाग लेंगे।

समुद्री संसाधनों के बेहतर उपयोग पर रहेगा फोकस

भारत के पास 11,099 किलोमीटर लंबी तटरेखा, लगभग 22 लाख वर्ग किलोमीटर का विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ) तथा 53.1 लाख टन अनुमानित समुद्री मत्स्य क्षमता है। इसके बावजूद समुद्री मत्स्य संसाधनों की बड़ी क्षमता का अभी पूर्ण उपयोग नहीं हो पाया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि गहरे समुद्र में मत्स्य दोहन, मैरिकल्चर, समुद्री शैवाल उत्पादन और समुद्री जैव संसाधनों के वैज्ञानिक उपयोग से भारत की नीली अर्थव्यवस्था (Blue Economy) को नई गति मिल सकती है। इसी दृष्टि से लक्षद्वीप को समुद्री मत्स्य विकास का प्रमुख केंद्र बनाने की दिशा में प्रयास तेज किए जा रहे हैं।

लक्षद्वीप: भारत की नीली अर्थव्यवस्था का उभरता केंद्र

लक्षद्वीप लगभग 4 लाख वर्ग किलोमीटर के विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ) का मालिक है, जो भारत के कुल EEZ का करीब 17 प्रतिशत हिस्सा है। इसके अलावा यहां 4,200 वर्ग किलोमीटर से अधिक क्षेत्र में फैले लैगून मौजूद हैं, जो समुद्री जैव विविधता और उच्च मूल्य वाली मत्स्य प्रजातियों के लिए अनुकूल वातावरण प्रदान करते हैं।

येलोफिन टूना और स्किपजैक टूना जैसी उच्च मूल्य वाली प्रजातियां यहां की समुद्री अर्थव्यवस्था की आधारशिला हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, वैज्ञानिक मत्स्य प्रबंधन और आधुनिक प्रसंस्करण सुविधाओं के माध्यम से लक्षद्वीप को टूना आधारित मत्स्य उद्योग का राष्ट्रीय हब बनाया जा सकता है।

समुद्री शैवाल क्लस्टर से बढ़ेगी आय और रोजगार

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केंद्र सरकार ने क्लस्टर आधारित विकास मॉडल के तहत लक्षद्वीप को समुद्री शैवाल (सीवीड) क्लस्टर के रूप में अधिसूचित किया है। इस पहल का उद्देश्य समुद्री शैवाल की खेती, प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन और विपणन को बढ़ावा देना है।

समुद्री शैवाल उद्योग खाद्य, औषधि, कॉस्मेटिक, जैव उर्वरक और जैव ईंधन क्षेत्रों में तेजी से उभर रहा है। इससे स्थानीय युवाओं और महिलाओं के लिए वैकल्पिक आय के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है।

‘मिशन रंगीन मछली 2031’ से मिलेगा सजावटी मत्स्य पालन को नया आयाम

आउटरीच कार्यक्रम की सबसे महत्वपूर्ण घोषणा “मिशन रंगीन मछली 2031” होगी। यह रणनीतिक कार्ययोजना देश में सजावटी मत्स्य पालन की संपूर्ण मूल्य श्रृंखला को वैज्ञानिक और व्यवस्थित आधार प्रदान करेगी।

योजना के तहत ब्रूडस्टॉक प्रबंधन, प्रजनन, हैचरी संचालन, जैव-सुरक्षा, क्वारंटीन, स्वास्थ्य प्रबंधन, ट्रेसेबिलिटी, एक्वेरियम संचालन, परिवहन और व्यापार से संबंधित मानक संचालन प्रक्रियाएं (SOPs) विकसित की जाएंगी। इससे पूरे देश में एक समान गुणवत्ता मानक लागू होंगे तथा निर्यात क्षमता को मजबूती मिलेगी।

लाभार्थियों को वितरित किए जाएंगे विभिन्न लाभ

कार्यक्रम के दौरान उपराष्ट्रपति मत्स्य पालन क्षेत्र से जुड़े लाभार्थियों को विभिन्न योजनाओं के तहत सहायता एवं लाभ भी वितरित करेंगे। सरकार का उद्देश्य मत्स्य क्षेत्र में आधुनिक तकनीक, गुणवत्ता नियंत्रण और बाजार संपर्क को मजबूत कर मछुआरों की आय बढ़ाना है।

भारत का समुद्री मत्स्य क्षेत्र तेजी से बढ़ रहा

भारत आज विश्व के प्रमुख मत्स्य पालन और जलीय कृषि उत्पादक देशों में शामिल है। वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान देश ने लगभग 73,890 करोड़ रुपये मूल्य के समुद्री खाद्य उत्पादों का निर्यात किया। यह क्षेत्र करीब 50 लाख मछुआरों और मत्स्यकर्मियों की आजीविका का आधार है।

सरकार का मानना है कि गहरे समुद्री मत्स्य पालन, टूना संसाधनों के वैज्ञानिक दोहन, समुद्री शैवाल उत्पादन और सजावटी मत्स्य पालन को बढ़ावा देकर भारत वैश्विक समुद्री अर्थव्यवस्था में अपनी हिस्सेदारी को और मजबूत कर सकता है।

सारांश

अगत्ती में आयोजित होने वाला यह आउटरीच कार्यक्रम केवल एक सरकारी आयोजन नहीं, बल्कि भारत की नीली अर्थव्यवस्था, समुद्री मत्स्य संसाधनों के सतत उपयोग और तटीय समुदायों की समृद्धि की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। ‘मिशन रंगीन मछली 2031’ और लक्षद्वीप केंद्रित विकास रणनीति से देश के मत्स्य क्षेत्र को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।