विजयवाड़ा में पशुपालन एवं दुग्ध उत्पादन सांख्यिकी सुधार पर टीसीडी की दो दिवसीय राष्ट्रीय बैठक संपन्न !!
विजयवाड़ा। -पशुपालन एवं दुग्ध उत्पादन क्षेत्र में सटीक, पारदर्शी और तकनीक-आधारित सांख्यिकीय प्रणाली को मजबूत करने के उद्देश्य से तकनीकी दिशा-निर्देश समिति (टीसीडी) की वार्षिक बैठक 22–23 जनवरी 2026 को आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा में सफलतापूर्वक आयोजित की गई। इस दो दिवसीय बैठक में देशभर से आए विशेषज्ञों, नीति-निर्माताओं और राज्यों के प्रतिनिधियों ने पशुधन आंकड़ों में मौजूद कमियों, उनके समाधान और भविष्य की रणनीतियों पर गहन मंथन किया।
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बैठक का औपचारिक उद्घाटन !!
कार्यक्रम का उद्घाटन आंध्र प्रदेश सरकार के पशुपालन, दुग्ध उत्पादन, विकास एवं मत्स्य पालन विभाग के पदेन विशेष मुख्य सचिव बी. राजशेखर, आईएएस द्वारा किया गया। उद्घाटन सत्र में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के महानिदेशक (सांख्यिकी) एवं टीसीडी के अध्यक्ष काल सिंह तथा पशुपालन एवं दुग्ध उत्पादन विभाग (डीएएचडी) के सलाहकार जगत हजारिका की गरिमामयी उपस्थिति रही। उद्घाटन अवसर पर पशुधन क्षेत्र में विश्वसनीय आंकड़ों की आवश्यकता पर विशेष बल दिया गया।
राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक सहभागिता !!
बैठक में देश के सभी 36 राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इसके अतिरिक्त भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई), सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (मोएसपीआई), आईसीएआर-आईएएसआरआई, आईसीएआर-एनआईएपी, राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) सहित कई प्रमुख राष्ट्रीय संस्थानों के प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे। इस व्यापक सहभागिता ने बैठक को राष्ट्रीय महत्व का मंच प्रदान किया।
टीसीडी के उद्देश्य और कार्यक्षेत्र !!
तकनीकी दिशा-निर्देश समिति का मुख्य उद्देश्य पशुपालन एवं दुग्ध उत्पादन से संबंधित आंकड़ों में मौजूद प्रमुख कमियों की पहचान करना, उनके लिए सुधारात्मक उपाय सुझाना तथा केंद्रीय और राज्य स्तर पर लागू की जाने वाली सांख्यिकीय पद्धतियों पर मार्गदर्शन प्रदान करना है। इसके साथ ही समिति नमूना सर्वेक्षणों और पशुधन जनगणना के आयोजन के लिए वैज्ञानिक और व्यावहारिक दिशा-निर्देश तय करती है।
पशुधन उत्पाद अनुमानों की समीक्षा !!
इस दौरान समिति ने प्रमुख पशुधन उत्पादों से संबंधित अनुमानों की विस्तृत समीक्षा की। दूध, मांस, अंडा एवं अन्य पशु उत्पादों के उत्पादन आंकड़ों की विश्वसनीयता बढ़ाने पर चर्चा हुई। इसी क्रम में वर्ष 2025–26 के लिए नए लक्ष्य निर्धारित किए गए, ताकि भविष्य की योजनाओं और नीतिगत निर्णयों को मजबूत आधार मिल सके।
राज्यों की सर्वोत्तम प्रथाओं की प्रस्तुति !!
आंध्र प्रदेश, राजस्थान, केरल, उत्तराखंड और मिजोरम सहित पांच राज्यों ने अपने सांख्यिकीय डेटा संग्रह तंत्र में अपनाई गई सर्वोत्तम प्रथाओं की प्रस्तुतियाँ दीं। इन प्रस्तुतियों में डिजिटल सर्वेक्षण, फील्ड स्तर पर डेटा सत्यापन, और स्थानीय स्तर पर नवाचारों को साझा किया गया। विशेष रूप से आंध्र प्रदेश की पशुधन वृद्धि से जुड़ी अभिनव रणनीतियों को सराहा गया।
एकीकृत सर्वेक्षण और जनगणना पर रोडमैप !!
देशभर में एकीकृत नमूना सर्वेक्षण और पशुधन जनगणना को निरंतर और समान रूप से लागू करने के लिए एक विस्तृत रोडमैप तैयार किया गया। खुली चर्चाओं के बाद डेटा गुणवत्ता सुधार, तकनीकी एकीकरण और राज्यों के बीच समन्वय को मजबूत करने पर सहमति बनी।
डिजिटल तकनीक और नवाचार पर जोर !!
बैठक का एक प्रमुख आकर्षण आईसीएआर-आईएएसआरआई द्वारा विकसित ईएलएसआईएसएस (ELSISS) सॉफ्टवेयर का प्रदर्शन रहा, जिसके माध्यम से वास्तविक समय में डिजिटल डेटा संग्रहण संभव है। इस तकनीक को एकीकृत नमूना सर्वेक्षणों में अपनाने पर विस्तार से चर्चा की गई, जिससे समयबद्ध और त्रुटिरहित आंकड़े उपलब्ध कराए जा सकें।
राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सहयोग !!
बैठक में मोएसपीआई, आरबीआई और एफएओ जैसे राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय संगठनों के साथ सहयोग को और सुदृढ़ करने पर सहमति बनी। चर्चा के दौरान वैश्विक कृषि सांख्यिकी, खाद्य सुरक्षा और नीति निर्माण में पशुधन आंकड़ों की भूमिका पर विशेष जोर दिया गया।
वरिष्ठ अधिकारियों की सक्रिय भागीदारी !!
बैठक में डॉ. तौकीर अहमद (आईसीएआर-आईएएसआरआई), आर.पी.एस. राठौर, डॉ. टी. दामोदर नायडू, डॉ. जी. लथमंगेशकर, डॉ. सुरेश चंद्र मीना, डॉ. मेम्पल सिंह, डॉ. परमदीप सिंह वालिया, डॉ. किर्ज़ांग चुकी, डॉ. नीरज कुमार चंचल, डॉ. निखिल कुमार शिट, डॉ. पल्लवी चव्हाण सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे और अपने सुझाव साझा किए।
नीति, आजीविका और पोषण सुरक्षा पर फोकस !!
बैठक में इस बात पर सहमति बनी कि सुदृढ़ पशुधन सांख्यिकी प्रणाली न केवल नीतिगत निर्णयों को समर्थन देगी, बल्कि किसानों की आजीविका, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और पोषण सुरक्षा को भी मजबूत करेगी। इसके लिए पारदर्शी और तकनीक-सक्षम डेटा प्रणाली को आवश्यक बताया गया।
समापन सत्र और धन्यवाद प्रस्ताव !!
कार्यक्रम का समापन एक खुली चर्चा के साथ हुआ, जिसमें प्रमुख निष्कर्षों और भविष्य की कार्ययोजना का सार प्रस्तुत किया गया। अध्यक्ष टीसीडी ने सांख्यिकीय डेटा ढांचे को मजबूत करने में सहयोगात्मक प्रयासों के महत्व पर जोर दिया। अंत में पशुपालन सांख्यिकी प्रभाग (एएचएस डिवीजन), डीएएचडी द्वारा औपचारिक धन्यवाद प्रस्ताव के साथ कार्यक्रम संपन्न हुआ।
पशुपालन एवं दुग्ध उत्पादन विभाग की भूमिका !!
पशुपालन एवं दुग्ध उत्पादन विभाग देश में पशुधन उत्पादन, संरक्षण, रोग नियंत्रण और दुग्ध उत्पादन विकास की दिशा में राज्य सरकारों एवं केंद्र शासित प्रदेशों को निरंतर परामर्श प्रदान करता है। विभाग पशु उत्पादकता बढ़ाने, पशुधन स्वास्थ्य सुनिश्चित करने और केंद्रीय पशुधन फार्मों के सुदृढ़ीकरण के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचे के विकास के प्रति प्रतिबद्ध है।