मुख्यमंत्री मंगला पशु बीमा योजना: 42 लाख पशुओं का लक्ष्य, 16.24 लाख पॉलिसी जारी !!
जयपुर, -राजस्थान सरकार की मुख्यमंत्री मंगला पशु बीमा योजना के तहत वर्ष 2024-25 एवं 2025-26 में कुल 42 लाख पशुओं का बीमा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। यह जानकारी पशुपालन मंत्री जोराराम कुमावत ने गुरुवार को विधानसभा में दी। उन्होंने बताया कि योजना के तहत अब तक 31 लाख 10 हजार 743 पशुओं के बीमा आवेदन प्राप्त हुए हैं। इनमें से 27 लाख 53 हजार 656 आवेदन सही पाए गए, जिनमें से 16 लाख 24 हजार 567 पशुओं की बीमा पॉलिसी जारी की जा चुकी है। वहीं 5 लाख 97 हजार 202 आवेदन प्रक्रियाधीन हैं, जबकि निरीक्षण में पशु अनुपस्थित मिलने, पशु बिक्री, बीमारी, दुधारू न होने तथा आयु सीमा जैसे कारणों से 5 लाख 31 हजार 887 आवेदन निरस्त किए गए।
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विधानसभा में पूरक प्रश्न पर दिया जवाब !!
मंत्री कुमावत ने प्रश्नकाल के दौरान सदस्य हरीश चौधरी द्वारा पूछे गए पूरक प्रश्न का उत्तर देते हुए बताया कि अब तक बीमित 31 हजार 448 पशुओं की मृत्यु दर्ज हुई है। इनमें से 6 हजार 984 पशुओं के दावों के विरुद्ध पशुपालकों को 13 करोड़ 69 लाख 70 हजार रुपये का क्लेम भुगतान किया जा चुका है।
बाड़मेर और बालोतरा में स्थिति !!
बाड़मेर एवं बालोतरा जिलों में कुल 1 लाख 95 हजार 534 बीमा आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें 1 लाख 83 हजार 20 आवेदन सही पाए गए। 90,333 पशुओं की पॉलिसी जारी, 65,642 आवेदन प्रक्रियाधीन,27,045 आवेदन निरस्त
इन जिलों में 2,424 पशुओं की मृत्यु दर्ज हुई, जिनमें से 369 पशुपालकों को 49.39 लाख रुपये का क्लेम भुगतान किया गया है। 1,887 दावे प्रक्रियाधीन हैं तथा 168 आवेदन निरस्त किए गए हैं। मंत्री ने बताया कि सर्वेयर और पशु चिकित्सक शिविरों के माध्यम से लगातार निगरानी कर रहे हैं और बीमा प्रक्रिया सतत जारी है।
12.51 लाख पशुपालक लाभान्वित !!
20 फरवरी 2026 तक योजना के अंतर्गत 12 लाख 51 हजार 511 पशुपालकों के आवेदन स्वीकृत कर लाभ प्रदान किया जा रहा है। वर्तमान में 4 लाख 13 हजार 216 पशुपालकों के आवेदन लंबित/प्रक्रियाधीन हैं। वित्तीय वर्ष 2025-26 में योजना का दायरा बढ़ाते हुए पशुओं की संख्या दोगुनी कर 42 लाख कर दी गई है। साथ ही ऊंटपालकों के लिए एक ऊंट से बढ़ाकर 10 ऊंट तक बीमा कवर की सुविधा प्रदान की गई है।
दुधारू पशुओं पर विशेष फोकस !! 
20 फरवरी 2026 तक गाय एवं भैंस जैसे दुधारू पशुओं के बीमा के लिए 12 लाख 21 हजार 207 पशुपालकों के आवेदन प्राप्त हुए। इनमें से 7 लाख 86 हजार 582 पशुपालकों के 10 लाख 42 हजार 401 पशुओं का बीमा किया जा चुका है। शेष पात्र आवेदनों की प्रक्रिया जारी है।
योजना का आर्थिक प्रभाव !!
मुख्यमंत्री मंगला पशु बीमा योजना ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सीधा सुरक्षा कवच प्रदान कर रही है। पशुधन ग्रामीण परिवारों की आय का प्रमुख स्रोत है। पशु मृत्यु या बीमारी की स्थिति में बीमा क्लेम से पशुपालकों को तत्काल आर्थिक सहायता मिलती है, जिससे वे कर्ज के जाल में फंसने से बच सकते हैं।
डेयरी सेक्टर को मजबूती !!
राजस्थान देश के प्रमुख दुग्ध उत्पादक राज्यों में शामिल है। दुधारू गाय एवं भैंस के बीमा पर विशेष फोकस से डेयरी उद्योग को स्थिरता मिलेगी। इससे दूध उत्पादन, दुग्ध सहकारी समितियों और ग्रामीण रोजगार को दीर्घकालिक लाभ होगा।
ऊंटपालकों के लिए ऐतिहासिक निर्णय !!
राज्य सरकार द्वारा ऊंट बीमा सीमा 1 से बढ़ाकर 10 ऊंट करना मरुस्थलीय क्षेत्रों के पशुपालकों के लिए बड़ा कदम है। यह निर्णय विशेष रूप से पश्चिमी राजस्थान की पारंपरिक पशुपालन अर्थव्यवस्था को संरक्षण देगा।
पारदर्शिता और निगरानी तंत्र !!
सर्वेयर और पशु चिकित्सकों द्वारा नियमित शिविरों में निरीक्षण से फर्जी दावों पर रोक लगेगी और पात्र पशुपालकों को समय पर क्लेम मिलेगा। डिजिटल आवेदन और सत्यापन प्रणाली से पारदर्शिता बढ़ी है।
संभावित चुनौतियाँ !!
लंबित आवेदनों का शीघ्र निस्तारण
दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता की कमी
पशुपालकों को दस्तावेजी प्रक्रिया में सहायता की आवश्यकता
जानकारों का मानना है कि, यदि बीमा कवरेज 50 लाख पशुओं तक विस्तारित किया जाए और प्रीमियम सब्सिडी संरचना को और सरल बनाया जाए, तो यह योजना राष्ट्रीय मॉडल बन सकती है।
सारांश !!
मुख्यमंत्री मंगला पशु बीमा योजना न केवल पशुपालकों को आर्थिक सुरक्षा दे रही है, बल्कि राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था, डेयरी उद्योग और पशुधन संरक्षण को भी नई मजबूती प्रदान कर रही है। यदि लंबित दावों और आवेदनों का शीघ्र समाधान किया जाता है, तो यह योजना राजस्थान में पशुपालन क्षेत्र के लिए गेम चेंजर साबित हो सकती है।
चित्र:सौजन्य पशुपालन विभाग,राजस्थान सरकार