प्राकृतिक खेती से जुड़ेगा औषधीय पौधों का भविष्य!

औषधीय एवं सुगंधित पौधे भारतीय कृषि के लिए ‘स्वर्ण खदान’, किसानों की आय बढ़ाने में निभाएंगे बड़ी भूमिका: डॉ. एम.एल. जाट

विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को गति देने के लिए आईसीएआर ने तैयार किया औषधीय एवं सुगंधित पौधों का रोडमैप

आणंद (गुजरात), 20 जुलाई। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के महानिदेशक एवं कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग (DARE) के सचिव डॉ. एम.एल. जाट ने कहा है कि औषधीय एवं सुगंधित पौधे (Medicinal & Aromatic Plants-MAPs) भारतीय कृषि के लिए एक “स्वर्ण खदान” हैं, जो किसानों की आय बढ़ाने, ग्रामीण उद्यमिता को प्रोत्साहित करने तथा विकसित भारत @2047 के लक्ष्य को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

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डॉ. जाट ने 18-19 जुलाई 2026 को आईसीएआर-औषधीय एवं सुगंधित पौधा अनुसंधान निदेशालय (ICAR-DMAPR), आनंद के दौरे के दौरान अनुसंधान कार्यक्रमों, प्रौद्योगिकी प्रदर्शन गतिविधियों और क्षेत्रीय परियोजनाओं की समीक्षा की। इस अवसर पर उन्होंने वैज्ञानिकों, किसानों, स्टार्टअप उद्यमियों और नवाचारकर्ताओं के साथ विस्तृत संवाद भी किया।

उच्च प्राथमिकता वाली फसलों पर केंद्रित अनुसंधान की जरूरत

डॉ. जाट ने कहा कि देश में औषधीय एवं सुगंधित पौधों की बढ़ती घरेलू और ग्लोबल मांग को देखते हुए उच्च प्राथमिकता वाली फसलों पर बहु-विषयक अनुसंधान को बढ़ावा देना समय की आवश्यकता है। उन्होंने अनुसंधान योजनाओं की प्रभावी निगरानी, मूल्यांकन और प्रभाव आकलन को मजबूत बनाने पर बल दिया।

उन्होंने जलवायु, फसल प्रणालियों, उत्पादन क्षमता और क्षेत्रीय संभावनाओं को समाहित करते हुए “राष्ट्रीय औषधीय एवं सुगंधित पौधा एटलस” तैयार करने का सुझाव दिया, जिससे किसानों, नीति निर्माताओं और उद्योग जगत को वैज्ञानिक आधार पर निर्णय लेने में सहायता मिल सके।

गुजरात और राजस्थान में विकसित होंगे मॉडल गांव

औषधीय एवं सुगंधित पौधों की खेती को बड़े पैमाने पर बढ़ावा देने के लिए डॉ. जाट ने गुजरात और राजस्थान में दो-दो मॉडल गांव विकसित करने का प्रस्ताव रखा। इन गांवों को “सैचुरेशन मॉडल” के रूप में विकसित किया जाएगा, जहां खेती से लेकर प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन और विपणन तक की संपूर्ण श्रृंखला को प्रदर्शित किया जाएगा।

विशेष रूप से आदिवासी क्षेत्रों में प्राकृतिक खेती आधारित औषधीय पौधों की खेती को बढ़ावा देने की वकालत करते हुए उन्होंने कहा कि इससे किसानों को अतिरिक्त आय के अवसर मिलेंगे, जैव विविधता संरक्षण होगा और पर्यावरणीय संतुलन को भी मजबूती मिलेगी।

प्राकृतिक खेती और उद्यमिता पर जोर

डॉ. जाट ने कहा कि औषधीय एवं सुगंधित पौधों की खेती केवल कृषि गतिविधि नहीं बल्कि ग्रामीण उद्यमिता का मजबूत माध्यम बन सकती है। उन्होंने स्टार्टअप, किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) और युवा उद्यमियों को इस क्षेत्र में निवेश और नवाचार के लिए आगे आने का आह्वान किया।

उन्होंने बताया कि आयुर्वेद, फार्मास्यूटिकल्स, कॉस्मेटिक्स, न्यूट्रास्यूटिकल्स और एरोमा उद्योगों में इन पौधों की मांग लगातार बढ़ रही है, जिससे किसानों के लिए नए बाजार और बेहतर मूल्य प्राप्त करने की संभावनाएं खुल रही हैं।

अनुसंधान एवं प्रदर्शन इकाइयों का किया निरीक्षण

अपने दौरे के दौरान डॉ. जाट ने निदेशालय की विभिन्न अनुसंधान एवं प्रदर्शन इकाइयों का निरीक्षण किया। उन्होंने प्रौद्योगिकी प्रदर्शन ब्लॉक, हर्बल गार्डन, गिलोय जर्मप्लाज्म ब्लॉक, पौधशालाओं तथा विभिन्न फील्ड प्रयोगों का अवलोकन किया।

उन्होंने मेडी-हब इनक्यूबेशन सेंटर के इनक्यूबेटीज से भी बातचीत की, जहां औषधीय एवं सुगंधित पौधों पर आधारित नवाचारों, मूल्यवर्धित उत्पादों और उद्यमिता मॉडल का प्रदर्शन किया गया।

निदेशालय की उपलब्धियों और भविष्य की रणनीति पर चर्चा

आईसीएआर-डीएमएपीआर के निदेशक डॉ. मनीष दास ने निदेशालय की प्रमुख उपलब्धियों, अनुसंधान प्रगति, प्रौद्योगिकी विकास तथा भविष्य की अनुसंधान प्राथमिकताओं की जानकारी प्रस्तुत की। उन्होंने बताया कि संस्थान किसानों तक उन्नत तकनीकों को पहुंचाने, गुणवत्तायुक्त रोपण सामग्री उपलब्ध कराने और औषधीय पौधों के मूल्य शृंखला विकास पर विशेष ध्यान दे रहा है।

किसानों के लिए नया अवसर

विशेषज्ञों के अनुसार अश्वगंधा, सतावर, कालमेघ, तुलसी, लेमनग्रास, पामारोजा, मेंथा और गिलोय जैसी फसलें कम पानी में भी बेहतर उत्पादन देती हैं तथा पारंपरिक फसलों की तुलना में अधिक लाभ प्रदान कर सकती हैं। बढ़ती वैश्विक मांग को देखते हुए यह क्षेत्र भारतीय किसानों के लिए आय विविधीकरण का एक महत्वपूर्ण विकल्प बनकर उभर रहा है।

डॉ. जाट की यह यात्रा औषधीय एवं सुगंधित पौधा क्षेत्र को विज्ञान, संरक्षण, प्राकृतिक खेती, उद्यमिता और किसान-केंद्रित नवाचारों के माध्यम से नई दिशा देने की आईसीएआर की प्रतिबद्धता को दर्शाती है, जो विकसित भारत @2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकती है।