🌾 आत्मनिर्भर भारत की दिशा में बड़ी पहल: जलवायु-स्मार्ट गेहूं-जौ अनुसंधान से खाद्य सुरक्षा को मिलेगा नया बल !!
📍 करनाल/नई दिल्ली | देश को आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत @2047 के लक्ष्य की ओर तेजी से आगे बढ़ाने के लिए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) ने संरक्षण कृषि (Conservation Agriculture) और जलवायु-लचीली (Climate-Resilient) गेहूं एवं जौ उत्पादन प्रणालियों पर बड़ा फोकस किया है। इस पहल का उद्देश्य न केवल खाद्य सुरक्षा को मजबूत करना है, बल्कि किसानों की आय, पर्यावरण संरक्षण और टिकाऊ कृषि को भी बढ़ावा देना है। इसी क्रम में ICAR के महानिदेशक एवं कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग (DARE) के सचिव डॉ. एम.एल. जाट ने करनाल स्थित आईसीएआर–भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान (IIWBR) और आईसीएआर–केंद्रीय मृदा लवणता अनुसंधान संस्थान (CSSRI) का दौरा कर चल रहे अनुसंधानों की समीक्षा की। उनके साथ दिल्ली से मीडिया टीम भी मौजूद रही। 
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🌱 जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए नई कृषि रणनीति !!
डॉ. जाट ने इंडो-गंगेटिक मैदानी क्षेत्रों में उत्पादकता बढ़ाने, लागत घटाने और जलवायु जोखिमों से निपटने के लिए चल रहे शोध कार्यों का जायजा लिया। उन्होंने कहा कि भविष्य की कृषि कम संसाधनों में अधिक उत्पादन और जलवायु अनुकूल तकनीकों पर आधारित होगी। उन्होंने भरोसा जताया कि इस वर्ष देश में गेहूं उत्पादन बेहतर रहेगा, जिससे न केवल घरेलू जरूरतें पूरी होंगी बल्कि वैश्विक स्तर पर भी भारत मददगार साबित हो सकता है।
💡 उर्वरक में 25% तक बचत, उत्पादन बरकरार !!
ICAR द्वारा विकसित Biological Nitrification Inhibition (BNI) तकनीक को गेमचेंजर बताया जा रहा है।
👉 इससे उर्वरकों के उपयोग में 25% तक कमी संभव है
👉 उत्पादन पर कोई नकारात्मक असर नहीं
👉 किसानों की लागत घटेगी और पर्यावरण को लाभ मिलेगा
🚜 संरक्षण कृषि से चौंकाने वाले परिणाम !!
CSSRI, करनाल में 2009 से चल रहे दीर्घकालिक शोध प्लेटफॉर्म (CIMMYT के सहयोग से) ने कई अहम उपलब्धियां दी हैं—
💧 85% तक सिंचाई जल की बचत
🌿 28% उर्वरक की कमी
⛽ 51% ईंधन की बचत
🔥 95% तक पराली जलाने में कमी
🌍 46% ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कमी
📈 33% तक उत्पादन वृद्धि
💰 किसानों की आय लगभग दोगुनी
यह मॉडल अब टिकाऊ कृषि और जलवायु समाधान का राष्ट्रीय उदाहरण बन रहा है।
🌍 मिट्टी स्वास्थ्य में सुधार, कार्बन न्यूट्रल लक्ष्य को बल
15 वर्षों में इन तकनीकों से—
✔️ मिट्टी के सूक्ष्मजीव दोगुने हुए
✔️ ऑर्गेनिक कार्बन स्तर बढ़ा
✔️ मिट्टी की गुणवत्ता और जलवायु सहनशीलता में सुधार
यह भारत के कार्बन न्यूट्रल और वन हेल्थ लक्ष्यों को भी मजबूती देता है। 
🛡️ गेहूं रोगों पर सख्त निगरानी !!
ICAR का गेहूं रस्ट सर्विलांस प्रोग्राम देशभर में सक्रिय है—
30+ संस्थानों का नेटवर्क
1 करोड़ हेक्टेयर क्षेत्र में निगरानी
1000+ नई किस्मों का परीक्षण
इससे पीला, पत्ती और तना रस्ट जैसी बीमारियों से समय रहते बचाव संभव हो रहा है।
🌾 पोषण सुरक्षा: 55 बायोफोर्टिफाइड किस्में जारी !!
ICAR ने अब तक 55 पोषक तत्वों से भरपूर गेहूं किस्में विकसित की हैं—
आयरन, जिंक और प्रोटीन से समृद्ध
45% क्षेत्र में इनका विस्तार
👉 इससे कुपोषण से लड़ाई को भी बल मिल रहा है
🔬 भविष्य की तैयारी: जंगली प्रजातियों से नई ताकत !!
Aegilops जैसी जंगली प्रजातियों का उपयोग कर—
सूखा, गर्मी, लवणता और रोग प्रतिरोधी किस्में विकसित की जा रही हैं
👉 यह भविष्य की जलवायु चुनौतियों से निपटने में अहम होगा
🌾 जौ बना उभरता “स्मार्ट क्रॉप” !!
जौ (Barley) को लेकर भी सकारात्मक संकेत—
कम पानी और उर्वरक की जरूरत
खाद्य, पशु चारा और उद्योग में बढ़ती मांग
उच्च फाइबर के कारण स्वास्थ्य उत्पादों में उपयोग
👉 जौ टिकाऊ कृषि का मजबूत विकल्प बनकर उभर रहा है।
🚜 नई तकनीकें: समय, ईंधन और लागत में बड़ी बचत
ज़ीरो टिलेज
अवशेष प्रबंधन
मशीन आधारित बुवाई
इनसे
✔️ 6–10% उत्पादकता बढ़ी
✔️ 70–75% तक समय और ईंधन की बचत
📊 निष्कर्ष: खेत से वैश्विक मंच तक !!
भारत की मजबूत पकड़ ICAR के ये प्रयास न केवल किसानों को सशक्त बना रहे हैं, बल्कि—
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती, महिलाओं और युवाओं के लिए रोजगार ओर टिकाऊ और आत्मनिर्भर कृषि प्रणाली
👉 स्पष्ट है कि विज्ञान आधारित खेती के जरिए भारत वैश्विक खाद्य सुरक्षा में बड़ी भूमिका निभाने की ओर अग्रसर है।