🌾 पूसा कृषि विज्ञान मेला 2026: नवाचार, जलवायु-स्मार्ट खेती और कृषि उद्यमिता का राष्ट्रीय मंच
नई दिल्ली, 27 फरवरी 2026। भा.कृ.अनु.प.-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (आईएआरआई) द्वारा 25 से 27 फरवरी 2026 तक नई दिल्ली स्थित मेला ग्राउंड में आयोजित पूसा कृषि विज्ञान मेला 2026 का भव्य समापन हुआ। तीन दिवसीय इस मेले में देशभर से आए वैज्ञानिकों, कृषि विशेषज्ञों, नीति-निर्माताओं, एफपीओ प्रतिनिधियों, स्टार्टअप उद्यमियों, प्रगतिशील किसानों, महिला कृषकों, ग्रामीण युवाओं एवं विद्यार्थियों ने सक्रिय सहभागिता दर्ज कराई।
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करीब एक लाख से अधिक आगंतुकों की उपस्थिति ने यह साबित किया कि भारतीय कृषि अब पारंपरिक ढांचे से आगे बढ़कर विज्ञान-आधारित, तकनीक-संचालित और उद्यमिता-केंद्रित मॉडल की ओर अग्रसर है।
👩🌾 महिला एवं युवा उद्यमिता: आत्मनिर्भर कृषि की नई धुरी
मेले के अंतिम दिवस “महिला एवं युवा उद्यमिता विकास” विषय पर विशेष तकनीकी सत्र आयोजित किया गया। इसमें कृषि को रोजगार सृजन और स्टार्टअप अवसरों से जोड़ने पर बल दिया गया।
विशेषज्ञों ने वर्टिकल फार्मिंग, हाइड्रोपोनिक्स, मशरूम उत्पादन, मधुमक्खी पालन, पुष्पोत्पादन, डेयरी एवं खाद्य प्रसंस्करण जैसे क्षेत्रों को कम लागत में अधिक लाभ वाले मॉडल के रूप में प्रस्तुत किया।
यह रेखांकित किया गया कि ग्रामीण युवाओं और महिला किसानों के लिए कृषि-आधारित सूक्ष्म उद्यम, एफपीओ मॉडल और डिजिटल मार्केटिंग प्लेटफॉर्म आय वृद्धि के नए द्वार खोल रहे हैं।
🚜 नवोन्मेषी किसान सम्मेलन: खेत से शोध तक का सेतु
“नवोन्मेषी किसान सम्मेलन” में संस्थान के निदेशक डॉ. सी.एच. श्रीनिवास राव की अध्यक्षता में किसानों ने अपने अनुभव साझा किए। पद्मश्री सम्मानित किसान भारत भूषण त्यागी ने प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और वैज्ञानिक पद्धतियों के संयोजन पर जोर दिया।
किसानों ने बताया कि पूसा संस्थान द्वारा विकसित उन्नत बीज किस्मों, समेकित पोषक तत्व प्रबंधन और जलवायु-सहिष्णु तकनीकों को अपनाकर उनकी उत्पादकता और आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
🏆 36 नवोन्मेषी किसानों का सम्मान
समापन समारोह में प्रख्यात कृषि वैज्ञानिक आर. एस. परोदा (अध्यक्ष, टास) सहित अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।
सम्मानित उपलब्धियां:
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25 राज्यों के 36 किसानों को “नवोन्मेषी कृषक पुरस्कार”, 1 किसान को “युवा नवोन्मेषी किसान” सम्मान
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7 किसानों को “अध्येता कृषक” पुरस्कार
यह सम्मान न केवल किसानों की नवाचारी सोच को मान्यता देता है, बल्कि अन्य किसानों के लिए प्रेरणा स्रोत भी बनता है।
🔬 मेले की प्रमुख विशेषताएं
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उन्नत फसल किस्मों का जीवंत प्रदर्शन
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जलवायु-सहिष्णु प्रौद्योगिकियों का प्रदर्शन
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बीज, पौध एवं कृषि यंत्रों की बिक्री
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एफपीओ एवं कृषि स्टार्टअप के लिए विशेष मंच
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मिट्टी एवं पानी की निःशुल्क जांच
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किसान परामर्श केंद्र
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सांस्कृतिक कार्यक्रम एवं तकनीकी सत्र
📊 भारतीय कृषि के रूपांतरण की दिशा
1️⃣ जलवायु परिवर्तन और कृषि नवाचार
आज जब जलवायु परिवर्तन खेती के लिए बड़ी चुनौती बन चुका है, ऐसे में सूखा-सहिष्णु, रोग-प्रतिरोधी और कम अवधि वाली किस्मों का विकास अत्यंत आवश्यक है। मेले में प्रदर्शित तकनीकें इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।
2️⃣ कृषि से उद्यमिता की ओर बदलाव
परंपरागत खेती से आगे बढ़कर अब किसान मूल्य संवर्धन, प्रसंस्करण और ब्रांडिंग की ओर बढ़ रहे हैं। इससे वे केवल उत्पादक नहीं, बल्कि एग्री-उद्यमी बन रहे हैं।
3️⃣ महिला सशक्तिकरण का विस्तार
महिलाओं की बढ़ती भागीदारी संकेत देती है कि कृषि में निर्णय प्रक्रिया और नेतृत्व में भी उनका योगदान मजबूत हो रहा है। स्वयं सहायता समूह और एफपीओ मॉडल इस परिवर्तन को गति दे रहे हैं।
4️⃣ अनुसंधान से खेत तक तकनीक हस्तांतरण
कृषि अनुसंधान तभी सार्थक है जब वह किसानों तक पहुंचे। पूसा मेला इसी उद्देश्य को साकार करता है—जहां वैज्ञानिक सीधे किसानों से संवाद कर समस्याओं का समाधान प्रस्तुत करते हैं।
🌱 विकसित भारत की कृषि दृष्टि
विशेषज्ञों ने इस बात पर बल दिया कि भारत की अर्थव्यवस्था में कृषि की केंद्रीय भूमिका है। यदि किसानों की आय में स्थायी वृद्धि सुनिश्चित करनी है तो विज्ञान-आधारित खेती, तकनीकी नवाचार और बाजार-उन्मुख उत्पादन को प्राथमिकता देनी होगी।
पूसा कृषि विज्ञान मेला 2026 ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि भारतीय कृषि अब आत्मनिर्भरता से आगे बढ़कर वैश्विक प्रतिस्पर्धा की दिशा में कदम बढ़ा रही है।