अंतरराष्ट्रीय संगठनों संग भारत की कृषि साझेदारी और मजबूत

नई दिल्ली में FAO, WFP, IFAD, वर्ल्ड बैंक, ADB, GIZ और JICA के प्रतिनिधियों के साथ उच्चस्तरीय चर्चा, सतत कृषि और पोषण सुरक्षा पर जोर

Union Agriculture and Farmers Welfare Minister Shivraj Singh Chouhan chaired a high-level meeting at Krishi Bhawan with representatives of FAO, WFP, IFAD, World Bank, ADB, GIZ and JICA to strengthen cooperation in the agriculture sector.

The discussion focused on aligning long-term priorities for sustainable agriculture, farmers’ welfare and livelihoods. Shri Chouhan highlighted India’s journey from food deficit to food security and its growing focus on nutrition and sustainability. Partner organisations emphasised inclusive agriculture, technology, climate-resilient crops and support for small farmers.

नई दिल्ली। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने नई दिल्ली स्थित कृषि भवन में एक महत्वपूर्ण उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता की। यह बैठक भारत के कृषि क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय सहयोग को और अधिक मजबूत करने की दिशा में एक अहम पहल मानी जा रही है। बैठक में कृषि विकास, किसान कल्याण और सतत आजीविका से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर गहन चर्चा की गई।

प्रमुख अंतरराष्ट्रीय संगठनों की व्यापक सहभागिता

इस बैठक में फूड एंड एग्रीकल्चर ऑर्गनाइजेशन (FAO), वर्ल्ड फूड प्रोग्राम (WFP), इंटरनेशनल फंड फॉर एग्रीकल्चरल डेवलपमेंट (IFAD), वर्ल्ड बैंक, एशियन डेवलपमेंट बैंक (ADB), डॉयचे गेसेलशाफ्ट फ्यूर इंटरनेशनेले जुसामेनआर्बाइट (GIZ) तथा जापान इंटरनेशनल कोऑपरेशन एजेंसी (JICA) के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। सभी संगठनों ने भारतीय कृषि के साथ अपने सहयोग को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई।

सहयोग और दीर्घकालिक विकास पर केंद्रित संवाद

बैठक का मुख्य उद्देश्य भारत और अंतरराष्ट्रीय विकास साझेदारों के बीच सहयोग को और सुदृढ़ करना, दीर्घकालिक विकास प्राथमिकताओं का आपसी समन्वय करना तथा किसानों के कल्याण और उनकी आजीविका में सुधार के लिए ठोस और प्रभावी नीतियों पर विचार-विमर्श करना रहा। इसके साथ ही सतत विकास लक्ष्यों के अनुरूप कृषि पहलों को समर्थन देने पर भी सहमति बनी।

भारत की कृषि उपलब्धियों पर मंत्री का वक्तव्य

बैठक को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि भारत की कृषि यात्रा ऐतिहासिक और प्रेरणादायी रही है। देश ने खाद्य-घाटा वाले राष्ट्र से निकलकर आज विश्व के प्रमुख कृषि उत्पादक और निर्यातक देशों में अपनी मजबूत पहचान बनाई है। उन्होंने कहा कि यह परिवर्तन किसानों की मेहनत, वैज्ञानिकों के योगदान और नीतिगत सुधारों का परिणाम है।

अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बताया परिवर्तन का आधार

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत की इस सफलता में अंतरराष्ट्रीय संगठनों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। तकनीकी सहयोग, क्षमता निर्माण और वित्तीय समर्थन के माध्यम से इन संस्थाओं ने भारतीय कृषि को सशक्त बनाने में उल्लेखनीय योगदान दिया है।

खाद्य सुरक्षा से आगे बढ़कर पोषण सुरक्षा पर फोकस

शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि भारत ने खाद्य सुरक्षा का लक्ष्य सफलतापूर्वक हासिल कर लिया है और अब सरकार का प्रमुख उद्देश्य पोषण सुरक्षा को मजबूत करना, किसानों की आय बढ़ाना तथा सतत और सम्मानजनक आजीविका के अवसर सृजित करना है।

अनुभव साझा करने और वैश्विक सीख अपनाने पर बल

उन्होंने कहा कि भारत अब अन्य देशों के साथ अपने अनुभवों और सर्वोत्तम कृषि पद्धतियों को साझा करने की स्थिति में है। साथ ही, वैश्विक नवाचारों और विभिन्न देशों में अपनाए गए सफल मॉडलों से सीख लेकर कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों में पारस्परिक विकास और सहयोग को नई गति दी जा सकती है।

समावेशी कृषि और छोटे किसानों पर विशेष चर्चा

बैठक में अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधियों ने समावेशी कृषि विकास पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि छोटे और सीमांत किसानों के लिए बेहतर बाजार पहुंच, मूल्य संवर्धन और जोखिम प्रबंधन की व्यवस्था मजबूत करना समय की आवश्यकता है। इसके साथ ही युवाओं, महिलाओं और किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) की भूमिका को और सशक्त बनाने पर सहमति बनी।

प्रौद्योगिकी, डिजिटल कृषि और निवेश की भूमिका

प्रतिनिधियों ने कृषि क्षेत्र में प्रौद्योगिकी एवं नवाचार, डिजिटल कृषि, वित्तीय समावेशन, निजी क्षेत्र की भागीदारी और निवेश को भविष्य के कृषि विकास का प्रमुख आधार बताया। इन क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने से कृषि की उत्पादकता और लाभप्रदता दोनों में वृद्धि संभव है।

जलवायु परिवर्तन और संसाधन प्रबंधन पर जोर

बैठक में अनुसंधान एवं विकास (R&D), कटाई-उपरांत अवसंरचना विकास, जलवायु-सहिष्णु फसलों को बढ़ावा देने, तथा प्राकृतिक संसाधनों के सतत प्रबंधन पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता पर बल दिया गया। जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने के लिए साझा रणनीतियों पर भी चर्चा हुई।

नीति निर्माण में सहायक होंगे अंतरराष्ट्रीय सुझाव

केंद्रीय कृषि मंत्री ने अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधियों के मूल्यवान सुझावों और विचारों के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि ये सुझाव कृषि क्षेत्र में दीर्घकालिक योजना, प्रभावी नीति निर्माण और बेहतर क्रियान्वयन में सहायक सिद्ध होंगे।

वरिष्ठ अधिकारियों की गरिमामयी उपस्थिति

इस अवसर पर कृषि एवं किसान कल्याण विभाग (DA&FW) के सचिव, कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग (DARE) के सचिव, DA&FW के अपर सचिव सहित मंत्रालय के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे और उन्होंने विभिन्न बिंदुओं पर अपने विचार साझा किए।

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