सही समय पर कटाई से पाएं केले की बेहतरीन गुणवत्ता और अधिक लाभ

“किसानों के लिए जरूरी टिप्स: केले की कटाई”

प्रोफेसर (डॉ) एस.के. सिंह

समस्तीपुर, — केले की फसल से अधिकतम लाभ प्राप्त करने के लिए उसकी कटाई उचित समय पर करना बेहद जरूरी है। कृषि वैज्ञानिक प्रोफेसर (डॉ.) एस.के. सिंह का कहना है कि केले की फसल की कटाई हमेशा उचित अवस्था में की जानी चाहिए। ऐसा करने से न केवल केले का स्वाद और गुणवत्ता बनी रहती है, बल्कि बाजार में ऊंचा मूल्य भी प्राप्त होता है। समय से पहले या बहुत देर से कटाई करने से केले के स्वाद, बनावट और बाजार मूल्य पर नकारात्मक असर पड़ता है।

केले की परिपक्वता के प्रमुख लक्षण

विशेषज्ञ के अनुसार, किसानों को कटाई से पहले कुछ संकेतों पर ध्यान देना चाहिए:

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रंग परिवर्तन
हरे रंग से धीरे-धीरे पीले रंग में परिवर्तन होना परिपक्वता का संकेत है। परिपक्व फल की त्वचा पर हल्का पीला रंग उभरने लगता है। यदि बंच पर कत्थई रंग आने लगे, तो वह अत्यधिक परिपक्व होने का संकेत है, जिससे उसका बाजार मूल्य घट सकता है।
फल की दृढ़ता
उचित परिपक्व फल स्पर्श करने पर मध्यम रूप से नरम होते हैं। अत्यधिक गूदेदार या बहुत कठोर फल या तो अधिक पके होते हैं या अधपके। कटाई के समय फल इतना दृढ़ होना चाहिए कि वह परिवहन सह सके।
आकार और मोटापन
जब केला अपने पूर्ण आकार को प्राप्त कर लेता है और फल मोटा तथा भरा हुआ प्रतीत हो, तो यह परिपक्वता का सूचक है। अपरिपक्व फल में कोनों की लकीरें अधिक स्पष्ट होती हैं, जबकि परिपक्व फल गोल और भरा हुआ दिखता है।
स्वाद
पके केले में मिठास अधिक होती है, जबकि अधपके फलों में स्टार्च की प्रधानता होती है। इसलिए यदि फल काटने पर मीठा लगे, तो वह परिपक्व है।
लकीरों और धब्बों की उपस्थिति
फल की सतह पर लकीरें मद्धिम पड़ने लगती हैं और त्वचा पर हल्के भूरे धब्बे दिखाई देने लगते हैं, जो अधिक चीनी सामग्री और परिपक्वता का सूचक हैं।

सही समय पर कटाई के फायदे

  • केले का स्वाद और बनावट बेहतर रहती है।

  • बाजार में ऊंचा मूल्य मिलता है।

  • परिवहन के दौरान नुकसान कम होता है।

  • फल प्रसंस्करण (चिप्स, जैम, प्यूरी आदि) के लिए उपयुक्त बनता है।

सही समय पर कटाई से फल उपभोक्ताओं को ताजे, स्वादिष्ट और पोषणयुक्त रूप में पहुंचता है। इसके विपरीत, बहुत अधिक पका हुआ फल शीघ्र सड़ जाता है और परिवहन में नुकसान पहुंचता है।

गुणवत्ता की कसौटी: उत्तम केले की पहचान

केला चमकीले पीले रंग का होना चाहिए, त्वचा पर हरे या काले धब्बे न हों। हालांकि, हल्के भूरे धब्बे पकने की प्राकृतिक प्रक्रिया का हिस्सा होते हैं।
बनावट
केले सख्त और मलाईदार हो, न अधिक नरम और न अत्यधिक कठोर। अच्छी बनावट वाला केला मुंह में घुलने वाला होता है।
स्वाद
आदर्श केले मीठे तथा हल्का अम्लीय होता है। इसका स्वाद संतुलित होना चाहिए – न फीका और न अत्यधिक मीठा।
दिखावट
बिना खरोंच या सड़न के निशान के केले की बाजार में अधिक मांग में होती हैं। आकार में एकरूपता और आकर्षक दिखावट वांछनीय होती है।
ताजगी और संगति
पूरे बंच में फल की गुणवत्ता समान होनी चाहिए। एक अच्छे बंच के सभी केले एक जैसे पके, सुस्वादु और ताजे हों।
कटाई और गुणवत्ता का संबंध
कटाई की अवस्था केवल उपभोग के लिए ही नहीं, बल्कि केले के विविध उपयोग जैसे – चिप्स निर्माण, शीतगृह भंडारण, प्रसंस्करण इकाइयों के लिए कच्चा माल, और निर्यात जैसे उद्देश्यों के लिए भी महत्वपूर्ण है। बिहार जैसे केले उत्पादक राज्यों में यदि कटाई वैज्ञानिक विधियों से की जाए, तो इससे किसानों की आय कई गुना बढ़ाई जा सकती है।
प्रोफेसर (डॉ) एस.के. सिंह, जो देश के प्रमुख फल रोग विशेषज्ञ हैं एवं ICAR-AICRP on Fruits के अंतर्गत कार्यरत हैं, ने किसानों से अपील की है कि वे केले की कटाई के समय उपरोक्त परिपक्वता संकेतकों का विशेष ध्यान रखें। उन्होंने यह भी बताया कि कटाई के बाद फल को छाया में रखें और जल्द से जल्द विपणन या प्रसंस्करण के लिए भेजें ताकि उसकी गुणवत्ता बनी रहे।
प्रो. (डॉ.) एस.के. सिंह
विभागाध्यक्ष, पौध रोग विज्ञान एवं नेमेटोलॉजी विभाग,
पूर्व सह निदेशक अनुसंधान एवं प्रधान अन्वेषक, अखिल भारतीय फल अनुसंधान परियोजना
डॉ. राजेन्द्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा, समस्तीपुर 
📧 ईमेल: sksraupusa@gmail.com / sksingh@rpcau.ac.in
फोटो: प्रतीकात्मक(AI)