मछुआरों की आय बढ़ाने, टूना जैसी उच्च मूल्य वाली प्रजातियों के दोहन और निर्यात क्षमता विस्तार पर होगा मंथन!
नई दिल्ली/गांधीनगर, 16 सितंबर। भारत सरकार का मत्स्य विभाग 17 सितंबर 2026 को गुजरात के गांधीनगर में गहरे समुद्र में मत्स्य पालन (डीप-सी फिशिंग) को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक राष्ट्रीय कार्यशाला आयोजित करने जा रहा है। इस कार्यशाला का मुख्य लक्ष्य मछुआरों को तटीय क्षेत्रों से आगे बढ़कर अधिक मूल्य वाली समुद्री मछली प्रजातियों के दोहन के लिए प्रोत्साहित करना, क्षेत्र की चुनौतियों को समझना और नीति निर्माण के लिए हितधारकों के सुझाव प्राप्त करना है।
मत्स्य क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना है कि भारत के विशाल समुद्री क्षेत्र में अभी भी बड़ी मात्रा में ऐसे संसाधन उपलब्ध हैं, जिनका पूर्ण उपयोग नहीं हो पा रहा है। विशेष रूप से टूना और टूना जैसी उच्च मूल्य वाली प्रजातियों के दोहन से मछुआरों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि और समुद्री उत्पादों के निर्यात को नई गति मिल सकती है।
केंद्रीय और राज्य स्तर के शीर्ष नेतृत्व की मौजूदगी
कार्यशाला में केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी तथा पंचायती राज मंत्री राजीव रंजन सिंह, गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्रभाई पटेल तथा केंद्रीय राज्य मंत्री प्रो. एस.पी. सिंह बघेल शामिल होंगे। इसके अलावा केंद्र और तटीय राज्यों के अधिकारी, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर), सिफनेट, नाबार्ड, एनसीडीसी, एमपीईडीए, निर्यात निरीक्षण परिषद (ईआईसी), मत्स्य उद्योग प्रतिनिधि, महिला मछुआरे और मत्स्य सहकारी समितियों के सदस्य भी भाग लेंगे।
मूल्य श्रृंखला के हर पहलू पर होगी चर्चा

राष्ट्रीय कार्यशाला के दौरान कई तकनीकी सत्र आयोजित किए जाएंगे, जिनमें गहरे समुद्र में मछली पकड़ने की पूरी मूल्य श्रृंखला पर चर्चा होगी। प्रमुख विषयों में शामिल हैं.
- समुद्री मत्स्य संसाधनों की उपलब्धता और क्षमता
- आधुनिक मछली पकड़ने वाले पोतों का विकास
- मछुआरों का कौशल उन्नयन
- संस्थागत वित्त और निवेश मॉडल
- प्रसंस्करण एवं मूल्यवर्धन
- निर्यात बाजारों तक पहुंच
- ट्रेसबिलिटी और गुणवत्ता मानक
- अंतरराष्ट्रीय सर्वोत्तम प्रथाओं का उपयोग
विशेषज्ञों का कहना है कि केवल मछली पकड़ना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि प्रसंस्करण, कोल्ड चेन, पैकेजिंग और निर्यात मानकों को अपनाकर मछुआरे अपनी आय कई गुना बढ़ा सकते हैं।
मत्स्य सहकारी समितियों और एफएफपीओ को मिलेगा बल
मत्स्य विभाग ने हाल के वर्षों में मत्स्य किसान उत्पादक संगठनों (FFPOs) और मत्स्य सहकारी समितियों को मजबूत बनाने पर विशेष जोर दिया है। इसके साथ ही डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से मत्स्य क्षेत्र में पारदर्शिता और सुगमता बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि संगठित समूहों के माध्यम से मछुआरे बेहतर वित्त, आधुनिक तकनीक और बड़े बाजारों तक आसानी से पहुंच सकते हैं।
भारत के पास है विशाल समुद्री संपदा
भारत के पास लगभग 11,099 किलोमीटर लंबी तटरेखा और करीब 24 लाख वर्ग किलोमीटर का विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र (EEZ) है। अनुमान है कि भारतीय समुद्री क्षेत्रों में 58.6 लाख मीट्रिक टन मत्स्य उत्पादन की क्षमता मौजूद है।
यह क्षेत्र लगभग 50 लाख मछुआरों और मत्स्यकर्मियों की आजीविका से जुड़ा हुआ है। वित्त वर्ष 2025-26 में भारत ने करीब 73,890 करोड़ रुपये मूल्य के समुद्री उत्पादों का निर्यात किया, जिससे यह देश के कृषि एवं खाद्य निर्यात का एक महत्वपूर्ण क्षेत्र बन गया है।
तट से दूर छिपे हैं बड़े अवसर
वर्तमान में अधिकांश मछली पकड़ने की गतिविधियां तट से 40-50 समुद्री मील के भीतर सीमित हैं। जबकि गहरे समुद्री क्षेत्रों में उच्च मूल्य वाली प्रजातियों का बड़ा भंडार उपलब्ध है। यही कारण है कि केंद्र सरकार अब मछुआरों को गहरे समुद्र की ओर आकर्षित करने के लिए नीति, वित्त और तकनीकी सहायता उपलब्ध करा रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि आधुनिक पोत, प्रशिक्षण और बाजार सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं तो भारत वैश्विक टूना व्यापार में अपनी हिस्सेदारी तेजी से बढ़ा सकता है।
क्या है एक्सेस पास व्यवस्था?
भारत सरकार ने वर्ष 2025 में ईईजेड में मत्स्य संसाधनों के सतत दोहन के लिए नए नियम लागू किए हैं। इसके तहत 12 से 200 समुद्री मील के बीच स्थित भारतीय विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र में मछली पकड़ने के लिए एक्सेस पास की व्यवस्था की गई है।
यह डिजिटल पास ReALCRaft पोर्टल के माध्यम से निःशुल्क जारी किया जाता है। इसका उद्देश्य पारंपरिक मछुआरों, मत्स्य सहकारी समितियों और एफएफपीओ को गहरे समुद्र में मत्स्य पालन के अवसर उपलब्ध कराना है।
नियमों के अनुसार 24 मीटर से अधिक लंबाई वाले मशीनीकृत और बड़े मोटर चालित जहाजों के लिए एक्सेस पास अनिवार्य है, जबकि छोटे और पारंपरिक मछुआरों को इससे छूट दी गई है।
अब तक देश के विभिन्न तटीय राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मछुआरों को 9,650 एक्सेस पास जारी किए जा चुके हैं।
किसानों और मछुआरों की आय बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम
विशेषज्ञों के अनुसार यह कार्यशाला केवल एक संवाद मंच नहीं, बल्कि भारत के समुद्री मत्स्य क्षेत्र के भविष्य की रूपरेखा तय करने का अवसर है। इससे गहरे समुद्र में मत्स्य पालन, आधुनिक तकनीक, संस्थागत वित्त और निर्यातोन्मुख मूल्य श्रृंखला को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही मछुआरों की आय बढ़ाने, रोजगार सृजन और समुद्री उत्पादों के निर्यात विस्तार में भी महत्वपूर्ण योगदान मिलने की उम्मीद है।

























