आईसीएआर–केंद्रीय बकरी अनुसंधान संस्थान और गिरिनंद एग्रो के बीच MoU !!
मखदूम।-किसानों के सशक्तिकरण एवं बकरी आधारित वैल्यू चेन को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के अधीन केंद्रीय बकरी अनुसंधान संस्थान (सीआईआरजी), मखदूम और गिरिनंद एग्रो प्राइवेट लिमिटेड, मुंबई के बीच बकरी विकास एवं वैल्यू चेन डेवलपमेंट के लिए एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। यह MoU आईसीएआर–सीआईआरजी परिसर, मखदूम में संपन्न हुआ।
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2500 बकरी पालकों की क्षमता वृद्धि पर फोकस !!
इस समझौता ज्ञापन का प्रमुख उद्देश्य बकरी पालकों का एक सशक्त और संगठित किसान नेटवर्क विकसित करना है। इसके अंतर्गत लगभग 2500 किसानों की क्षमता वृद्धि की जाएगी। प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से किसानों को बकरी उत्पादन के विभिन्न पहलुओं—प्रजनन, पोषण, स्वास्थ्य प्रबंधन तथा आधुनिक पालन तकनीकों की वैज्ञानिक जानकारी दी जाएगी।
वैल्यू चेन और मार्केटिंग को मिलेगी मजबूती !!
MoU के तहत उन्नत नस्लीय प्रजनन पशुओं की आपूर्ति श्रृंखला को सुदृढ़ करने, जीवित बकरियों एवं बकरी आधारित प्रसंस्कृत उत्पादों के विपणन हेतु संगठित मार्केटिंग व्यवस्था विकसित करने तथा कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग मॉडल के माध्यम से किसानों को सुनिश्चित बाजार उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया जाएगा। इससे किसानों की आय में स्थायी और दीर्घकालिक वृद्धि सुनिश्चित होने की उम्मीद है।
अनुसंधान और जमीनी क्रियान्वयन के बीच सेतु !!
इस सहयोग का उद्देश्य आईसीएआर की प्रमाणित एवं उन्नत तकनीकों को मैदानी स्तर पर प्रभावी रूप से लागू करना, किसानों और क्षेत्रीय उद्यमियों की क्षमता निर्माण को बढ़ावा देना तथा बकरी-आधारित आजीविका का एक सशक्त और टिकाऊ पारितंत्र (ईकोसिस्टम) विकसित करना है।
निदेशक का वक्तव्य !!
इस अवसर पर संस्थान के निदेशक डॉ. मनीष कुमार चेटली ने कहा कि यह साझेदारी अनुसंधान एवं क्षेत्रीय क्रियान्वयन के बीच की दूरी को कम करने में सहायक सिद्ध होगी और बकरी पालन आधारित आजीविका को और अधिक सुदृढ़ बनाएगी।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा बल !!
गिरिनंद एग्रो प्राइवेट लिमिटेड के गिरीश मोरे ने बताया कि यह MoU वैल्यू चेन एकीकरण, उद्यमिता विकास और बकरी आधारित उत्पादों के व्यावसायीकरण को प्रोत्साहित करेगा। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और स्थानीय किसानों को उच्च गुणवत्ता के पशु उपलब्ध हो सकेंगे, जिससे बकरी पालन की लाभप्रदता बढ़ेगी।
बकरी पालन के लिए अनुकरणीय मॉडल !!
दोनों संस्थाओं ने विश्वास व्यक्त किया कि यह सहयोग देश में बकरी पालन क्षेत्र के समग्र विकास में महत्वपूर्ण योगदान देगा और किसानों के लिए एक अनुकरणीय मॉडल के रूप में उभरेगा।