कृषि नवाचार और प्रौद्योगिकी व्यावसायीकरण के लिए शोध–उद्योग साझेदारी पर व्यापक मंथन
नई दिल्ली -भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद–भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (आईसीएआर–आईएआरआई) द्वारा 30 जनवरी 2026 को इंडस्ट्री मीट 2026 का भव्य आयोजन किया गया। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य फसल एवं बागवानी क्षेत्रों में शोध संस्थानों और उद्योग के बीच सहयोग को नई दिशा देना, कृषि नवाचार को गति प्रदान करना तथा अनुसंधान आधारित प्रौद्योगिकियों के प्रभावी व्यावसायीकरण को बढ़ावा देना रहा। कार्यक्रम में नीति, अनुसंधान और उद्योग जगत के प्रमुख प्रतिनिधियों ने भाग लिया और कृषि क्षेत्र की वर्तमान व भविष्य की चुनौतियों पर गहन विचार-विमर्श किया।
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नवाचार आधारित सतत कृषि पर जोर
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. आर. एस. परोदा, अध्यक्ष—ट्रस्ट फॉर एडवांसमेंट ऑफ एग्रीकल्चरल साइंसेज़ (TAAS) एवं आईसीएआर के पूर्व महानिदेशक, ने अपने संबोधन में नवाचार-प्रेरित और पर्यावरण-संवेदनशील कृषि प्रणालियों की आवश्यकता को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि उत्पादकता वृद्धि के साथ-साथ प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण भी उतना ही आवश्यक है। डॉ. परोदा ने सार्वजनिक–निजी भागीदारी को मजबूत करने, बौद्धिक संपदा अधिकार (IPR), लाइसेंसिंग और कानूनी ढांचे से जुड़ी जटिलताओं को दूर करने पर बल दिया, ताकि शोध–उद्योग सहयोग अधिक सुचारू और परिणामोन्मुख बन सके। साथ ही, उन्होंने क्षेत्रीय असमानताओं को कम करने, तकनीकों के बड़े पैमाने पर विस्तार और स्टार्ट-अप्स के लिए अनुकूल नीतिगत वातावरण तैयार करने की आवश्यकता बताई।
विकसित भारत’ के लिए मानव पूंजी निर्माण जरूरी
डॉ. एम. एल. जाट, सचिव (DARE) एवं महानिदेशक, आईसीएआर, ने कहा कि आईसीएआर एक मानव-केन्द्रित, विज्ञान-आधारित संगठन है और उद्योग के साथ घनिष्ठ सहयोग के बिना शोध को धरातल पर प्रभावी रूप से लागू नहीं किया जा सकता। उन्होंने उद्योग और अकादमिक जगत को एक मंच पर लाने के लिए आईसीएआर–आईएआरआई की पहल की सराहना की और कहा कि ऐसे प्रयास ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को प्राप्त करने में मानव पूंजी निर्माण के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। डॉ. जाट ने अनुसंधान और उद्योग के बीच मानव संसाधन से जुड़ी खाइयों को पाटने, संभावनाशील तकनीकों के त्वरित स्केल-अप तथा कृषि अनुसंधान में उद्योग द्वारा सीएसआर फंडिंग के माध्यम से बढ़ते सहयोग को सकारात्मक संकेत बताया।
फसल सुधार और जर्मप्लाज्म उपयोग पर विशेष चर्चा
डॉ. डी. के. यादव, उप महानिदेशक (फसल विज्ञान), आईसीएआर, ने वर्तमान और भविष्य की कृषि चुनौतियों से निपटने के लिए गुण-आधारित (ट्रेट-बेस्ड) प्रजनन रणनीतियों को अपनाने पर जोर दिया। उन्होंने जर्मप्लाज्म संसाधनों के प्रभावी उपयोग और प्रजनन कंसोर्टिया को मजबूत करने की आवश्यकता बताई, ताकि जलवायु परिवर्तन, रोग-कीट दबाव और उत्पादकता संबंधी चुनौतियों का समाधान किया जा सके।
उद्योग–अकादमिक संवाद से सभी हितधारकों को लाभ
डॉ. त्रिलोचन महापात्रा, अध्यक्ष—पौधा किस्म एवं कृषक अधिकार प्राधिकरण (PPVFRA), नई दिल्ली, ने कहा कि शोध, शिक्षा और विस्तार के क्षेत्र में उद्योग की आवश्यकताओं को समझना समय की मांग है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि उद्योग–अकादमिक संवाद से निकलने वाले ठोस और क्रियान्वयन योग्य परिणामों का लाभ छात्रों, वैज्ञानिकों, किसानों, उपभोक्ताओं और उद्योग—सभी तक पहुँचना चाहिए।
बाजारोन्मुख शोध और संयुक्त कार्यक्रमों की आवश्यकता
डॉ. च. श्रीनिवास राव, निदेशक, आईसीएआर–आईएआरआई, ने अपने संबोधन में उद्योग की प्रमुख अपेक्षाओं को रेखांकित करते हुए संस्थागत शोध प्राथमिकताओं को बाजार और सामाजिक मांगों के अनुरूप संरेखित करने पर जोर दिया। उन्होंने कृषि के मेगा-चुनौतियों से निपटने के लिए रणनीतिक दृष्टिकोण प्रस्तुत किया और उद्योग-प्रेरित संयुक्त अनुसंधान कार्यक्रमों की वकालत की, ताकि शोध परिणाम सीधे प्रभावोन्मुख समाधानों में बदले जा सकें।
डॉ. राव ने जानकारी दी कि यह इंडस्ट्री मीट संस्थान द्वारा शुरू की गई थीमैटिक उद्योग–अकादमिक संवाद श्रृंखला की दूसरी कड़ी है। इससे पहले पौध संरक्षण उद्योगों के साथ आयोजित पहली बैठक को हितधारकों से उत्साहजनक प्रतिक्रिया मिली थी। उसी अनुभव के आधार पर इस बार फसल सुधार, बीज और मूल विज्ञान उद्योगों के साथ यह बैठक आयोजित की गई। उन्होंने कहा कि भविष्य में भी आईसीएआर–आईएआरआई ऐसे केंद्रित इंडस्ट्री मीट आयोजित करता रहेगा।
एमओयू प्रक्रियाओं को सरल बनाने की मांग
आर. एम. प्रभाकर राव, नुजिवीडू सीड्स लिमिटेड का प्रतिनिधित्व करते हुए, ने शोध–उद्योग सहयोग को और प्रभावी बनाने के लिए एमओयू प्रक्रियाओं को सरल, व्यावहारिक और लचीला बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। संवाद सत्रों के दौरान उद्योग प्रतिनिधियों ने एमओयू के क्रियान्वयन, अनुपालन आवश्यकताओं, IPR तक पहुंच, सीएसआर फंडिंग, तकनीक के स्केल-अप और व्यावसायीकरण के मार्गों से जुड़े मुद्दों पर अपने विचार साझा किए।
सशक्त मंच के रूप में इंडस्ट्री मीट 2026
इंडस्ट्री मीट 2026 संवाद, नेटवर्किंग और साझेदारी निर्माण के लिए एक सशक्त मंच के रूप में उभरा। इस आयोजन ने भारतीय कृषि के लिए सतत, स्केलेबल और किसान-केंद्रित समाधान विकसित करने हेतु उद्योग के साथ मिलकर काम करने की आईसीएआर–आईएआरआई की प्रतिबद्धता को पुनः सुदृढ़ किया। कार्यक्रम में संयुक्त निदेशक, विभागाध्यक्ष, आईसीएआर–आईएआरआई के वैज्ञानिक, उद्योग प्रतिनिधि तथा अन्य संबंधित हितधारक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।