बिना गारंटी 2 लाख तक कर्ज, किसानों की बल्ले-बल्ले!

किसानों के लिए आसान हुआ कर्ज: केसीसी का दायरा बढ़ा, डिजिटल सुविधा पर सरकार का जोर !!

लघु एवं सीमांत किसानों को सस्ता ऋण, बिना गारंटी सीमा बढ़ी, डिजिटल प्लेटफॉर्म से आवेदन हुआ सरल..

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नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने किसानों, विशेषकर लघु एवं सीमांत किसानों को सशक्त बनाने के उद्देश्य से किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) योजना को और प्रभावी बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। सरकार ने केसीसी की पहुंच बढ़ाने, डिजिटल निर्गमन को प्रोत्साहित करने और सस्ती दरों पर ऋण उपलब्ध कराने पर विशेष ध्यान दिया है।

लोकसभा में वित्त मंत्रालय में राज्य मंत्री श्री पंकज चौधरी ने यह जानकारी देते हुए बताया कि सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) मिलकर कृषि क्षेत्र में ऋण प्रवाह बढ़ाने और वित्तीय समावेशन को मजबूत करने के लिए लगातार काम कर रहे हैं।

कृषि ऋण में बढ़ोतरी के लिए सख्त दिशानिर्देश!!

आरबीआई द्वारा जारी प्राथमिकता क्षेत्र ऋण (PSL) दिशानिर्देशों के तहत बैंकों के लिए कृषि क्षेत्र में कम से कम 18 प्रतिशत ऋण देना अनिवार्य किया गया है। इसमें से 10 प्रतिशत हिस्सा लघु एवं सीमांत किसानों के लिए निर्धारित है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों को आसानी से कर्ज उपलब्ध हो रहा है।

पशुपालन और मत्स्य पालन को भी मिला केसीसी का लाभ!!

साल 2019 से केसीसी योजना का दायरा बढ़ाकर पशुपालन, दुग्ध उत्पादन और मत्स्य पालन जैसी गतिविधियों को भी शामिल किया गया है। इससे किसानों की आय के विविध स्रोतों को बढ़ावा मिला है।

सस्ती ब्याज दर पर ऋण की सुविधा!!

संशोधित ब्याज सब्सिडी योजना के तहत किसानों को 7 प्रतिशत की रियायती दर पर अल्पकालिक कृषि ऋण मिलता है। समय पर भुगतान करने वाले किसानों को 3 प्रतिशत अतिरिक्त छूट मिलती है, जिससे प्रभावी ब्याज दर घटकर मात्र 4 प्रतिशत रह जाती है। बिना गारंटी ऋण सीमा बढ़ाई गई आरबीआई ने 1 जनवरी 2025 से बिना गारंटी वाले कृषि ऋण की सीमा को 1.60 लाख रुपये से बढ़ाकर 2 लाख रुपये कर दिया है। इस फैसले से देश के 86 प्रतिशत से अधिक छोटे और सीमांत किसानों को सीधा लाभ मिल रहा है।

डिजिटल प्लेटफॉर्म से आसान हुआ आवेदन!!

सरकार ने ‘जन समर्थ पोर्टल’ की शुरुआत कर केसीसी समेत विभिन्न ऋण योजनाओं को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ दिया है। इसके माध्यम से किसान घर बैठे ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं और डिजिटल मूल्यांकन के आधार पर तेजी से स्वीकृति प्राप्त कर सकते हैं।

नाबार्ड द्वारा शुरू किए गए ई-केसीसी पोर्टल के जरिए क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक और सहकारी बैंक भी पूरी प्रक्रिया को डिजिटल बना रहे हैं, जिससे किसानों को बैंक शाखाओं के चक्कर नहीं लगाने पड़ते।

जागरूकता और वित्तीय साक्षरता पर जोर!!

केंद्र और राज्य सरकारें, आरबीआई और नाबार्ड मिलकर किसानों को केसीसी के लाभों की जानकारी देने के लिए वित्तीय साक्षरता शिविर और कार्यक्रम आयोजित कर रहे हैं। आरबीआई हर साल ‘वित्तीय साक्षरता सप्ताह’ भी मनाता है।

केसीसी की विशेष सुविधाएं!!

किसान क्रेडिट कार्ड योजना के तहत एटीएम-सक्षम डेबिट कार्ड, एक बार दस्तावेजीकरण, बढ़ती लागत के अनुसार क्रेडिट सीमा में वृद्धि और स्वीकृत सीमा के भीतर कई बार निकासी जैसी सुविधाएं दी जाती हैं।

शिकायत निवारण तंत्र हुआ मजबूत !!

सरकार और आरबीआई ने बैंकिंग सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए शिकायत निवारण प्रणाली को भी मजबूत किया है।

सीपीग्राम पोर्टल के जरिए ऑनलाइन शिकायत दर्ज की जा सकती है

लोकपाल योजना के तहत शिकायतों का समाधान

जिला स्तर पर सार्वजनिक बैठकें और समीक्षा

राज्य स्तर पर हेल्पलाइन और जनसुनवाई तंत्र

सारांश:

सरकार के इन प्रयासों से किसान क्रेडिट कार्ड योजना न केवल अधिक सुलभ और पारदर्शी बनी है, बल्कि किसानों को सस्ती दरों पर समय पर ऋण उपलब्ध कराने में भी अहम भूमिका निभा रही है। डिजिटल पहल और बढ़ी हुई ऋण सीमा से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

चित्र: प्रतीकात्मक