राष्ट्रीय मत्स्य पालन सचिव सम्मेलन योजनाओं की समीक्षा,

राष्ट्रीय मत्स्य पालन सचिव सम्मेलन आयोजित :

मत्स्य पालन क्षेत्र की प्रगति, चुनौतियों और भविष्य की रणनीति पर व्यापक मंथन :

नई दिल्ली।
देश में मत्स्य पालन और जलीय कृषि क्षेत्र की अब तक की प्रगति की समीक्षा करने तथा आने वाले वर्षों की रणनीति तय करने के उद्देश्य से मत्स्य पालन सचिवों का राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया गया। सम्मेलन की अध्यक्षता केंद्रीय मत्स्य पालन सचिव डॉ. अभिलक्ष लिखी ने की। इस दौरान केंद्र और राज्यों द्वारा संचालित प्रमुख योजनाओं के क्रियान्वयन, निवेश, अवसंरचना विकास, निर्यात संभावनाओं और डिजिटलीकरण जैसे अहम विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई।

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प्रमुख योजनाओं की समीक्षा पर रहा फोकस !!

सम्मेलन में प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY), मत्स्य पालन और जलीय कृषि अवसंरचना विकास कोष (FIDF) तथा प्रधानमंत्री मत्स्य किसान समृद्धि सह-योजना (PM-MKSSY) के क्रियान्वयन की प्रगति की समीक्षा की गई। इसके साथ ही समुद्री मत्स्य गणना-2025, मूल्य वर्धित समुद्री खाद्य उत्पादों के निर्यात और योजनाओं से जुड़े प्रमुख लक्ष्यों पर अद्यतन जानकारी साझा की गई।

25 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की भागीदारी !!

यह सम्मेलन एपी शिंदे संगोष्ठी हॉल, एनएएससी कॉम्प्लेक्स, पूसा रोड, नई दिल्ली में आयोजित किया गया, जिसमें 25 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। साथ ही आईसीएआर संस्थानों, स्मॉल फार्मर्स एग्रीबिजनेस कंसोर्टियम (SFAC), नेशनल कोऑपरेटिव डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (NCDC), नाफेड, मरीन प्रोडक्ट्स एक्सपोर्ट डेवलपमेंट अथॉरिटी (MPEDA) तथा अन्य हितधारक संस्थानों के प्रतिनिधियों ने भी सम्मेलन में भाग लिया।

समय पर कार्रवाई और वैज्ञानिक योजना पर जोर !!

सम्मेलन को संबोधित करते हुए केंद्रीय सचिव डॉ. अभिलक्ष लिखी ने कहा कि “समय पर कार्रवाई, मजबूत कार्यान्वयन और वैज्ञानिक योजना आने वाले वर्षों में भारत के मत्स्य पालन विकास की दिशा तय करेगी।” उन्होंने फंड के उपयोग को लेकर राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से स्वीकृत गतिविधियों के लिए धन का समयबद्ध और कुशल वितरण सुनिश्चित करने का आह्वान किया।

इंटीग्रेटेड एक्वापार्क और समुद्री शैवाल खेती पर विशेष ध्यान !!

डॉ. लिखी ने इंटीग्रेटेड एक्वापार्क, समुद्री शैवाल की खेती, क्लाइमेट-रेजिलिएंट कोस्टल फिशरमैन विलेजेज (CRCFVs), आर्टिफिशियल रीफ और क्लस्टर विकास परियोजनाओं को तय समय-सीमा में पूरा करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि इन पहलों से न केवल उत्पादन बढ़ेगा, बल्कि तटीय और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।

डिजिटलीकरण और बीमा कवरेज बढ़ाने की अपील !!

केंद्रीय सचिव ने मत्स्य क्षेत्र में डिजिटलीकरण को प्राथमिकता देने की जरूरत बताते हुए नेशनल फिशरीज डिजिटल पोर्टल पर पंजीकरण की संख्या बढ़ाने का आग्रह किया। उन्होंने एक्वाकल्चर बीमा कवरेज में मौजूदा कमियों की ओर इशारा करते हुए कहा कि मछुआरों और मछली पालकों की आजीविका सुरक्षा के लिए राज्यों को बीमा योजनाओं को अधिक प्रभावी ढंग से लागू करना चाहिए।

इनलैंड मत्स्य पालन में विविधीकरण की जरूरत !!

मत्स्य पालन विभाग के संयुक्त सचिव (इनलैंड) सागर मेहरा ने अंतर्देशीय मत्स्य पालन की स्थिति पर प्रस्तुति दी। उन्होंने कहा कि नीतिगत अधिसूचनाओं के बावजूद जलाशय मत्स्य पालन और इनलैंड क्लस्टर अभी भी अपेक्षित स्तर तक विकसित नहीं हो पाए हैं। उन्होंने भारतीय मेजर कार्प्स से आगे बढ़कर उच्च मूल्य वाली और बाजार से जुड़ी प्रजातियों को बढ़ावा देने पर जोर दिया।

मैरीकल्चर और तटीय संसाधनों के बेहतर उपयोग का आह्वान !!

संयुक्त सचिव (मरीन) नीतू कुमारी प्रसाद ने तटीय राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से जुड़े मुद्दों पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने मैरीकल्चर डेवलपमेंट-2025 के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) को शीघ्र लागू करने, स्पष्ट समुद्री जल लीजिंग नियमों और बायोसिक्योरिटी प्रोटोकॉल को अपनाने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि भारत की लंबी तटरेखा होने के बावजूद खारे पानी के संसाधनों का सीमित उपयोग हो रहा है।

वैल्यू-एडेड सीफूड निर्यात में अपार संभावनाएं !!

एमपीईडीए अध्यक्ष डोड्डा वेंकट स्वामी ने मूल्य वर्धित समुद्री खाद्य निर्यात पर प्रस्तुति देते हुए कहा कि वैश्विक बाजारों में भारत की स्थिति मजबूत करने के लिए कौशल विकास, मछली अपशिष्ट के उपयोग, स्थिरता, बायोसिक्योरिटी और ट्रेसबिलिटी पर विशेष ध्यान देना होगा।

आईसीएआर की अपेक्षाएं और तकनीकी सुझाव !!

आईसीएआर के उप महानिदेशक डॉ. जे.के. जेना ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से कैच-डेटा संग्रह के लिए समान तकनीक अपनाने, मजबूत स्टॉक मूल्यांकन प्रणाली विकसित करने और न्यूनतम कानूनी आकार मानदंडों के पालन पर जोर दिया। उन्होंने तकनीकों और सर्वोत्तम प्रथाओं के व्यापक प्रसार के लिए मल्टीप्लायर इकाइयों की स्थापना की आवश्यकता भी बताई।

राज्यों की प्रगति रिपोर्ट और मांगें !!

सम्मेलन में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने अपनी प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की, संचालन संबंधी चुनौतियों को साझा किया और मार्च 2026 तक व्यय लक्ष्यों को पूरा करने का आश्वासन दिया। कई राज्यों ने एनएफडीबी से मार्गदर्शन की मांग की। तमिलनाडु, पुडुचेरी, ओडिशा, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश सहित अन्य राज्यों ने अपनी विशिष्ट पहलों और प्रस्तावों की जानकारी दी।

समन्वित प्रयासों से ब्लू इकोनॉमी को मिलेगा बल !!

सम्मेलन के निष्कर्ष में यह स्पष्ट किया गया कि राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर बेहतर समन्वय, समयबद्ध क्रियान्वयन और संस्थागत क्षमता को मजबूत कर भारत के मत्स्य पालन क्षेत्र को नई ऊंचाइयों पर ले जाया जा सकता है। यह सम्मेलन भारत के ब्लू इकोनॉमी विजन को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा रहा है।