खरीफ 2026 के लिए केंद्र की बड़ी तैयारी: जरूरत से 11% अधिक बीज उपलब्ध, 1 जून से चलेगा ‘खेत बचाओ अभियान’ !!
नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली के पूसा स्थित सुब्रमण्यम हॉल में आयोजित राष्ट्रीय खरीफ कृषि सम्मेलन के दौरान केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रेस वार्ता में कहा कि खरीफ 2026 सीजन को लेकर केंद्र और राज्य सरकारों ने व्यापक तैयारी पूरी कर ली है। सम्मेलन में राज्यों के कृषि मंत्रियों, वैज्ञानिकों, कृषि विश्वविद्यालयों, कृषि विज्ञान केंद्रों (केवीके), प्रगतिशील किसानों और अधिकारियों के साथ बीज, उर्वरक, फसल बीमा, कृषि ऋण, प्राकृतिक खेती और राज्यवार कृषि रोडमैप जैसे मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की गई।
खरीफ सीजन के लिए पर्याप्त बीज उपलब्ध !!
प्रेस वार्ता में बताया गया कि खरीफ 2026 के लिए देश में लगभग 173 लाख क्विंटल बीज की आवश्यकता का अनुमान है, जबकि 192 लाख क्विंटल गुणवत्तायुक्त बीज उपलब्ध कराया गया है। यानी आवश्यकता से करीब 11 प्रतिशत अधिक बीज का इंतजाम किया गया है। राज्यों को उनकी मांग के अनुसार बीज आवंटित कर दिया गया है और समय पर किसानों तक पहुंच सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया है।
मौसम की अनिश्चितता से निपटने को राष्ट्रीय बीज भंडार तैयार !!
मानसून में देरी या पुनर्बुवाई जैसी स्थितियों से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने 1.74 लाख क्विंटल का राष्ट्रीय बीज भंडार भी तैयार किया है। सरकार का कहना है कि इससे आपात स्थिति में किसानों को तुरंत बीज उपलब्ध कराया जा सकेगा और बुवाई प्रभावित नहीं होगी।
9.76 करोड़ फार्मर आईडी तैयार !!
कृषि योजनाओं को पारदर्शी और आसान बनाने के लिए फार्मर आईडी अभियान में तेजी लाई गई है। अब तक 9 करोड़ 76 लाख से अधिक फार्मर आईडी बनाई जा चुकी हैं। सरकार का दावा है कि इससे किसानों को बार-बार दस्तावेज जमा करने की आवश्यकता कम होगी और खाद, सब्सिडी तथा अन्य योजनाओं का लाभ सीधे पात्र किसानों तक पहुंच सकेगा।
कृषि ऋण में क्षेत्रीय असमानता दूर करने पर जोर !! 
कृषि मंत्री ने कहा कि देश में औसत कृषि ऋण लगभग 1.32 लाख रुपये है, लेकिन राज्यों के बीच इसमें बड़ा अंतर देखने को मिलता है। विशेष रूप से पूर्वी भारत में कृषि ऋण का प्रवाह कम है। ऐसे राज्यों में बैंकों के साथ समन्वय बढ़ाकर किसानों को पर्याप्त ऋण उपलब्ध कराने की रणनीति बनाई जा रही है।
टेनेंट किसानों को योजनाओं से जोड़ने की तैयारी !!
सम्मेलन में ऐसे किसानों के मुद्दे पर भी चर्चा हुई जो लीज या पट्टे पर जमीन लेकर खेती करते हैं। सरकार अब विभिन्न राज्यों के मॉडल का अध्ययन कर टेनेंट किसानों को भी सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने की दिशा में काम करेगी।
फसल बीमा में पारदर्शिता और समयबद्ध भुगतान पर फोकस !!
फसल बीमा योजना को और प्रभावी बनाने के लिए क्रॉप कटिंग एक्सपेरिमेंट और रिमोट सेंसिंग आधारित आकलन को अधिक सटीक बनाने पर जोर दिया गया। साथ ही राज्यों द्वारा प्रीमियम भुगतान और बीमा कंपनियों द्वारा दावों के निपटारे में देरी को गंभीर मुद्दा माना गया। सरकार ने स्पष्ट किया कि आवश्यक औपचारिकताएं पूरी होने के बाद भुगतान में देरी होने पर 12 प्रतिशत ब्याज का प्रावधान लागू किया जाएगा।
नकली कीटनाशकों और घटिया कृषि आदानों पर सख्ती !!
सरकार ने नकली और घटिया कीटनाशकों को किसानों के लिए बड़ी चुनौती बताया। राज्यों को अधिक सैंपलिंग, प्रयोगशालाओं को मजबूत करने और एनएबीएल प्रमाणित लैब्स के विस्तार के निर्देश दिए गए हैं। नकली कृषि आदानों के खिलाफ विशेष अभियान चलाने पर भी सहमति बनी है।
पीएम-आशा, एफपीओ और केवीके को मिलेगा बढ़ावा !!
प्रेस कॉन्फ्रेंस में पीएम-आशा योजना के तहत खरीद प्रक्रिया को समयबद्ध बनाने पर चर्चा हुई। इसके साथ ही कृषि विज्ञान केंद्रों को मजबूत करने, किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) को बढ़ावा देने और क्षेत्र विशेष के अनुसार बेहतर फसल किस्मों के विकास पर जोर दिया गया।
हर राज्य के लिए बनेगा अलग कृषि रोडमैप !!
सरकार अब एग्रो-क्लाइमेटिक परिस्थितियों के अनुसार प्रत्येक राज्य का अलग कृषि रोडमैप तैयार करेगी। इसमें मिट्टी की गुणवत्ता, जलवायु, पोषक तत्वों की स्थिति, फसल चयन, उर्वरक उपयोग और उपयुक्त किस्मों को शामिल किया जाएगा ताकि कृषि योजनाएं अधिक वैज्ञानिक और क्षेत्र आधारित बन सकें।
प्राकृतिक खेती और इंटीग्रेटेड फार्मिंग पर विशेष जोर !!
सम्मेलन में प्राकृतिक खेती और संतुलित उर्वरक उपयोग को लेकर भी व्यापक चर्चा हुई। सरकार के अनुसार 20 लाख किसानों ने 8 लाख हेक्टेयर क्षेत्र के लिए प्राकृतिक खेती में पंजीकरण कराया है। वहीं छोटी जोत वाले किसानों की आय बढ़ाने के लिए इंटीग्रेटेड फार्मिंग मॉडल को व्यवहारिक विकल्प बताया गया।
1 जून से 30 जून तक चलेगा ‘खेत बचाओ अभियान’ !!
किसानों को सीधे जागरूक करने के लिए केंद्र और राज्य सरकारें संयुक्त रूप से 1 जून से 30 जून तक ‘खेत बचाओ अभियान’ चलाएंगी। इस दौरान गांव-गांव जाकर किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग, सॉयल हेल्थ कार्ड, प्राकृतिक खेती, फसल प्रबंधन और सरकारी योजनाओं की जानकारी दी जाएगी। साथ ही किसान क्रेडिट कार्ड, कृषि यंत्र और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराने का भी प्रयास होगा।
कृषि को वैज्ञानिक मिशन बनाने की दिशा में पहल !!
सम्मेलन के दौरान यह संदेश उभरकर सामने आया कि अब कृषि को केवल मौसमी गतिविधि नहीं बल्कि वैज्ञानिक योजना, समयबद्ध क्रियान्वयन और किसान सशक्तिकरण के राष्ट्रीय मिशन के रूप में विकसित किया जा रहा है। बीज से बीमा, ऋण से गुणवत्ता नियंत्रण और प्राकृतिक खेती से राज्यवार कृषि रणनीति तक, खरीफ 2026 के लिए सरकार ने व्यापक तैयारी का दावा किया है।


























