रेड रॉट, पोक्का बोइंग और विल्ट रोग से बचाव के लिए किसानों को नियमित निरीक्षण व वैज्ञानिक प्रबंधन अपनाने की सलाह!
लखनऊ, 31 जुलाई 2026। मानसून के दौरान बढ़ी हुई नमी और अनुकूल मौसमीय परिस्थितियों के कारण गन्ना फसल में विभिन्न रोगों के प्रकोप की आशंका को देखते हुए उत्तर प्रदेश चीनी उद्योग एवं गन्ना विकास विभाग ने किसानों के लिए विस्तृत एडवाइजरी जारी की है। विभाग ने किसानों से फसल का नियमित निरीक्षण करने, शुरुआती लक्षणों की पहचान करने तथा वैज्ञानिक अनुशंसाओं के अनुसार तत्काल नियंत्रण उपाय अपनाने की अपील की है।
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गन्ना शोध परिषद, शाहजहांपुर द्वारा तैयार इस एडवाइजरी में लाल सड़न (रेड रॉट), पोक्का बोइंग, बैक्टीरियल टॉप रॉट और मुरझा (विल्ट) जैसे प्रमुख रोगों के लक्षण एवं उनके नियंत्रण उपायों का विस्तार से उल्लेख किया गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि रोगों की समय पर पहचान और उचित प्रबंधन से उत्पादन में होने वाले नुकसान को काफी हद तक रोका जा सकता है।
रेड रॉट पर विशेष सतर्कता की जरूरत
विभाग के अनुसार प्रदेश में व्यापक रूप से बोई जाने वाली गन्ना किस्मों को. 0238 और को. 05011 में लाल सड़न रोग का खतरा अधिक देखा जा रहा है। ऐसे मामलों में संक्रमित पौधों को जड़ सहित उखाड़कर नष्ट करने और अनुशंसित फफूंदनाशियों का प्रयोग करने की सलाह दी गई है।
विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि रेड रॉट से प्रभावित खेतों का पानी अन्य खेतों में नहीं जाने देना चाहिए। इसके लिए खेतों में प्रभावी जल निकासी व्यवस्था और सिंचाई प्रबंधन पर विशेष ध्यान देना आवश्यक है, ताकि संक्रमण का फैलाव रोका जा सके।
पोक्का बोइंग रोग दिखे तो तुरंत करें छिड़काव
एडवाइजरी के अनुसार यदि गन्ने की पत्तियों में विकृति, मुड़ना या पीलेपन जैसे पोक्का बोइंग रोग के लक्षण दिखाई दें, तो 15 दिन के अंतराल पर दो बार कॉपर ऑक्सीक्लोराइड या कार्बेन्डाजिम के 0.1 प्रतिशत घोल का छिड़काव करना चाहिए। समय पर उपचार से फसल की गुणवत्ता और उपज को सुरक्षित रखा जा सकता है।
विल्ट रोग से बचाव के लिए संतुलित पोषण जरूरी
मुरझा (विल्ट) रोग की रोकथाम के लिए खेत में पर्याप्त नमी बनाए रखने के साथ-साथ सल्फर, जिंक सल्फेट और बोरेक्स का संतुलित एवं अनुशंसित मात्रा में प्रयोग करने की सलाह दी गई है। कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार संतुलित पोषण पौधों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है और संक्रमण की संभावना कम करता है।
जैविक विकल्पों को भी दें प्राथमिकता
विभाग ने किसानों को रासायनिक उपायों के साथ-साथ जैव पेस्टीसाइड (जैविक कीटनाशक) के उपयोग को बढ़ावा देने की सलाह दी है। इससे पर्यावरण संरक्षण के साथ टिकाऊ खेती को भी बढ़ावा मिलेगा और मिट्टी की गुणवत्ता बेहतर बनी रहेगी।
संक्रमण बढ़ने पर तुरंत लें विशेषज्ञ सलाह
किसानों से कहा गया है कि यदि खेत में रोग तेजी से फैलता दिखाई दे या संक्रमण का स्तर अधिक हो, तो तत्काल स्थानीय गन्ना विभाग, कृषि वैज्ञानिकों या गन्ना विकास अधिकारियों से संपर्क करें। समय पर विशेषज्ञ सलाह लेने से बड़े नुकसान से बचा जा सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि मानसून के दौरान नियमित फसल निगरानी, उचित जल निकासी, संतुलित पोषण और वैज्ञानिक रोग प्रबंधन अपनाकर गन्ना किसानों को बेहतर उत्पादन और गुणवत्ता प्राप्त हो सकती है, जिससे उनकी आय भी सुरक्षित रहेगी।

