वायु गुणवत्ता सुधार की बड़ी उम्मीद: पराली जलना घटा !

पंजाब–हरियाणा में फसल अवशेष जलाने के मामलों में रिकॉर्ड कमी, धान कटाई सीजन  सम्पन्न

पंजाब और हरियाणा में इस वर्ष धान की कटाई का मौसम फसल अवशेष—पराली जलाने की घटनाओं में उल्लेखनीय कमी के साथ समाप्त हुआ। राज्य सरकारों की लक्षित योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन, फसल अवशेष प्रबंधन मशीनरी की व्यापक तैनाती और वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) के सख्त निगरानी ढांचे ने इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

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इसरो द्वारा विकसित मानक प्रोटोकॉल के अनुसार हर वर्ष 15 सितंबर से 30 नवंबर तक पराली जलाने की घटनाओं का आधिकारिक आकलन किया जाता है। इस अवधि के समाप्त होते ही 2025 के लिए दर्ज और मॉनिटरिंग की प्रक्रिया भी पूर्ण हो गई। पिछले कुछ वर्षों में CAQM के समन्वित प्रयासों से इन घटनाओं में लगातार कमी आई है। मौसम संबंधी परिस्थितियां भले ही दिल्ली–एनसीआर की वायु गुणवत्ता को प्रभावित करती हों, लेकिन इस सीजन पराली जलाने में आई उल्लेखनीय गिरावट ने प्रदूषण स्तर को काफी हद तक नियंत्रित रखा।

पराली जलाने के मामलों में ऐतिहासिक गिरावट

वर्ष 2025 में पराली जलाने की घटनाओं के सबसे कम आंकड़े दर्ज किए गए।
पंजाब में इस वर्ष केवल 5,114 घटनाएं सामने आईं—जो 2024 की तुलना में 53%, 2023 की तुलना में 86%, 2022 की तुलना में 90% और 2021 की तुलना में 93% कम हैं।
हरियाणा में भी इस वर्ष केवल 662 घटनाएं दर्ज हुईं—2024 की तुलना में 53%, 2023 की तुलना में 71%, 2022 की तुलना में 81%, और 2021 की तुलना में 91% की कमी।

ये आंकड़े राज्य-विशिष्ट फसल अवशेष प्रबंधन नीतियों, मशीनरी तैनाती, वैकल्पिक उपयोगों को बढ़ावा देने और सख़्त प्रवर्तन की सफलता को प्रदर्शित करते हैं।

पराली के वैकल्पिक उपयोगों से मिला बड़ा फायदा

धान की पराली के विभिन्न उपयोगों—

  • बायोमास आधारित बिजली उत्पादन,

  • औद्योगिक बॉयलरों में ईंधन के रूप में उपयोग,

  • बायो-एथेनॉल निर्माण,

  • थर्मल पावर प्लांट व ईंट-भट्ठों में उपयोग,

  • पैकेजिंग सामग्री तथा व्यावसायिक उत्पादों में इस्तेमाल—
    ने भी पराली जलाने की आवश्यकता को कम किया है।

कड़ी निगरानी और जागरूकता अभियान रहे प्रभावी

CAQM ने राज्य कृषि विभागों और जिला प्रशासन के साथ निरंतर समन्वय बनाए रखा।

  • उड़न दस्तों, पराली सुरक्षा बल और क्षेत्रीय अधिकारियों ने मौके पर निरीक्षण किया।

  • हॉटस्पॉट जिलों में विशेष टीमें तैनात रहीं।

  • किसानों के लिए ICT आधारित जागरूकता अभियान चलाए गए।

इसके साथ ही, चंडीगढ़ में स्थापित CAQM का विशेष प्रकोष्ठ पूरे वर्ष धान पराली प्रबंधन और संबंधित प्रदूषण गतिविधियों की निगरानी करता है।

आगे के वर्षों में और सुधार की उम्मीद

पंजाब, हरियाणा और दिल्ली–एनसीआर में पराली जलाने की प्रवृत्ति को पूरी तरह समाप्त करने के लिए राज्यों में सतत प्रयास जारी हैं। सख्त लक्ष्य निर्धारण और बेहतर क्रियान्वयन के साथ आने वाले वर्षों में पूरे क्षेत्र की वायु गुणवत्ता में लगातार सुधार की उम्मीद जताई गई है।