पटना दौरे पर शिवराज सिंह चौहान का विकास, स्वच्छता और टिकाऊ कृषि पर जोर!

खेत बचाओ अभियान में 2,500 से अधिक किसानों से संवाद, ‘धरती माता बचाओ’ जनआंदोलन का किया आह्वान!

पटना। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान का बिहार दौरा बुधवार को विकास, स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और टिकाऊ कृषि के संदेश के साथ संपन्न हुआ। राजधानी पटना और नौबतपुर में आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों के दौरान उन्होंने केंद्र सरकार के 12 वर्षों की उपलब्धियों को रेखांकित करते हुए किसानों, युवाओं, महिलाओं और आम नागरिकों को विकास की प्रक्रिया में सहभागी बनने का आह्वान किया। दिनभर चले कार्यक्रमों में स्वच्छता अभियान, पौधरोपण, विकास परियोजनाओं का निरीक्षण, विकसित भारत संकल्प सम्मेलन, प्रेस वार्ता और राष्ट्रीय स्तर के ‘खेत बचाओ अभियान’ जैसे महत्वपूर्ण आयोजन शामिल रहे।

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गोलघर से दिया स्वच्छता का संदेश

दौरे की शुरुआत पटना के ऐतिहासिक गोलघर परिसर में आयोजित स्वच्छता अभियान से हुई। इस अवसर पर शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि स्वच्छता केवल सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि नागरिकों का नैतिक दायित्व है। उन्होंने कहा कि स्वच्छ भारत अभियान ने देश में जनभागीदारी आधारित परिवर्तन की नई संस्कृति विकसित की है।

उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 के बाद स्वच्छता के क्षेत्र में अभूतपूर्व बदलाव देखने को मिले हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में शौचालय निर्माण, कचरा प्रबंधन और सार्वजनिक स्थलों की सफाई के प्रति लोगों की जागरूकता बढ़ी है। उन्होंने नागरिकों से स्वच्छता को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने का आह्वान किया।

मुख्यमंत्री के साथ कृषि और ग्रामीण विकास पर चर्चा

स्वच्छता अभियान के बाद केंद्रीय मंत्री ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से मुलाकात की। लोकसेवक आवास पर हुई इस बैठक में कृषि, किसान कल्याण, ग्रामीण विकास और आधारभूत संरचना से जुड़ी योजनाओं की समीक्षा की गई।

बैठक में किसानों की आय बढ़ाने, आधुनिक कृषि तकनीकों को बढ़ावा देने, सिंचाई सुविधाओं के विस्तार, कृषि अवसंरचना को मजबूत करने तथा केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं के बेहतर समन्वय पर चर्चा हुई। दोनों नेताओं ने ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन और कृषि आधारित उद्योगों को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता पर भी बल दिया।

पौधरोपण के जरिए पर्यावरण संरक्षण का संदेश

एमएलए फ्लैट परिसर में आयोजित पौधरोपण कार्यक्रम में भाग लेते हुए शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण आज केवल विकल्प नहीं बल्कि आवश्यकता बन चुका है। उन्होंने लोगों से अधिक से अधिक पौधे लगाने और उनकी देखभाल करने का संकल्प लेने की अपील की।

उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन की बढ़ती चुनौतियों के बीच वृक्षारोपण, जल संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों का संतुलित उपयोग ही भविष्य की पीढ़ियों के लिए सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित कर सकता है।

प्रगति पथ यात्रा में विकास कार्यों का जायजा

दौरे के दौरान केंद्रीय मंत्री ने ‘प्रगति पथ यात्रा’ के तहत पटना में चल रही विभिन्न विकास परियोजनाओं का निरीक्षण किया। उन्होंने अटल पथ समेत कई महत्वपूर्ण आधारभूत संरचना परियोजनाओं की प्रगति का अवलोकन किया और अधिकारियों से कार्यों की स्थिति की जानकारी ली।

उन्होंने कहा कि बिहार में सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा और शहरी विकास के क्षेत्र में तेजी से कार्य हो रहे हैं। बेहतर संपर्क व्यवस्था और आधुनिक आधारभूत ढांचा राज्य के आर्थिक विकास को नई गति प्रदान करेगा।

पीएमसीएच के नए भवन का किया अवलोकन

शिवराज सिंह चौहान ने पटना मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (पीएमसीएच) के नवनिर्मित अत्याधुनिक भवन का भी निरीक्षण किया। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार किसी भी राज्य के समग्र विकास का महत्वपूर्ण आधार होता है।

उन्होंने आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं, बेहतर उपचार व्यवस्था और स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार को आम जनता के लिए लाभकारी बताते हुए कहा कि बिहार का स्वास्थ्य क्षेत्र नई दिशा में आगे बढ़ रहा है।

विकसित भारत संकल्प सम्मेलन में रखी उपलब्धियों की रूपरेखा

विद्यापति भवन में आयोजित ‘विकसित भारत संकल्प सम्मेलन’ में केंद्रीय मंत्री ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में बीते 12 वर्षों के दौरान देश में हुए बदलावों का उल्लेख किया।

उन्होंने कहा कि भारत ने बुनियादी ढांचे, परिवहन, डिजिटल सेवाओं, ग्रामीण विकास और सामाजिक कल्याण के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। रेल नेटवर्क का व्यापक विद्युतीकरण, आधुनिक ट्रेनों का संचालन, राष्ट्रीय राजमार्गों का विस्तार और डिजिटल सेवाओं की पहुंच ने देश की विकास गति को नई दिशा दी है।

उन्होंने कहा कि आज भारत वैश्विक मंच पर एक मजबूत और आत्मविश्वासी राष्ट्र के रूप में अपनी पहचान स्थापित कर रहा है।

प्रेस वार्ता में बिहार की विरासत को किया नमन

प्रेस वार्ता के दौरान शिवराज सिंह चौहान ने बिहार की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत का उल्लेख करते हुए कहा कि यह ज्ञान, तप, त्याग और सामाजिक चेतना की भूमि है।

उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं से करोड़ों परिवारों को लाभ मिला है। ग्रामीण आवास, महिलाओं के सशक्तिकरण, किसानों को प्रत्यक्ष आर्थिक सहायता और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं ने समाज के कमजोर वर्गों को नई ताकत दी है।

उन्होंने पीएम-किसान सम्मान निधि, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, स्वयं सहायता समूहों और महिला सशक्तिकरण कार्यक्रमों को ग्रामीण अर्थव्यवस्था में परिवर्तनकारी बताया।

खेत बचाओ अभियान बना दौरे का मुख्य आकर्षण

दौरे का सबसे महत्वपूर्ण कार्यक्रम नौबतपुर में आयोजित राष्ट्रीय स्तर का ‘खेत बचाओ अभियान’ रहा, जिसमें पटना और आसपास के जिलों से 2,500 से अधिक किसानों ने भाग लिया। कार्यक्रम में कृषि वैज्ञानिकों, कृषि अधिकारियों, किसान उत्पादक संगठनों और कृषि उद्यमियों की भी बड़ी भागीदारी रही।

मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए शिवराज सिंह चौहान ने देशव्यापी ‘धरती माता बचाओ आंदोलन’ शुरू करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि यदि मिट्टी स्वस्थ रहेगी तो खेती, किसान और देश की खाद्य सुरक्षा भी मजबूत रहेगी।

प्राकृतिक खेती और संतुलित उर्वरक उपयोग पर जोर

उन्होंने किसानों से प्राकृतिक खेती, हरी खाद, जैविक संसाधनों के उपयोग और उर्वरकों के संतुलित प्रयोग को अपनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि रासायनिक उर्वरकों का असंतुलित उपयोग मिट्टी की गुणवत्ता को प्रभावित करता है, जिससे दीर्घकाल में उत्पादन क्षमता कम हो सकती है।

उन्होंने किसानों को नियमित मृदा परीक्षण कराने और वैज्ञानिकों की सलाह के अनुसार पोषक तत्वों का उपयोग करने की सलाह दी। उनका कहना था कि मिट्टी की सेहत बचाना भविष्य की खेती को सुरक्षित बनाने की सबसे बड़ी आवश्यकता है।

वैज्ञानिक खेती से बढ़ेगी आय

केंद्रीय मंत्री ने किसानों को वैज्ञानिक खेती की आधुनिक तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने दलहन उत्पादन बढ़ाने, जल संरक्षण तकनीकों के उपयोग और एकीकृत कृषि प्रणाली (आईएफएस) मॉडल को छोटे किसानों के लिए लाभकारी बताया।

उन्होंने कहा कि कृषि वैज्ञानिकों और किसानों के बीच लगातार संवाद बढ़ाने से नई तकनीकों का तेजी से प्रसार होगा और खेती अधिक लाभकारी बनेगी।

तकनीकी प्रदर्शनों ने किसानों को किया आकर्षित

कार्यक्रम में प्रत्यक्ष बुवाई धान (डीएसआर), रागी नर्सरी प्रबंधन और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) द्वारा विकसित लीची संरक्षण तकनीकों का प्रदर्शन किया गया। विशेषज्ञों ने किसानों को बताया कि इन तकनीकों से उत्पादन लागत कम करने, पानी की बचत करने और फसलों की गुणवत्ता बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

टिकाऊ कृषि और विकसित ग्रामीण भारत का संदेश

पूरे दौरे के दौरान केंद्रीय मंत्री का फोकस स्पष्ट रूप से टिकाऊ कृषि, मृदा स्वास्थ्य, जल संरक्षण, पर्यावरण सुरक्षा और ग्रामीण समृद्धि पर रहा। उन्होंने कहा कि किसानों की आय बढ़ाने और गांवों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए वैज्ञानिक खेती, प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण और आधुनिक तकनीकों का समावेश आवश्यक है।

पटना दौरे के अंत में यह संदेश प्रमुखता से उभरकर सामने आया कि कृषि और ग्रामीण विकास को केवल उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं रखा जा सकता। मृदा संरक्षण, जल प्रबंधन, प्राकृतिक खेती, किसान-वैज्ञानिक सहयोग और जनभागीदारी के माध्यम से ही विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है। बिहार इस दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है और आने वाले वर्षों में टिकाऊ कृषि विकास का एक महत्वपूर्ण मॉडल बन सकता है।