ओलावृष्टि के बाद आम किसानों के लिए अलर्ट! अपनाएं 30 दिन का प्लान !!

ओलावृष्टि के बाद आम बागानों को बचाने का ‘वैज्ञानिक मास्टर प्लान’, 30 दिन की रणनीति से घटेगा नुकसान !!

पूसा, – बिहार सहित पूर्वी और उत्तर भारत के कई हिस्सों में हाल ही में हुई ओलावृष्टि, तेज आंधी और बारिश ने आम उत्पादक किसानों की चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस समय आम की फसल मंजर (फूल) से लेकर प्रारंभिक फल सेट (टिकोला) की अवस्था में है, जो बेहद संवेदनशील चरण माना जाता है। ऐसे में मौसम की मार से उत्पादन पर बड़ा असर पड़ने की आशंका है।

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प्रोफेसर (डॉ.) एस. के. सिंह

डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के पौध रोग विज्ञान एवं निमेटोलॉजी विभाग के वरिष्ठ वैज्ञानिक प्रो. (डॉ.) एस. के. सिंह ने किसानों के लिए 0–30 दिन का विस्तृत इमरजेंसी स्प्रे शेड्यूल जारी किया है। उनके अनुसार यदि किसान समय पर वैज्ञानिक प्रबंधन अपनाएं, तो 30 से 60 प्रतिशत तक संभावित नुकसान को कम किया जा सकता है।

🌧️ मौसम का दोहरा असर: फूल से फल तक संकट !!

मार्च के तीसरे सप्ताह में आए खराब मौसम ने आम के बागानों में कई तरह की समस्याएं पैदा कर दी हैं। तेज हवाओं और बारिश के कारण फूलों और छोटे फलों का झड़ना बढ़ गया है। वहीं, लगातार नमी और तापमान में उतार-चढ़ाव से परागण प्रक्रिया भी प्रभावित हुई है।

विशेषज्ञ बताते हैं कि मधुमक्खियों की सक्रियता कम होने से परागण कमजोर हो जाता है, जिससे फल बनने की प्रक्रिया बाधित होती है। इसके अलावा उच्च आर्द्रता के कारण एन्थ्रेक्नोज और पाउडरी मिल्ड्यू जैसे फफूंदजनित रोग तेजी से फैलने लगते हैं। ओलावृष्टि से पत्तियों और फलों पर चोट लगने से संक्रमण का खतरा और बढ़ जाता है।

यदि समय रहते नियंत्रण नहीं किया गया, तो उत्पादन में 30 से 80 प्रतिशत तक गिरावट संभव है।

🧪 30 दिन का ‘इमरजेंसी स्प्रे शेड्यूल’: चरणबद्ध समाधान !!

📅 पहले 48 घंटे: रोग नियंत्रण सबसे जरूरी ..

बारिश रुकते ही सबसे पहला कदम फफूंदनाशी स्प्रे करना है। खेतों में मौजूद अतिरिक्त नमी रोगों के लिए अनुकूल वातावरण बनाती है।

इस चरण में Carbendazim + Mancozeb, Propiconazole या Copper oxychloride जैसे फफूंदनाशियों का छिड़काव करने की सलाह दी गई है। इससे एन्थ्रेक्नोज और पाउडरी मिल्ड्यू का प्रारंभिक प्रकोप रोका जा सकता है और ओलों से बने घावों में संक्रमण नहीं फैलता।

📅 4–5 दिन बाद: पोषण से बढ़ाएं फल सेट !!

बारिश के बाद परागण प्रक्रिया कमजोर पड़ जाती है, जिससे फूल झड़ने लगते हैं। ऐसे में पौधों को अतिरिक्त पोषण देना जरूरी होता है।

विशेषज्ञ KNO₃ और बोरॉन या 19:19:19 के साथ बोरॉन के छिड़काव की सलाह देते हैं। इससे पोलन ट्यूब ग्रोथ में सुधार होता है, फल सेट बढ़ता है और फूल गिरने की समस्या कम होती है।

📅 10–12 दिन: दोबारा सुरक्षा कवच  !!

नमी बनी रहने पर रोगों का खतरा फिर बढ़ जाता है। इसलिए दूसरे चरण में Hexaconazole, Carbendazim या Azoxystrobin जैसे फफूंदनाशियों का छिड़काव जरूरी है।

यह स्प्रे छोटे फलों और फूलों को द्वितीयक संक्रमण से बचाता है और रोगों पर लंबे समय तक नियंत्रण बनाए रखता है।

📅 15–18 दिन: फल गिरावट रोकने का समय !!

इस समय छोटे फल (fruitlets) बहुत नाजुक होते हैं और गिरने का खतरा रहता है।

Planofix, Seaweed extract या सूक्ष्म पोषक तत्वों (जिंक, बोरॉन, आयरन) का प्रयोग करने से फल गिरावट कम होती है, पौधों की तनाव सहनशीलता बढ़ती है और फल का विकास बेहतर होता है।

📅 25–30 दिन: अंतिम सुरक्षा, उत्पादन की गारंटी !!

यह अंतिम चरण फल को ‘मार्बल स्टेज’ तक सुरक्षित रखने के लिए महत्वपूर्ण है।

Carbendazim + Mancozeb, Propiconazole या Tebuconazole का छिड़काव कर अंतिम बार रोगों से सुरक्षा दी जाती है, जिससे फल की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों बेहतर होते हैं।

🐛 कीट प्रबंधन: संतुलित और सावधानीपूर्ण तरीका !!

विशेषज्ञों ने किसानों को चेतावनी दी है कि फूल अवस्था में कीटनाशकों का अंधाधुंध उपयोग मधुमक्खियों जैसे परागण करने वाले जीवों के लिए हानिकारक होता है।

केवल आवश्यकता होने पर Imidacloprid, Thiamethoxam या नीम तेल का प्रयोग करें और छिड़काव हमेशा शाम के समय ही करें।

🌱 सहायक उपाय: छोटे कदम, बड़ा फायदा !!

वैज्ञानिक प्रबंधन केवल स्प्रे तक सीमित नहीं है। कुछ सहायक उपाय भी बेहद जरूरी हैं—

जल निकास व्यवस्था: बाग में पानी जमा न होने दें

स्वच्छता: गिरे हुए फूल और संक्रमित भाग हटाएं

छंटाई: क्षतिग्रस्त टहनियों को काटकर नष्ट करें

नियमित निगरानी: हर 2–3 दिन में बाग का निरीक्षण करें

ये उपाय रोगों के स्रोत को कम करते हैं और पौधों को स्वस्थ बनाए रखते हैं।

⚠️ सावधानियां: सही समय और सही मात्रा जरूरी !!

छिड़काव सुबह या शाम के समय ही करें

तेज हवा या बारिश में स्प्रे से बचें

दवाओं का मिश्रण विशेषज्ञ की सलाह से करेंअनुशंसित मात्रा (लेबल क्लेम) का पालन करें

📊 निष्कर्ष:

समय पर प्रबंधन ही सफलता की कुंजी !!

विशेषज्ञों के अनुसार वर्तमान मौसम परिस्थितियों में आम के बागानों को बचाने के लिए यह 30 दिन का वैज्ञानिक मास्टर प्लान बेहद प्रभावी है। यदि किसान समय पर फफूंदनाशी स्प्रे, संतुलित पोषण और बाग की स्वच्छता पर ध्यान देते हैं, तो न केवल नुकसान कम किया जा सकता है बल्कि बेहतर गुणवत्ता का उत्पादन भी सुनिश्चित किया जा सकता है।

कृषि वैज्ञानिकों का मानना है कि बदलते मौसम के दौर में सतर्कता, त्वरित निर्णय और वैज्ञानिक खेती ही किसानों की सबसे बड़ी ताकत है।

📢 Disclaimer:

अधिक जानकारी के लिए अपने नजदीकी कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) या कृषि विशेषज्ञ से संपर्क करें। सभी रसायनों का उपयोग केवल अनुशंसित मात्रा में ही करें।

प्रो. (डॉ.) एस. के. सिंह विभागाध्यक्ष, पादप रोग विज्ञान एवं नेमेटोलॉजी अधिकारी-प्रभारी, केला अनुसंधान केन्द्र, गोरौल डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा 📧 संपर्क: sksraupusa@gmail.com