October 15, 2026 12:21 PM

Krishi Times

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जयपुर से कृषि क्रांति की शुरुआत!

 जयपुर से कृषि सुधारों का नया अध्याय शुरू, ‘टीम एग्रीकल्चर’ मॉडल से बदलेगी खेती की तस्वीर किसानों की आय, फूड सिक्योरिटी और पोषण सुरक्षा पर केंद्रित बड़ा रोडमैप !!

जयपुर। देश में कृषि सुधारों को नई दिशा देने की पहल करते हुए केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पश्चिमी क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन से बड़े बदलावों का संकेत दिया। इस सम्मेलन के जरिए केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर तालमेल बनाकर खेती को आधुनिक, लाभकारी और टिकाऊ बनाने का रोडमैप प्रस्तुत किया गया।

सम्मेलन में राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और गोवा के कृषि मंत्री, वैज्ञानिक, अधिकारी और प्रगतिशील किसान एक मंच पर जुटे, जिससे यह साफ हो गया कि आने वाले समय में कृषि विकास “टीम एग्रीकल्चर” मॉडल पर आधारित होगा। 

अब पारंपरिक बैठकों की जगह ‘जोनल एग्रीकल्चर कॉन्फ्रेंस’ !! 

केंद्रीय मंत्री ने स्पष्ट किया कि अब सिर्फ औपचारिक रबी-खरीफ बैठकों से आगे बढ़कर अलग-अलग कृषि-जलवायु क्षेत्रों के अनुसार गहन विचार-विमर्श होगा। इन कॉन्फ्रेंसों में प्रजेंटेशन, डेटा एनालिसिस और फील्ड इनपुट के आधार पर राज्यों के लिए स्पष्ट “टू-डू लिस्ट” तैयार की जाएगी, जिससे योजनाओं का जमीनी असर सुनिश्चित हो सके।

तीन बड़े लक्ष्य: खाद्य से पोषण सुरक्षा तक !!

सरकार ने कृषि क्षेत्र के लिए तीन प्रमुख लक्ष्य तय किए हैं:

खाद्य सुरक्षा , किसानों की आय में वृद्धि और पोषण सुरक्षा 

मंत्री ने कहा कि देश में गेहूं-चावल का उत्पादन पर्याप्त है, लेकिन दलहन और तिलहन में आत्मनिर्भरता जरूरी है, ताकि आयात पर निर्भरता खत्म हो सके और किसानों की आमदनी भी बढ़े।

फार्मर आईडी: डिजिटल खेती का नया युग !!

सरकार जल्द ही फार्मर आईडी आधारित सिस्टम को पूरी तरह लागू करने जा रही है। इससे:

बैंक लोन, सब्सिडी और सहायता सीधे किसानों तक पहुंचेगी

खाद वितरण में पारदर्शिता आएगी

फर्जीवाड़ा और डायवर्जन रुकेगा

कुछ राज्यों में इस प्रणाली के जरिए हजारों करोड़ रुपये सीधे किसानों के खातों में ट्रांसफर भी किए जा चुके हैं। MSP, खरीद और मूल्य संरक्षण पर बड़ा फैसला सरकार ने दलहन और तिलहन की 100% खरीद सुनिश्चित करने का संकेत दिया है। इसके अलावा: PM-AASHA और MIS के तहत कीमतों का संरक्षण, भावांतर योजना के जरिए बाजार और MSP का अंतर सीधे खाते में , टमाटर, प्याज, आलू जैसी फसलों के लिए ट्रांसपोर्ट सब्सिडी ये कदम किसानों को बाजार की अस्थिरता से बचाने के लिए महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।

राज्यों को मिलेगा लचीलापन, नहीं थोपे जाएँगे फैसले !! 

केंद्र सरकार ने साफ किया कि अब योजनाएं राज्यों पर थोपी नहीं जाएंगी। राज्य अपनी जरूरत के अनुसार प्राथमिकता तय कर सकेंगे, जैसे: ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई (Per Drop More Crop), खेतों की तारबंदी, स्थानीय फसल आधारित योजनाएं साथ ही बजट को समय पर जारी कर साल की शुरुआत से ही योजनाओं को जमीन पर लागू करने पर जोर दिया गया है।

कृषि रोडमैप और वैज्ञानिक सहयोग पर जोर !!

राज्यों के कृषि रोडमैप को मजबूत करने के लिए वैज्ञानिक संस्थानों (ICAR) की टीम केंद्र-राज्य संयुक्त कार्यबल तैयार किया जाएगा, जिससे स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार खेती में नवाचार को बढ़ावा मिलेगा। आपदा, बीमा और किसानों की सुरक्षा मौसम की अनिश्चितताओं को देखते हुए फसल नुकसान का सही आकलन प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का प्रभावी क्रियान्वयन पर विशेष जोर दिया गया है, ताकि किसानों को समय पर मुआवजा मिल सके।

विश्लेषण: क्यों अहम है यह पहल?

विशेषज्ञों के अनुसार, यह पहल भारत की कृषि नीति में एक बड़े बदलाव का संकेत है— डेटा आधारित निर्णय ,  डिजिटल ट्रैकिंग ,राज्य-विशिष्ट रणनीति बाजार जोखिम से सुरक्षा। अगर यह मॉडल सफल होता है, तो यह “सशक्त किसान, समृद्ध भारत” के विजन को तेज गति दे सकता है।

संक्षेप में :

जयपुर से शुरू हुआ यह कृषि सम्मेलन सिर्फ एक बैठक नहीं, बल्कि नई कृषि नीति का आधार बन सकता है—जहाँ तकनीक, नीति और साझेदारी मिलकर खेती को भविष्य के लिए तैयार है।