खुदरा उर्वरक विक्रय प्राधिकार पर 15 दिवसीय प्रशिक्षण शिविर का शुभारम्भ, बीज उत्पादन तकनीक पर कार्यशाला आयोजित !!
📍 पोकरण, राजस्थान | कृषि क्षेत्र में किसानों की क्षमता वृद्धि और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) पोकरण में खुदरा उर्वरक विक्रय प्राधिकार विषयक 15 दिवसीय प्रशिक्षण शिविर का शुभारम्भ किया गया। इसके साथ ही किसानों को उन्नत तकनीकों से जोड़ने हेतु बीज उत्पादन तकनीक पर एक दिवसीय कार्यशाला का भी सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय, बीकानेर के कुलगुरु डॉ. राजेंद्र बाबू दुबे ने की, जबकि वैद्य श्री कृष्ण मुरारी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को वैज्ञानिक पद्धतियों के माध्यम से बेहतर उत्पादन और आय के अवसर प्रदान करना रहा।
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🌱 नई किस्मों से बढ़ेगा उत्पादन !!
डॉ. दुबे अपने संबोधन में डॉ. दुबे ने कहा कि “बीज ही कृषि का भविष्य है”। उन्होंने किसानों को समयानुकूल उन्नत किस्मों को अपनाने की सलाह देते हुए बताया कि क्षेत्र विशेष के लिए जीरा की किस्म जे.जे.-1 एवं प्रताप इसबगोल-1 अधिक उत्पादन देने वाली हैं। उन्होंने युवाओं से बीज उत्पादन क्षेत्र में आगे आने का आह्वान किया, क्योंकि इसमें रोजगार और उद्यमिता की अपार संभावनाएं हैं। 
⚖️ संतुलित उर्वरक उपयोग से बचें नुकसान !!
वैद्य कृष्ण मुरारी मुख्य अतिथि वैद्य कृष्ण मुरारी ने किसानों को चेताते हुए कहा कि उर्वरकों का उपयोग संतुलित मात्रा और वैज्ञानिक सलाह के अनुसार ही करना चाहिए, अन्यथा भविष्य में मिट्टी की उर्वरता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। उन्होंने देशी गायों के संरक्षण और प्रबंधन पर भी जोर देते हुए कहा कि इससे दुग्ध उत्पादन में वृद्धि के साथ-साथ प्राकृतिक खेती को बढ़ावा मिलेगा।
🌾 स्थानीय कृषि व्यवसायों को अपनाने पर जोर !!
कार्यशाला में किसानों को स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन के लिए प्रेरित किया गया। वक्ताओं ने कहा कि किसान अपने बच्चों को खजूर, कैर नर्सरी, ककड़ी, काचर जैसी फसलों के उत्पादन एवं मूल्य संवर्धन की दिशा में प्रोत्साहित करें। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और किसान “नौकरी लेने वाले नहीं, बल्कि देने वाले” बनेंगे।
📊 केवीके की उपलब्धियां और नवाचार !!
केन्द्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डॉ. दशरथ प्रसाद ने अपने संबोधन में केवीके द्वारा किए गए नवाचारों, बीज उत्पादन में प्रगति और किसानों के लिए चलाए जा रहे कार्यक्रमों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि केवीके के मार्गदर्शन में किसान गुणवत्तापूर्ण बीज उत्पादन कर आत्मनिर्भर बन सकते हैं।
❓ किसानों की जिज्ञासाओं का समाधान !!
कार्यक्रम के दौरान बीज उत्पादन, भंडारण और उर्वरक प्रबंधन से जुड़े विभिन्न विषयों पर किसानों की जिज्ञासाओं का समाधान विशेषज्ञों द्वारा किया गया। डॉ. दुबे ने केवीके को नियमित रूप से इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने और विशेषज्ञों को आमंत्रित करने की सलाह दी।
🤝 वैज्ञानिकों का योगदान और धन्यवाद ज्ञापन !!
इस आयोजन में डॉ. के.जी. व्यास, डॉ. सुनील शर्मा और डॉ. रामनिवास ढाका सहित अन्य वैज्ञानिकों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। कार्यक्रम के समापन पर डॉ. दशरथ प्रसाद ने सभी अतिथियों, प्रशिक्षणार्थियों, किसानों और स्टाफ का आभार व्यक्त किया।