राष्ट्रीय बौद्धिक संपदा पुरस्कार 2025: आईएआरआई पूसा तक्षय को ‘सर्वश्रेष्ठ इन्क्यूबेटर’ का सम्मान
नई दिल्ली, 9 मार्च 2026। भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के नवाचार एवं स्टार्टअप संवर्धन केंद्र ICAR–Indian Agricultural Research Institute (आईएआरआई) के पूसा कृषी–पूसा तक्षय (Pusa Krishi–Pusa Taksay) को राष्ट्रीय बौद्धिक संपदा पुरस्कार 2025 में “नर्चरिंग आईपी के लिए सर्वश्रेष्ठ इन्क्यूबेटर” श्रेणी का प्रतिष्ठित सम्मान प्रदान किया गया। यह पुरस्कार 9 मार्च को Bharat Mandapam में आयोजित समारोह में केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री Piyush Goyal द्वारा प्रदान किया गया।
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यह सम्मान कृषि अनुसंधान से उभरने वाले नवाचारों को प्रोत्साहित करने, बौद्धिक संपदा संरक्षण को बढ़ावा देने तथा कृषि आधारित स्टार्टअप को सशक्त बनाने में पूसा तक्षय की उल्लेखनीय भूमिका को मान्यता देता है।
बौद्धिक संपदा क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान की मान्यता
राष्ट्रीय बौद्धिक संपदा पुरस्कार देश में बौद्धिक संपदा सृजन, संरक्षण, प्रबंधन और व्यावसायीकरण के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाली संस्थाओं और व्यक्तियों को दिया जाता है। इसका आयोजन Office of the Controller General of Patents, Designs and Trade Marks द्वारा Department for Promotion of Industry and Internal Trade (डीपीआईआईटी) के तहत किया जाता है।
यह पुरस्कार उन संस्थानों को विशेष रूप से प्रोत्साहित करता है जो नवाचार को उद्योग और समाज के लिए उपयोगी उत्पादों और तकनीकों में बदलने का कार्य करते हैं।
नवाचार और स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र को मिल रही मजबूती
पुरस्कार प्राप्त करते हुए Dr Ch. Srinivasa Rao, निदेशक, आईसीएआर–आईएआरआई ने कहा कि यह उपलब्धि संस्थान की उस प्रतिबद्धता को दर्शाती है जिसके माध्यम से वैज्ञानिकों, नवाचारकों और उद्यमियों को कृषि क्षेत्र में नई तकनीकें विकसित करने और उन्हें किसानों तक पहुँचाने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।
उन्होंने बताया कि पूसा तक्षय कृषि अनुसंधान को व्यावहारिक तकनीकों में बदलने और उन्हें स्टार्टअप के माध्यम से किसानों तक पहुँचाने में अहम भूमिका निभा रहा है।
स्टार्टअप, शोध और उद्योग के बीच सेतु बना पूसा तक्षय
पूसा तक्षय कृषि नवाचार को बढ़ावा देने के लिए मेंटरिंग, इन्क्यूबेशन, बौद्धिक संपदा सहायता और उद्योग सहयोग जैसी सुविधाएँ प्रदान करता है। इसके माध्यम से कई एग्री-टेक स्टार्टअप उभरकर सामने आए हैं, जो खेती को अधिक लाभकारी, टिकाऊ और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं।
विशेषज्ञों कहते हैं कि इस तरह के इन्क्यूबेशन केंद्र कृषि अनुसंधान संस्थानों में विकसित तकनीकों को खेतों तक पहुँचाने और कृषि उद्योग में निवेश बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
भारतीय कृषि नवाचार को मिली नई पहचान
जानकारों के अनुसार, यह सम्मान भारत के कृषि नवाचार परिदृश्य को ग्लोबल स्तर पर पहचान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे न केवल कृषि अनुसंधान संस्थानों में विकसित तकनीकों के व्यावसायीकरण को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि किसानों और कृषि उद्यमियों को भी नई संभावनाएँ मिलेंगी।
पूसा तक्षय की यह उपलब्धि भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थानों की नवाचार क्षमता और बौद्धिक संपदा प्रबंधन की ताकत को भी दर्शाती है।