September 1, 2026 11:54 AM

Krishi Times

Archive story

लक्षद्वीप से ब्लू इकोनॉमी मिशन की बड़ी शुरुआत!

लक्षद्वीप की समुद्री अर्थव्यवस्था को नई उड़ान: ‘मिशन रंगीन मछली 2031’ लॉन्च, टुना और समुद्री शैवाल पर सरकार का बड़ा दांव!

अगाटी में आयोजित मत्स्य पालन लोकसंपर्क कार्यक्रम में उपराष्ट्रपति ने जारी की रणनीतिक कार्ययोजना

अगाटी (लक्षद्वीप), 31 अगस्त। भारत सरकार ने लक्षद्वीप को देश की उभरती हुई ब्लू इकोनॉमी (समुद्री अर्थव्यवस्था) का प्रमुख केंद्र बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय के मत्स्य विभाग द्वारा अगाटी द्वीप में आयोजित मत्स्य पालन लोकसंपर्क कार्यक्रम में उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने ‘मिशन रंगीन मछली 2031’ (Mission Rangeen Machhli 2031) की रणनीतिक कार्ययोजना का विमोचन किया। यह पहल देश में आलंकारिक (ऑर्नामेंटल) मत्स्य पालन क्षेत्र को वैज्ञानिक, संगठित और निर्यातोन्मुख बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

कार्यक्रम में केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी तथा पंचायती राज मंत्री राजीव रंजन सिंह, राज्य मंत्री प्रो. एस.पी. सिंह बघेल, लक्षद्वीप के प्रशासक प्रफुल खोड़ा पटेल, मत्स्य विभाग के सचिव डॉ. अभिलक्ष लिखी, बड़ी संख्या में मछुआरे, महिला मत्स्यपालक, मत्स्य सहकारी समितियों के प्रतिनिधि और विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।

लक्षद्वीप में छिपी है समुद्री समृद्धि की अपार संभावनाएं

उपराष्ट्रपति ने कहा कि लक्षद्वीप केवल एक पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि देश की समुद्री अर्थव्यवस्था की अमूल्य धरोहर है। लगभग 4,200 वर्ग किलोमीटर के लैगून क्षेत्र और करीब 4 लाख वर्ग किलोमीटर के विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र (EEZ) से घिरा यह द्वीप समूह समुद्री संसाधनों का विशाल भंडार है। उन्होंने कहा कि यहां एक लाख टन से अधिक वार्षिक मत्स्य उत्पादन क्षमता मौजूद है, जिसमें लगभग 94 हजार टन उच्च मूल्य वाली टुना प्रजातियों की संभावना शामिल है।

उन्होंने जोर देकर कहा कि समुद्री संसाधनों का दोहन केवल उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि संरक्षण और सतत प्रबंधन के साथ किया जाना चाहिए। डिजिटल अनुमति प्रणाली, पोत निगरानी, अंतरराष्ट्रीय प्रमाणन और वैज्ञानिक मत्स्य प्रबंधन से भारतीय समुद्री उत्पादों की वैश्विक स्वीकार्यता बढ़ेगी और मछुआरों की आय में सुधार होगा।

पीएमएमएसवाई के तहत 62 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं को बढ़ावा

कार्यक्रम के दौरान उपराष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) के अंतर्गत लाभार्थियों को विभिन्न योजनाओं का लाभ वितरित किया। इनमें गहरे समुद्र में मछली पकड़ने वाली नौकाओं की खरीद, सुरक्षा किट, संचार एवं ट्रैकिंग उपकरण, किसान क्रेडिट कार्ड, पुरानी नौकाओं एवं जालों के प्रतिस्थापन तथा मनोरंजक मत्स्य पालन इकाइयों को सहायता शामिल रही।

उन्होंने बताया कि लक्षद्वीप में पीएमएमएसवाई के अंतर्गत 62 करोड़ रुपये से अधिक की मत्स्य विकास परियोजनाओं को मंजूरी दी जा चुकी है, जिससे आधुनिक अवसंरचना, रोजगार और आय सृजन के नए अवसर पैदा होंगे।

मछली उत्पादन और निर्यात में भारत की बड़ी छलांग

केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में मत्स्य क्षेत्र में शुरू की गई योजनाओं ने देश के मत्स्य उत्पादन को नई ऊंचाई दी है। उन्होंने बताया कि भारत का कुल मछली उत्पादन 2013-14 के 95.7 लाख टन से बढ़कर 2024-25 में 197.75 लाख टन तक पहुंच गया है।

उन्होंने कहा कि समुद्री खाद्य निर्यात भी लगातार बढ़ रहा है और वित्त वर्ष 2025-26 में भारत ने 73,890 करोड़ रुपये मूल्य के समुद्री खाद्य उत्पादों का निर्यात कर नया रिकॉर्ड बनाया है। यह उपलब्धि भारत को वैश्विक समुद्री खाद्य व्यापार में और मजबूत स्थिति प्रदान करती है।

टुना मत्स्य पालन बनेगा लक्षद्वीप की अर्थव्यवस्था का आधार

राजीव रंजन सिंह ने कहा कि लक्षद्वीप के समुद्री क्षेत्रों में येलोफिन टुना और स्किपजैक टुना जैसी उच्च मूल्य वाली प्रजातियों की भरपूर उपलब्धता है। वर्तमान में इन संसाधनों का सीमित उपयोग हो रहा है, जबकि इनमें बड़े पैमाने पर मूल्यवर्धन, प्रसंस्करण और निर्यात की संभावनाएं मौजूद हैं।

उन्होंने कहा कि सरकार मत्स्य सहकारी समितियों, मत्स्य किसान उत्पादक संगठनों (FFPOs), महिला स्वयं सहायता समूहों और निजी उद्यमियों को प्रोत्साहित कर स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन को बढ़ावा दे रही है।

‘लक्षद्वीप सस्टेनेबल टुना’ बनेगा वैश्विक ब्रांड

राज्य मंत्री प्रो. एस.पी. सिंह बघेल ने कहा कि सरकार लक्षद्वीप को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर “लक्षद्वीप सस्टेनेबल टुना” ब्रांड के रूप में स्थापित करने की दिशा में काम कर रही है। इसके लिए वैश्विक मानकों के अनुरूप सतत मत्स्य पालन प्रमाणन (Sustainability Certification) प्राप्त करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।

उन्होंने कहा कि क्षेत्रफल में छोटा होने के बावजूद लक्षद्वीप भारत के कुल विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र का लगभग 17 प्रतिशत हिस्सा रखता है। इसलिए यह क्षेत्र देश की ब्लू इकोनॉमी रणनीति में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

समुद्री शैवाल खेती से महिलाओं और युवाओं को मिलेगा रोजगार

कार्यक्रम में बताया गया कि लक्षद्वीप को आधिकारिक रूप से समुद्री शैवाल क्लस्टर घोषित किया गया है। आईसीएआर-सीएमएफआरआई के सहयोग से यहां समुद्री शैवाल बैंक स्थापित किया जा रहा है।

करीब 2 करोड़ रुपये के निवेश से 575 समुद्री शैवाल संवर्धन इकाइयों को बढ़ावा दिया जा रहा है। इससे महिला स्वयं सहायता समूहों, युवाओं और स्थानीय उद्यमियों के लिए रोजगार एवं स्वरोजगार के नए अवसर खुलेंगे। समुद्री शैवाल से खाद्य, औषधीय, कॉस्मेटिक और जैविक उत्पादों के निर्माण की बड़ी संभावनाएं भी जुड़ी हुई हैं।

रंगीन मछलियों का कारोबार बढ़ाएगा आय के नए स्रोत

‘मिशन रंगीन मछली 2031’ का प्रमुख उद्देश्य देश में ऑर्नामेंटल फिशरी सेक्टर को व्यवस्थित करना है। इस मिशन के तहत प्रजनन, हैचरी प्रबंधन, जैव सुरक्षा, गुणवत्ता नियंत्रण, ट्रेसबिलिटी, परिवहन और विपणन के लिए मानक संचालन प्रक्रियाएं (SOPs) लागू की जाएंगी। इससे भारत का ऑर्नामेंटल फिशरी क्षेत्र वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धी बन सकेगा।

विशेषज्ञों के अनुसार, लक्षद्वीप में 300 से अधिक रंगीन मछली प्रजातियां पाई जाती हैं। अगाटी में स्थापित ऑर्नामेंटल फिश हैचरी और पीएमएमएसवाई के तहत स्वीकृत पालन इकाइयां इस क्षेत्र को नई दिशा देंगी।

गहरे समुद्र में मत्स्य पालन के लिए 16 नई नौकाएं

प्रशासक प्रफुल खोड़ा पटेल ने बताया कि लक्षद्वीप में टुना की अनुमानित वार्षिक क्षमता लगभग एक लाख मीट्रिक टन है, जबकि वर्तमान उत्पादन करीब 15 हजार मीट्रिक टन के आसपास है। इस अंतर को कम करने के लिए लगभग 1.2 करोड़ रुपये लागत वाली 16 गहरे समुद्र में मछली पकड़ने वाली नौकाओं को मंजूरी दी गई है और उनका निर्माण कार्य जारी है।

उन्होंने कहा कि आने वाली लक्षद्वीप मत्स्य पालन नीति, आधुनिक प्रसंस्करण इकाइयों, मूल्यवर्धन सुविधाओं और बेहतर बाजार संपर्क के माध्यम से स्थानीय मछुआरों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि करेगी।

ब्लू इकोनॉमी में भारत की नई रणनीति

मत्स्य विभाग के सचिव डॉ. अभिलक्ष लिखी ने कहा कि लक्षद्वीप और अंडमान-निकोबार द्वीप समूह मिलकर भारत के लगभग 50 प्रतिशत विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं। ऐसे में इन द्वीपों का विकास केवल स्थानीय अर्थव्यवस्था ही नहीं बल्कि राष्ट्रीय समुद्री रणनीति के लिए भी महत्वपूर्ण है।

उन्होंने बताया कि सरकार ने भारतीय ईईजेड और खुले समुद्र में मत्स्य संसाधनों के सतत दोहन के लिए नया नियामक ढांचा तैयार किया है। इससे भारतीय मछुआरों को गहरे समुद्री क्षेत्रों में कानूनी, सुरक्षित और वैज्ञानिक तरीके से मत्स्य पालन के अवसर मिलेंगे।

पृष्ठभूमि: क्यों अहम है लक्षद्वीप?

भारत के पास लगभग 11,099 किलोमीटर लंबी तटरेखा, करीब 24 लाख वर्ग किलोमीटर का विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र और 58.6 लाख मीट्रिक टन समुद्री मत्स्य क्षमता उपलब्ध है। यह क्षेत्र लगभग 50 लाख मछुआरों की आजीविका का आधार है और खाद्य सुरक्षा, पोषण, रोजगार तथा निर्यात आय में महत्वपूर्ण योगदान देता है। वित्त वर्ष 2025-26 में समुद्री खाद्य निर्यात 73,890 करोड़ रुपये तक पहुंचना इस क्षेत्र की बढ़ती ताकत को दर्शाता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि टुना मत्स्य पालन, समुद्री शैवाल खेती, ऑर्नामेंटल फिशरी, समुद्री पर्यटन और मूल्यवर्धन आधारित उद्योगों को एकीकृत रूप से विकसित किया जाता है, तो लक्षद्वीप आने वाले वर्षों में भारत की ब्लू इकोनॉमी का सबसे महत्वपूर्ण केंद्र बन सकता है और हजारों परिवारों की आय में बड़ा बदलाव ला सकता है।