पोकरण KVK में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस कार्यक्रम, कृषक महिलाओं को आत्मनिर्भरता और कृषि उद्यमिता का संदेश
पोकरण (राजस्थान)। कृषि विज्ञान केंद्र, पोकरण द्वारा ग्राम बिलिया में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर एक जागरूकता एवं संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ग्रामीण कृषक महिलाओं ने भाग लेकर कृषि, पोषण, उद्यमिता और महिला अधिकारों से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियाँ प्राप्त कीं।
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कार्यक्रम की शुरुआत अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस 2026 की थीम “सभी महिलाओं और बालिकाओं के लिए: अधिकार, समानता और सशक्तिकरण” के संदेश के साथ की गई। इस अवसर पर कृषि क्षेत्र में महिलाओं की भूमिका, आत्मनिर्भरता तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था में उनकी बढ़ती भागीदारी पर विशेष चर्चा की गई।
महिलाओं की भागीदारी से ही होगा समग्र विकास
केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डॉ. दशरथ प्रसाद ने अपने संबोधन में कहा कि महिलाओं की सक्रिय भागीदारी के बिना समाज और राष्ट्र का समग्र विकास संभव नहीं है। आज महिलाएं शिक्षा, कृषि, विज्ञान, प्रशासन, उद्योग और उद्यमिता सहित विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल कर रही हैं।
उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाएं कृषि कार्यों के साथ-साथ खाद्य प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन, ग्रेडिंग और पैकेजिंग जैसे कार्यों में अपनी दक्षता बढ़ाकर न केवल परिवार की आय में योगदान दे सकती हैं, बल्कि स्वयं भी आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकती हैं।
डॉ. प्रसाद ने कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा महिलाओं के लिए संचालित विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रमों, तकनीकी मार्गदर्शन और कौशल विकास गतिविधियों की जानकारी देते हुए महिलाओं से केंद्र से जुड़कर इन योजनाओं का लाभ उठाने का आह्वान किया।
कृषि और उद्यमिता में महिलाओं की नेतृत्व भूमिका जरूरी
कार्यक्रम में प्रसार वैज्ञानिक डॉ. सुनील कुमार शर्मा ने कहा कि महिलाएं समाज का महत्वपूर्ण आधार हैं और आर्थिक, सामाजिक तथा राजनीतिक गतिविधियों में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका है। कृषि क्षेत्र में भी महिलाओं का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण है, चाहे वह खेतों में श्रम हो, पशुपालन हो या घरेलू खाद्य प्रसंस्करण से जुड़ा कार्य।
उन्होंने कहा कि आज समय की मांग है कि घर और खेत की जिम्मेदारियों के साथ महिलाएं उद्यमिता और नेतृत्व क्षमता भी विकसित करें, ताकि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति मिल सके। महिलाओं की बढ़ती सहभागिता से कृषि क्षेत्र में प्रगति, विकास और समृद्धि के नए अवसर खुलेंगे।
योजनाओं और अधिकारों के प्रति जागरूकता
कार्यक्रम के दौरान महिलाओं को उनके अधिकारों, स्वास्थ्य, पोषण, शिक्षा और आत्मनिर्भरता से जुड़ी विभिन्न सरकारी योजनाओं की जानकारी दी गई। साथ ही उन्हें स्वरोजगार, कौशल विकास और कृषि आधारित छोटे उद्यमों को अपनाने के लिए प्रेरित किया गया।
विशेषज्ञों ने बताया कि महिला दिवस जैसे आयोजन समाज में महिलाओं के अधिकारों और उनकी स्थिति को लेकर सकारात्मक संदेश फैलाने का एक सशक्त माध्यम हैं। ऐसे कार्यक्रम महिलाओं में जागरूकता बढ़ाने के साथ उन्हें अपने अधिकारों और अवसरों के प्रति सजग बनाते हैं।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था में महिलाओं की बढ़ती भूमिका
कार्यक्रम में उपस्थित कृषक महिलाओं ने भी अपने अनुभव साझा किए और कृषि आधारित आजीविका, स्वयं सहायता समूहों तथा छोटे उद्यमों के माध्यम से आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में आगे बढ़ने की प्रतिबद्धता व्यक्त की।
कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों ने बताया कि यदि ग्रामीण महिलाएं तकनीकी ज्ञान, प्रशिक्षण और बाजार से जुड़ाव को अपनाती हैं तो वे कृषि क्षेत्र में आय बढ़ाने के साथ-साथ गांव की अर्थव्यवस्था को भी मजबूत बना सकती हैं।
अंत में सभी प्रतिभागियों ने महिला सशक्तिकरण के संदेश को गांव-गांव तक पहुंचाने और महिलाओं को शिक्षा, कौशल और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।