November 3, 2026 12:49 AM

Krishi Times

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मक्का की खेती को अधिक लाभकारी बनाने की पहल!

मक्का पैदावार को 5.5 करोड़ से बढ़ाकर 7.5 करोड़ टन करने का लक्ष्य, किसानों की आय बढ़ाने पर जोर

हैदराबाद में प्रथम अंतरराष्ट्रीय मक्का सम्मेलन 2026 शुरू, अनुसंधान और प्रसार गतिविधियों को खेती की लाभप्रदता से जोड़ने की जरूरत: डॉ. एम.एल. जाट

हैदराबाद, –भारत में मक्का पैदावार और उत्पादकता बढ़ाने के साथ किसानों की आय एवं ग्रामीण आजीविका को मजबूत करने के उद्देश्य से प्रथम अंतरराष्ट्रीय मक्का सम्मेलन 2026 का सोमवार को हैदराबाद में शुभारंभ हुआ। 2 से 4 नवंबर तक आयोजित इस सम्मेलन में देश-विदेश के कृषि वैज्ञानिकों, नीति निर्माताओं, शोध संस्थानों और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।

सम्मेलन को संबोधित करते हुए कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग (DARE) के सचिव और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के महानिदेशक डॉ. एम.एल. जाट ने कहा कि कृषि अनुसंधान और विस्तार गतिविधियों का वास्तविक लाभ तभी है, जब उनका परिणाम किसानों की अधिक आय, खेती की बेहतर लाभप्रदता और जीवन स्तर में सुधार के रूप में सामने आए।

उन्होंने बताया कि भारत में मक्का का वार्षिक पैदावार लगभग 5.5 करोड़ टन तक पहुंच गया है। आने वाले दशक में इसे बढ़ाकर 7.5 करोड़ टन करने का लक्ष्य रखा जाना चाहिए। इसके लिए मक्का की उत्पादकता में लगभग डेढ़ गुना वृद्धि करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि उत्पादन बढ़ाने के साथ फसल की गुणवत्ता, बेहतर बीज व्यवस्था और खेतों में मौजूद उत्पादकता अंतर को कम करना भी प्राथमिकता होनी चाहिए।

4F से आगे बढ़कर 5F मॉडल अपनाने पर जोर

डॉ. जाट ने मक्का खेती के पारंपरिक 4F मॉडल—फूड (Food), फीड (Feed), फोडर (Fodder) और फ्यूल (Fuel)—को विस्तार देते हुए इसमें पांचवें F यानी फार्मर्स (Farmers) को केंद्र में रखने की बात कही।

उन्होंने कहा कि मक्का केवल खाद्य सुरक्षा की फसल नहीं है, बल्कि पशु आहार, चारा, ऊर्जा और औद्योगिक उपयोग के लिहाज से भी इसका महत्वपूर्ण स्थान है। ऐसे में इसकी पूरी मूल्य शृंखला को किसानों के आर्थिक हितों से जोड़ना जरूरी है। किसानों को बेहतर किस्मों, गुणवत्तापूर्ण बीजों और आधुनिक कृषि तकनीकों तक पहुंच उपलब्ध कराकर उत्पादन लागत कम करने तथा लाभ बढ़ाने की दिशा में काम करना होगा।

पांच वर्षों में विकसित किए गए 329 मक्का हाइब्रिड

ICAR के उप महानिदेशक (फसल विज्ञान) डॉ. डी.के. यादव ने मक्का अनुसंधान में हुई प्रगति की जानकारी देते हुए बताया कि पिछले पांच वर्षों में 329 मक्का हाइब्रिड विकसित किए गए हैं।

उन्होंने कहा कि भविष्य की जरूरतों को देखते हुए फसल प्रजनन कार्यक्रमों को और मजबूत करना होगा। इसके साथ ही मक्का की पोषण गुणवत्ता में सुधार, जलवायु और अन्य प्रतिकूल परिस्थितियों को सहन करने वाली किस्मों का विकास, कृषि मशीनीकरण तथा सार्वजनिक क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण बीज उत्पादन को बढ़ावा देना जरूरी है।

उन्होंने अनुसंधान संस्थानों और बीज उत्पादन व्यवस्था के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

उन्नत प्रजनन तकनीकों और जर्मप्लाज्म संरक्षण की जरूरत

प्रसिद्ध मक्का वैज्ञानिक एवं CIMMYT से जुड़े पद्मश्री डॉ. एस.के. वासल ने मक्का की उन्नत किस्में विकसित करने के लिए सरल और कम लागत वाली प्रजनन तकनीकों को अपनाने की वकालत की।

वहीं, पूर्व DARE सचिव एवं ICAR महानिदेशक पद्मभूषण डॉ. आर.एस. परोदा ने उन्नत फसल प्रजनन, आनुवंशिक संसाधनों (जर्मप्लाज्म) के संरक्षण और मजबूत मूल्य शृंखला विकसित करने पर बल दिया। उन्होंने मक्का में अफ्लाटॉक्सिन जैसी फफूंदजनित विषाक्तता की समस्या के प्रभावी प्रबंधन को भी महत्वपूर्ण बताया। इससे फसल की गुणवत्ता, खाद्य एवं पशु आहार सुरक्षा और बाजार में स्वीकार्यता बेहतर हो सकती है।

अनुसंधान संस्थानों और उद्योग के बीच सहयोग जरूरी

मक्का प्रौद्योगिकी एवं अनुसंधान से जुड़े संगठन MTAI के अध्यक्ष डॉ. एच.एस. जाट ने कहा कि मक्का क्षेत्र के समग्र विकास के लिए अनुसंधान संस्थानों, कृषि विश्वविद्यालयों, नीति निर्माताओं और निजी उद्योग के बीच मजबूत साझेदारी जरूरी है।

उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक अनुसंधान को खेतों तक पहुंचाने और विकसित तकनीकों को व्यावहारिक स्तर पर अपनाने के लिए सभी संबंधित पक्षों को मिलकर काम करना होगा।

टिकाऊ मक्का उत्पादन के लिए बनेगा रोडमैप

सम्मेलन की थीम “बदलती दुनिया में खाद्य, पशु आहार, चारा, ईंधन और टिकाऊपन के लिए मक्का क्रांति” रखी गई है।

तीन दिवसीय सम्मेलन का उद्देश्य मक्का अनुसंधान, उत्पादकता, बीज प्रणाली, प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन से जुड़े मुद्दों पर चर्चा कर भविष्य की कार्ययोजना तैयार करना है।

भारत में मक्का की बढ़ती मांग को देखते हुए उत्पादन के साथ गुणवत्ता, प्रसंस्करण, बाजार संपर्क और किसानों की भागीदारी को मजबूत करना महत्वपूर्ण होगा। सम्मेलन से निकलने वाले सुझाव देश में मक्का आधारित कृषि अर्थव्यवस्था को अधिक प्रतिस्पर्धी, लाभकारी और टिकाऊ बनाने की दिशा में उपयोगी साबित हो सकते

Photo: courtesy icar