आईसीएआर-आईआईआरआर में मनाया गया 11वां आयुर्वेद दिवस, स्वस्थ जीवनशैली और समग्र स्वास्थ्य पर दिया गया जोर
हैदराबाद। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के अंतर्गत कार्यरत भारतीय चावल अनुसंधान संस्थान (ICAR-IIRR), हैदराबाद में 23 सितंबर 2026 को 11वां आयुर्वेद दिवस उत्साहपूर्वक मनाया गया। इस वर्ष का विषय “स्वस्थ कल के लिए आयुर्वेद” (Ayurveda for a Healthier Tomorrow) रहा। कार्यक्रम में संस्थान के वैज्ञानिकों, प्रशासनिक एवं तकनीकी कर्मचारियों, शोधार्थियों तथा विद्यार्थियों ने सक्रिय भागीदारी की।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए संस्थान के निदेशक डॉ. एम. एस. प्रसाद ने कहा कि आधुनिक जीवनशैली से जुड़ी स्वास्थ्य चुनौतियों के बीच आयुर्वेद की प्राचीन ज्ञान परंपरा आज भी प्रासंगिक है। उन्होंने शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने के लिए दैनिक जीवन में आयुर्वेदिक सिद्धांतों और स्वस्थ आदतों को अपनाने पर बल दिया।
आयुर्वेद के मूल सिद्धांतों और लाभों पर जागरूकता व्याख्यान
इस अवसर पर कान्हा वेलनेस सेंटर, कान्हा शांतिवनम (हार्टफुलनेस) की आयुर्वेद चिकित्सक डॉ. ग्रेश्मा ने “स्वस्थ कल के लिए आयुर्वेद” विषय पर विशेष व्याख्यान दिया। उन्होंने आयुर्वेद के मूल सिद्धांतों, रोगों की रोकथाम में इसकी भूमिका तथा दैनिक जीवन में आयुर्वेदिक पद्धतियों को शामिल करने के व्यावहारिक तरीकों की जानकारी दी।
डॉ. ग्रेश्मा ने बताया कि आयुर्वेद केवल उपचार पद्धति नहीं, बल्कि संतुलित जीवन जीने की एक समग्र प्रणाली है, जो आहार, दिनचर्या, मानसिक संतुलन और प्रकृति के साथ सामंजस्य पर आधारित है। उन्होंने प्रतिभागियों को तनाव प्रबंधन और बेहतर स्वास्थ्य के लिए हार्टफुलनेस आधारित विश्राम एवं वेलनेस तकनीकों का भी अभ्यास कराया।
समेकित स्वास्थ्य सेवा और शोध पर जोर
कार्यक्रम के दौरान आयुष मंत्रालय द्वारा चिन्हित आयुर्वेद के तीन प्रमुख आयामों पर भी चर्चा की गई। इनमें बेहतर स्वास्थ्य परिणामों के लिए समेकित स्वास्थ्य सेवा (Integrative Healthcare), आयुर्वेद में शोध, साक्ष्य एवं नवाचार, तथा सामुदायिक कल्याण और सतत जीवनशैली के लिए आयुर्वेद शामिल हैं।
विशेषज्ञों ने कहा कि वैज्ञानिक अनुसंधान और पारंपरिक ज्ञान का समन्वय भविष्य की स्वास्थ्य प्रणाली को अधिक प्रभावी और टिकाऊ बना सकता है। आयुर्वेद आधारित निवारक स्वास्थ्य देखभाल न केवल रोगों के जोखिम को कम करती है, बल्कि जीवन की गुणवत्ता में भी सुधार लाती है।
हार्टफुलनेस मेडिटेशन के महत्व पर प्रकाश
कार्यक्रम में भारद्वाज चंद्रशेखर, महाप्रबंधक (ऑपरेशंस) ने प्राणाहुति-सहायित हार्टफुलनेस मेडिटेशन के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि ध्यान, मानसिक शांति और भावनात्मक संतुलन को बढ़ावा देता है तथा समग्र स्वास्थ्य के लिए एक प्रभावी साधन है।
पारंपरिक ज्ञान और वैज्ञानिक समझ का समन्वय जरूरी
कार्यक्रम ने प्रतिभागियों को यह समझने का अवसर दिया कि आयुर्वेदिक सिद्धांत आज के दौर में भी स्वस्थ जीवन, रोगों की रोकथाम और सतत कल्याण के लिए कितने उपयोगी हैं। वक्ताओं ने पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक वैज्ञानिक समझ के समन्वय को भविष्य की स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण बताया।
कार्यक्रम का समन्वयन डॉ. अम्तुल वारिस (नोडल अधिकारी) और डॉ. सुनीता कोटा (सह-नोडल अधिकारी) ने किया। अंत में डॉ. अरुण ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत करते हुए अतिथियों, निदेशक, आयोजकों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया।

























