September 23, 2026 4:25 PM

Krishi Times

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बाजरा किसानों के लिए उम्मीद जगाने वाला शोध!

बाजरा अनुसंधान में बड़ी उपलब्धि: आईसीआरआईसैट की शोधार्थी डॉ. मोहम्मद रेशमी जहां को मिला स्वर्ण पदक

फोलियर ब्लास्ट रोग प्रतिरोधी बाजरा किस्मों के विकास में शोध का महत्वपूर्ण योगदान, एएनजीआरएयू ने सर्वश्रेष्ठ पीएचडी शोध प्रबंध के लिए किया सम्मानित

हैदराबाद/नई दिल्ली। कृषि अनुसंधान के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के तहत अंतरराष्ट्रीय फसल अनुसंधान संस्थान (ICRISAT) की पीएचडी शोधार्थी डॉ. मोहम्मद रेशमी जहां को प्रतिष्ठित “श्री मंडावा वेंकटरामैया गोल्ड मेडल” से सम्मानित किया गया है। यह सम्मान उन्हें आचार्य एन.जी. रंगा कृषि विश्वविद्यालय (ANGRAU) द्वारा सर्वश्रेष्ठ पीएचडी शोध प्रबंध के लिए प्रदान किया गया।

गौरतलब है कि यह पुरस्कार विश्वविद्यालय के 58वें वार्षिक दीक्षांत समारोह में 25 जुलाई 2026 को प्रदान किया गया। डॉ. रेशमी जहां को उनके शोध विषय “पर्ल मिलेट (बाजरा) में फोलियर ब्लास्ट प्रतिरोध के लिए QTL मैपिंग एवं संभावित जीनों की पहचान” पर उत्कृष्ट कार्य के लिए यह सम्मान मिला।

बाजरा उत्पादन के लिए अहम साबित होगा शोध

बाजरा देश की प्रमुख मोटे अनाज (श्री अन्न) फसलों में शामिल है, लेकिन फोलियर ब्लास्ट रोग इसकी उत्पादकता को गंभीर रूप से प्रभावित करता है। डॉ. रेशमी जहां के शोध में उन जीनोमिक क्षेत्रों (Genomic Regions) और संभावित जीनों की पहचान की गई है, जो इस रोग के प्रति प्रतिरोध विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस शोध से भविष्य में ऐसी ब्लास्ट-प्रतिरोधी बाजरा किस्मों के विकास को गति मिलेगी, जो किसानों को बेहतर उत्पादन और अधिक स्थिर आय दिलाने में मदद कर सकती हैं।

आईसीआरआईसैट के वैज्ञानिक के मार्गदर्शन में हुआ शोध

डॉ. रेशमी जहां ने यह शोध आईसीआरआईसैट के प्रधान वैज्ञानिक एवं ग्लोबल चना प्रजनन कार्यक्रम प्रमुख डॉ. राकेश के. श्रीवास्तव के मार्गदर्शन में पूरा किया। शोध के दौरान विकसित आनुवंशिक संसाधन और वैज्ञानिक निष्कर्ष बाजरा सुधार कार्यक्रमों के लिए उपयोगी साबित होंगे।

दीक्षांत समारोह में किया गया सम्मानित

समारोह में आईसीएआर-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (आईएआरआई), नई दिल्ली के निदेशक डॉ. सी.एच. श्रीनिवास राव ने डॉ. रेशमी जहां को स्वर्ण पदक और प्रशस्ति पत्र प्रदान किया। इस अवसर पर एएनजीआरएयू के कुलपति डॉ. पी.वी. सत्यनारायण भी उपस्थित रहे।

पोषण सुरक्षा और जलवायु अनुकूल कृषि को मिलेगा बल

कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार, जलवायु परिवर्तन और बढ़ते रोग प्रकोप के दौर में रोग-प्रतिरोधी बाजरा किस्मों का विकास खाद्य एवं पोषण सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। भारत सरकार भी “श्री अन्न” को बढ़ावा दे रही है, ऐसे में यह शोध बाजरा उत्पादन बढ़ाने और किसानों की आय में सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

आईसीआरआईसैट ने डॉ. मोहम्मद रेशमी जहां और उनके मार्गदर्शक डॉ. राकेश के. श्रीवास्तव को इस उपलब्धि पर बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल शोध भविष्य की कामना की है।

Source: ICRISAT