NICRA कार्यशाला 2026: ICAR ने लॉन्च किया ACASA–India एटलस

जलवायु चुनौतियों के बीच भारतीय कृषि की सफलता की कहानी

नई दिल्ली। –भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) और बोरलॉग इंस्टीट्यूट फॉर साउथ एशिया (BISA) के संयुक्त तत्वावधान में राष्ट्रीय जलवायु-सहिष्णु कृषि नवाचार (NICRA) की समीक्षा कार्यशाला तथा एटलस ऑफ क्लाइमेट अडैप्टेशन इन इंडियन एग्रीकल्चर (ACASA–India) के लॉन्च-कम-यूज़ केस कार्यशाला का उद्घाटन गुरुवार को नई दिल्ली में किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग (DARE) के सचिव एवं ICAR के महानिदेशक डॉ. एम. एल. जाट ने किया।

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NICRA के 15 वर्षों के अनुभवों पर केंद्रित रही कार्यशाला

कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य NICRA के 15 वर्षों के अनुभवों का समेकन करना, जलवायु सहनशीलता के क्षेत्र में भारत की उपलब्धियों का आकलन करना तथा विज्ञान, नीति-संरेखण और लक्षित निवेश के माध्यम से जलवायु-सहिष्णु कृषि-खाद्य प्रणालियों को मजबूत करने के लिए एक डेटा-आधारित रोडमैप तैयार करना रहा।

बसंत पंचमी पर जलवायु-सहिष्णु कृषि पर मंथन : डॉ. एम. एल. जाट

उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए डॉ. एम. एल. जाट ने कहा कि बसंत पंचमी ज्ञान, नवचेतना और नई शुरुआत का प्रतीक है और इस शुभ अवसर पर भारत की जलवायु-सहिष्णु कृषि यात्रा पर चिंतन तथा ACASA एटलस और NICRA पोर्टल जैसे राष्ट्रीय ज्ञान मंचों का शुभारंभ अत्यंत प्रासंगिक है। उन्होंने कहा कि NICRA के 15 वर्ष पूर्ण होने के साथ यह कार्यक्रम अब एक ऐसे निर्णायक मोड़ पर है, जहाँ स्पष्ट रणनीतिक दिशा और दीर्घकालिक दृष्टि की आवश्यकता है।

जलवायु चुनौतियों के बीच भारतीय कृषि की बढ़ती सहनशीलता

डॉ. जाट ने कहा कि बार-बार आने वाली जलवायु चुनौतियों, विशेषकर वर्षा-आश्रित क्षेत्रों के बावजूद, भारतीय कृषि ने उल्लेखनीय सहनशीलता और उत्पादकता वृद्धि दर्ज की है। यह जलवायु-सहिष्णु तकनीकों, सहायक नीतियों और मजबूत संस्थागत समन्वय की प्रभावशीलता को दर्शाता है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि भारत की जलवायु सहनशीलता एक समेकित प्रणाली पर आधारित है, जिसमें विज्ञान, नीतिगत समर्थन, तकनीकी नवाचार, सामाजिक सुरक्षा, मानव संसाधन विकास और प्रभावी क्रियान्वयन शामिल हैं। NICRA, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, पशुधन एवं मत्स्य मिशन जैसी पहलें मिलकर किसानों की अनुकूलन क्षमता और आजीविका को सुदृढ़ कर रही हैं।

समेकित पहलें किसानों की आजीविका को कर रहीं मजबूत

भविष्य की दिशा पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने डेटा, अनुभवों और निवेशों को एकीकृत राष्ट्रीय जलवायु कार्य मंच में समाहित करने, सम्पूर्ण-सरकार और सम्पूर्ण-समाज दृष्टिकोण अपनाने तथा एक केंद्रीकृत डेटा पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि भारत का विज्ञान-आधारित और नीति-संरेखित अनुभव वैश्विक स्तर पर एक मजबूत उदाहरण प्रस्तुत करता है, और NICRA को जलवायु-सहिष्णु कृषि के लिए संभावित वैश्विक मॉडल के रूप में देखा जा सकता है।

राष्ट्रीय जलवायु कार्य मंच और केंद्रीकृत डेटा तंत्र पर जोर

इस अवसर पर एटलस ऑफ क्लाइमेट अडैप्टेशन इन इंडियन एग्रीकल्चर (ACASA–India) का औपचारिक शुभारंभ भी किया गया। यह ICAR के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा प्रणाली (NARES) द्वारा BISA–CIMMYT के सहयोग से विकसित एक वेब-आधारित डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जो स्थान-विशिष्ट और डेटा-आधारित जलवायु अनुकूलन योजना बनाने में सहायक होगा।

कार्यक्रम में वैज्ञानिकों व वरिष्ठ अधिकारियों की सहभागिता

कार्यक्रम में ICAR के उप महानिदेशक (प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन) डॉ. ए. के. नायक, उप महानिदेशक (कृषि विस्तार) डॉ. राजबीर सिंह, NICRA विशेषज्ञ समिति के अध्यक्ष डॉ. बी. वेंकटेश्वरलु, ICAR-केंद्रीय शुष्क भूमि कृषि अनुसंधान संस्थान, हैदराबाद के निदेशक डॉ. वी. के. सिंह तथा BISA–CIMMYT के क्षेत्रीय कार्यक्रम प्रमुख डॉ. पी. के. अग्रवाल सहित कई गणमान्य वैज्ञानिक और अधिकारी उपस्थित रहे।

जलवायु कार्रवाई के लिए कार्बन क्रेडिट पर जोर

अपने संबोधन में डॉ. राजबीर सिंह ने कहा कि यह कार्यशाला बड़े पैमाने पर विज्ञान को आगे बढ़ाने और जलवायु कार्रवाई के लिए समग्र दृष्टिकोण अपनाने का महत्वपूर्ण मंच है। उन्होंने भविष्य की जलवायु कार्रवाई और निवेश के लिए मजबूत एवं विश्वसनीय कार्बन क्रेडिट पद्धतियों को प्राथमिकता देने की आवश्यकता पर जोर दिया।

ग्लोबल कृषि समुदाय के लिए महत्वपूर्ण कार्यशाला

डॉ. ए. के. नायक ने कहा कि यह कार्यशाला विज्ञान, डेटा और व्यावहारिक अनुभवों को एक साथ लाकर वैश्विक कृषि-खाद्य प्रणालियों की जलवायु सहनशीलता को सुदृढ़ करने में सहायक सिद्ध होगी। उन्होंने बताया कि यहां से निकले निष्कर्ष वैश्विक स्तर पर कृषि में जलवायु चुनौतियों से निपटने के प्रयासों को नई दिशा देंगे।

NICRA की प्रगति की विस्तृत समीक्षा

कार्यशाला के दौरान NICRA की प्रगति की भी समीक्षा की गई, जो वर्तमान में देश के 151 अत्यधिक जलवायु-संवेदनशील जिलों में 200 से अधिक स्थानों पर क्रियान्वित की जा रही है। प्रतिभागियों ने कहा कि NICRA को और सशक्त बनाना वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में अत्यंत आवश्यक है।

उद्घाटन सत्र में ICAR के विभिन्न प्रभागों के उप महानिदेशक एवं वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे।