शुष्क क्षेत्रों में बागवानी से महिलाओं को मिलेंगे नए अवसर!

आईसीएआर–सीआईएएच, बीकानेर में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर विशेष कार्यक्रम

कृषि और विज्ञान में महिलाओं की बढ़ती भूमिका पर विशेषज्ञों ने रखे विचार

बीकानेर। ICAR–Central Institute for Arid Horticulture (सीआईएएच), बीकानेर में 8 मार्च 2026 को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर “Give To Gain: Empowering Women in Agriculture and Science” थीम के तहत एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर कृषि और विज्ञान के क्षेत्र में महिलाओं की बढ़ती भूमिका, नवाचार और उद्यमिता को प्रोत्साहित करने पर जोर दिया गया।

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कार्यक्रम का शुभारंभ वंदे मातरम् और आईसीएआर गीत के साथ हुआ। कार्यक्रम की आयोजक डॉ. अनीता मीना ने सभी अतिथियों, वैज्ञानिकों, महिला कृषकों, विद्यार्थियों तथा प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए कहा कि कृषि क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी लगातार बढ़ रही है और नई तकनीकों के माध्यम से उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाया जा सकता है।

महिलाओं के योगदान से कृषि को मिल रही नई दिशा

संस्थान के निदेशक डॉ. जगदीश राणे ने वर्चुअल माध्यम से कार्यक्रम में शामिल होकर सभी प्रतिभागियों को International Women’s Day की शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने कहा कि भारतीय कृषि में महिलाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। खेतों में उत्पादन से लेकर प्रसंस्करण, विपणन और उद्यमिता तक महिलाएँ सक्रिय भागीदारी निभा रही हैं।

उन्होंने यह भी बताया कि अनुसंधान संस्थानों और कृषि विज्ञान केंद्रों द्वारा विकसित तकनीकों के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को स्वरोजगार और आय के नए अवसर मिल रहे हैं, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है।

कृषि अनुसंधान और उद्यमिता में महिलाओं की भागीदारी पर जोर

कार्यक्रम के दौरान विभिन्न विशेषज्ञों ने अपने अनुभव साझा किए।
कृषि विशेषज्ञ डॉ. (श्रीमती) ज्योत्सना शर्मा, कंसल्टेंट, Jain Irrigation Systems Limited, जलगांव तथा पूर्व प्रधान वैज्ञानिक, ICAR–National Research Centre on Pomegranate, सोलापुर ने कृषि अनुसंधान में महिलाओं की भागीदारी पर विस्तृत व्याख्यान दिया। उन्होंने कहा कि आज महिलाएँ वैज्ञानिक अनुसंधान, पौध संरक्षण और आधुनिक कृषि तकनीकों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

इसी क्रम में डॉ. (श्रीमती) कनक लता, प्रमुख, Krishi Vigyan Kendra Panchmahal, गुजरात ने अर्ध-शुष्क और शुष्क क्षेत्रों में बागवानी आधारित उद्यमिता के माध्यम से महिला सशक्तिकरण के अवसरों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि यदि महिलाओं को तकनीकी प्रशिक्षण, बाजार से जुड़ाव और वित्तीय सहयोग मिले तो वे ग्रामीण क्षेत्रों में सफल उद्यमी बन सकती हैं।

महिला कृषकों के सशक्तिकरण के लिए तकनीकी जानकारी

कार्यक्रम के दौरान डॉ. अनीता मीना ने टीएसपी क्षेत्र की महिला कृषकों के सशक्तिकरण के लिए संस्थान द्वारा विकसित तकनीकों और उनके प्रसार पर प्रस्तुति दी। उन्होंने बताया कि शुष्क क्षेत्रों में वैज्ञानिक पद्धतियों से बागवानी अपनाकर महिलाएँ अपनी आय में उल्लेखनीय वृद्धि कर सकती हैं।

संस्थान के वैज्ञानिकों ने प्रतिभागियों को कई महत्वपूर्ण विषयों पर जानकारी दी, जिनमें —

  • खजूर की फसल की कटाई उपरांत प्रबंधन तकनीक

  • पॉलीहाउस में सब्जी उत्पादन

  • नर्सरी प्रबंधन

  • अल्प-प्रयुक्त फल फसलों का पोषण महत्व

इन विषयों पर विशेषज्ञों ने बताया कि आधुनिक तकनीकों और प्रशिक्षण के माध्यम से महिलाएँ कृषि को लाभकारी व्यवसाय में बदल सकती हैं।

प्रत्यक्ष और वर्चुअल माध्यम से 48 प्रतिभागियों की भागीदारी

इस कार्यक्रम में कुल 48 प्रतिभागियों ने प्रत्यक्ष और वर्चुअल माध्यम से भाग लिया। इनमें महिला कृषक, छात्र-छात्राएँ, वैज्ञानिक और कृषि से जुड़े विभिन्न हितधारक शामिल रहे। प्रतिभागियों ने विशेषज्ञों से संवाद करते हुए तकनीकी जानकारी प्राप्त की और कृषि आधारित उद्यमिता के अवसरों पर चर्चा की।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था में महिलाओं की भूमिका को मजबूत करने की जरूरत

कार्यक्रम के समापन अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि यदि महिलाओं को कृषि प्रशिक्षण, तकनीकी मार्गदर्शन और बाजार तक बेहतर पहुंच प्रदान की जाए तो वे ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूत आधारशिला बन सकती हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, महिला किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों, प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन से जोड़ना आने वाले समय में आत्मनिर्भर ग्रामीण भारत की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।