खाड़ी संकट के बीच भारत में उर्वरक आपूर्ति पर सरकार सतर्क, खरीफ सीजन से पहले 177 लाख मीट्रिक टन का मजबूत भंडार!
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया के खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और ग्लोबल आपूर्ति श्रृंखला पर पड़ रहे दबाव के बीच भारत सरकार ने उर्वरक आपूर्ति को लेकर सक्रिय कदम उठाए हैं। उर्वरक विभाग ने स्पष्ट किया है कि समुद्री परिवहन और अंतरराष्ट्रीय सप्लाई में संभावित व्यवधान के बावजूद देश में खरीफ सीजन के लिए उर्वरकों का पर्याप्त भंडार मौजूद है और किसानों को किसी प्रकार की कमी का सामना नहीं करना पड़ेगा।
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सरकार ने अग्रिम भंडारण, रणनीतिक आयात और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दीर्घकालिक आपूर्ति समझौतों के जरिए उर्वरकों का मजबूत बफर स्टॉक तैयार किया है। इससे वैश्विक बाजार में अनिश्चितता के बावजूद देश में कृषि गतिविधियों पर कोई नकारात्मक असर पड़ने की संभावना कम हो गई है।
उर्वरक भंडार में उल्लेखनीय वृद्धि
उर्वरक विभाग द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, 6 मार्च 2026 तक देश में कुल उर्वरक भंडार बढ़कर 177.31 लाख मीट्रिक टन हो गया है। यह पिछले वर्ष की समान अवधि के 129.85 लाख मीट्रिक टन की तुलना में लगभग 36.5 प्रतिशत अधिक है।
विशेष रूप से मृदा पोषक तत्वों वाले उर्वरकों—डीएपी (डाय-अमोनियम फॉस्फेट) और एनपीके—के भंडार में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।
| उर्वरक | वर्तमान स्टॉक | पिछले वर्ष |
|---|---|---|
| कुल उर्वरक | 177.31 LMT | 129.85 LMT |
| यूरिया | 59.30 LMT | — |
| DAP | 25.13 LMT | — |
| NPK | 55.87 LMT | — |
| कुल वृद्धि | 36.5% | — |
LMT = लाख मीट्रिक टन
यूरिया देश में सबसे अधिक उपयोग किया जाने वाला उर्वरक है और इसकी पर्याप्त उपलब्धता को खरीफ सीजन के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।
अग्रिम भंडारण की रणनीति से मिली मजबूती
उर्वरक विभाग के अनुसार, सरकार ने कम मांग वाले समय में अग्रिम भंडारण की रणनीति अपनाई थी। इस दौरान उर्वरकों का अधिक मात्रा में भंडारण किया गया ताकि बुवाई के समय अचानक बढ़ने वाली मांग को आसानी से पूरा किया जा सके।
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि यह रणनीति भारत को ग्लोबल बाजार में संभावित आपूर्ति बाधाओं से बचाने में कारगर साबित हो रही है। इससे किसानों को समय पर उर्वरक उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी और कृषि उत्पादन प्रभावित नहीं होगा।
आयात रणनीति से सुनिश्चित की आपूर्ति
सरकार ने उर्वरकों की निरंतर उपलब्धता बनाए रखने के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार से आयात की व्यवस्था भी पहले से कर ली है।
आधिकारिक जानकारी के अनुसार, फरवरी 2026 तक भारत ने लगभग 98 लाख मीट्रिक टन उर्वरकों का आयात किया है। इसके अलावा अगले तीन महीनों के लिए 17 लाख मीट्रिक टन से अधिक उर्वरकों का आयात पाइपलाइन में है, जिससे आने वाले समय में भी आपूर्ति स्थिर बनी रहेगी।
इसके साथ ही भारतीय उर्वरक कंपनियों ने कई प्रमुख अंतरराष्ट्रीय उत्पादकों के साथ फॉस्फेट और पोटाश (P&K) उर्वरकों के लिए दीर्घकालिक आपूर्ति समझौते किए हैं। इन समझौतों का उद्देश्य वैश्विक बाजार में कीमतों और सप्लाई की अस्थिरता से बचाव करना है।
गैस आपूर्ति को दी गई प्राथमिकता
उर्वरक उत्पादन में प्राकृतिक गैस एक महत्वपूर्ण कच्चा माल है। वर्तमान समय में वैश्विक ऊर्जा बाजार में एलएनजी (LNG) की मांग बढ़ने के कारण गैस आपूर्ति पर दबाव बना हुआ है। इसके बावजूद सरकार ने स्पष्ट किया है कि उर्वरक उद्योग को गैस आपूर्ति राष्ट्रीय प्राथमिकता बनी रहेगी।
हाल ही में उर्वरक विभाग में आयोजित एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में यह निर्णय लिया गया कि किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए उर्वरक उत्पादन में किसी प्रकार की बाधा नहीं आने दी जाएगी।
संयंत्रों का रखरखाव पहले ही किया गया पूरा
उर्वरक उद्योग में इस समय को सामान्यतः ‘लीन पीरियड’ माना जाता है, जब मांग अपेक्षाकृत कम होती है और कंपनियां अपने उत्पादन संयंत्रों के रखरखाव और मरम्मत का कार्य करती हैं।
इस वर्ष कंपनियों ने वैश्विक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए अपने संयंत्रों का निर्धारित रखरखाव पहले ही पूरा कर लिया है। इससे खरीफ सीजन के दौरान उत्पादन क्षमता पर कोई असर नहीं पड़ेगा और आपूर्ति सुचारू बनी रहेगी।
रियल टाइम निगरानी से संकट प्रबंधन
उर्वरक विभाग वर्तमान स्थिति की लगातार निगरानी कर रहा है। इसके लिए पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के साथ समन्वय स्थापित कर गैस आपूर्ति, उत्पादन और आयात से संबंधित सभी पहलुओं की रियल टाइम मॉनिटरिंग की जा रही है।
साथ ही विभिन्न देशों से उर्वरक आयात के वैकल्पिक स्रोतों पर भी काम किया जा रहा है, ताकि यदि किसी क्षेत्र में आपूर्ति बाधित हो तो दूसरे स्रोतों से तुरंत आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके।
किसानों से घबराने की जरूरत नहीं
सरकार ने किसानों को आश्वस्त करते हुए कहा है कि देश में उर्वरकों की उपलब्धता पर्याप्त है और खरीफ सीजन के दौरान किसी प्रकार की कमी की संभावना नहीं है। किसानों से अपील की गई है कि वे बिना किसी चिंता के अपनी फसलों की तैयारी जारी रखें।
विशेषज्ञों का मानना है कि मजबूत भंडार, समय पर आयात और सरकारी निगरानी के कारण इस वर्ष खरीफ सीजन के दौरान उर्वरकों की उपलब्धता सामान्य बनी रहने की संभावना है। इससे देश की खाद्य सुरक्षा और कृषि उत्पादन को भी मजबूती मिलेगी।