जलवायु संकट से निपटने की बड़ी पहल: राजस्थान में 33 करोड़ की चंदन वन परियोजना!

वन महोत्सव 2026: राजस्थान में 50 करोड़ पौधारोपण लक्ष्य, CM ने किया चंदन वन का शुभारंभ!

उदयपुर/जयपुर, 1 अगस्त। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि जलवायु परिवर्तन आज पूरी दुनिया के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है। बढ़ता तापमान, समुद्री जलस्तर में वृद्धि, प्रदूषित वायु, दूषित जल स्रोत और तेजी से घटती जैव विविधता मानवता के भविष्य के लिए गंभीर खतरा बन रहे हैं। ऐसे समय में वृक्षारोपण और वन संरक्षण को जन आंदोलन का स्वरूप देना बेहद जरूरी है।

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मुख्यमंत्री उदयपुर के दूधतलाई वन परिक्षेत्र में आयोजित राज्य स्तरीय वन महोत्सव के शुभारंभ समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि वन केवल पर्यावरण संतुलन के लिए ही नहीं, बल्कि जल संरक्षण, आजीविका, जैव विविधता और मानव जीवन की सुरक्षा के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित भविष्य देने के लिए हर नागरिक को पर्यावरण संरक्षण में सक्रिय भागीदारी निभानी होगी।

33 करोड़ रुपये की चंदन वन परियोजना का शुभारंभ

मुख्यमंत्री ने दूधतलाई वन क्षेत्र में चंदन का पौधा लगाकर 33 करोड़ रुपये की लागत वाली चंदन वन परियोजना का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि यह परियोजना पर्यावरण संरक्षण के साथ ग्रामीण रोजगार, जैव विविधता संरक्षण और हरित अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देगी।

परियोजना के प्रथम चरण में उदयपुर, सिरोही, बांसवाड़ा और प्रतापगढ़ जिलों में चार चंदन वन विकसित किए जाएंगे। राज्य सरकार का मानना है कि यह पहल भविष्य में देश के अन्य राज्यों के लिए भी एक मॉडल बन सकती है।

मिशन हरियालो राजस्थान’ के तहत 50 करोड़ पौधों का लक्ष्य

मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान से प्रेरित होकर राज्य सरकार ने ‘मिशन हरियालो राजस्थान’ शुरू किया है। इसके तहत अगले पांच वर्षों में 50 करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य रखा गया है।

उन्होंने बताया कि लगभग दो वर्षों में ही करीब 20 करोड़ पौधे लगाए जा चुके हैं, जबकि वर्तमान मानसून सत्र में 10 करोड़ पौधारोपण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

जियो-टैगिंग से होगी पौधों की निगरानी

मुख्यमंत्री ने कहा कि केवल पौधारोपण ही नहीं, बल्कि पौधों के वृक्ष बनने तक उनकी सुरक्षा भी सुनिश्चित की जा रही है। इसके लिए पौधों की जियो-टैगिंग की जा रही है तथा वन मित्र और वृक्ष मित्र के माध्यम से उनकी नियमित निगरानी और देखभाल की व्यवस्था बनाई गई है।

उन्होंने बताया कि प्रत्येक जिला मुख्यालय पर नमो नर्सरी तथा पंचायत समिति स्तर पर नमो वन विकसित किए जा रहे हैं, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में हरित क्षेत्र का विस्तार हो रहा है।

पर्यावरण संरक्षण में राजस्थान की ऐतिहासिक विरासत

मुख्यमंत्री ने कहा कि राजस्थान की धरती पर्यावरण संरक्षण की अनूठी परंपराओं के लिए विश्वभर में जानी जाती है। उन्होंने खेजड़ली बलिदान का उल्लेख करते हुए कहा कि मां अमृता देवी और 363 विश्नोई समाज के लोगों ने वृक्षों की रक्षा के लिए अपने प्राणों का बलिदान दिया था, जो विश्व इतिहास में पर्यावरण संरक्षण का अद्वितीय उदाहरण है।

ड्रोन सीडिंग और आजीविका प्रोत्साहन राशि का वितरण

वन महोत्सव के दौरान मुख्यमंत्री ने ड्रोन सीडिंग प्रक्रिया का शुभारंभ किया तथा वॉच टावर से वन क्षेत्र का निरीक्षण किया। उन्होंने चंदन, वन एवं वन उपज तथा पंच गौरव पर आधारित प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया।

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने राजस्थान वानिकी एवं जैव विविधता परियोजना के तहत 13 जिलों के 600 स्वयं सहायता समूहों को कुल 6 करोड़ रुपये की आजीविका प्रोत्साहन राशि का प्रतीकात्मक चेक भी प्रदान किया।

वृक्षारोपण को सामाजिक संस्कार बनाने की अपील

मुख्यमंत्री ने कहा कि अब समाज में सकारात्मक बदलाव दिखाई दे रहा है। लोग जन्मदिन, विवाह वर्षगांठ, स्मृति दिवस और अन्य विशेष अवसरों पर पौधारोपण को अपनी परंपरा बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि एक पौधा लगाना केवल वृक्ष लगाना नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों की सांसों, पर्यावरण और भविष्य को सुरक्षित करना है।

उन्होंने प्रदेशवासियों से मानसून सत्र में ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान से जुड़कर अधिक से अधिक पौधारोपण करने और मिशन हरियालो राजस्थान को जन आंदोलन बनाने का आह्वान किया।

पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वृक्षारोपण के साथ पौधों की संरक्षण दर बढ़ाने पर भी समान रूप से ध्यान दिया जाए, तो राजस्थान जैसे जलवायु-संवेदनशील राज्य में हरित आवरण बढ़ाने और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने में महत्वपूर्ण सफलता मिल सकती है।