जलवायु-स्मार्ट खेती और महिला शक्ति: भारत की विकास की कहानी!

ग्लोबल साउथ के लिए भारत का ग्रामीण मॉडल बना मिशाल दुनिया के सामने

भारत–आईएफ़एडी साझेदारी ने बदला ग्रामीण भारत का भविष्य, रोम में मनाया गया उपलब्धियों का उत्सव

Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!

रोम, (इटली) –भारत सरकार और अंतर्राष्ट्रीय कृषि विकास कोष (IFAD) ने रोम में अपनी दीर्घकालिक और प्रभावी विकास साझेदारी का जश्न मनाया। इस अवसर पर ऐसी ग्रामीण परिवर्तन की सफल मॉडल परियोजनाओं को प्रदर्शित किया गया जिन्हें ग्लोबल साउथ के देशों में बड़े पैमाने पर लागू किया जा सकता है।

आईएफ़एडी के अध्यक्ष आल्वारो लारियो ने कहा, भारत और आईएफ़एडी के संयुक्त निवेश यह दर्शाते हैं कि महिलाओं के सशक्तिकरण, खाद्य प्रणाली रूपांतरण और कृषि-पर्यावरणीय बदलावों में टिकाऊ और स्केलेबल विकास कैसा दिखता है। भारत में लागू कई संयुक्त परियोजनाएँ अब विश्वभर में आईएफ़एडी कार्यक्रमों के आदर्श मॉडल बन चुकी हैं।”
उन्होंने दक्षिण-दक्षिण और त्रिकोणीय सहयोग में भारत की निर्णायक भूमिका, विशेषकर ग्रामीण संस्थानों तथा मूल्य श्रृंखला नवाचार को मजबूत करने में भारत की नेतृत्वकारी क्षमता की सराहना की।

महिलाओं के सशक्तिकरण से कृषि व्यवसाय तक—भारत मॉडल बना ग्लोबल प्रेरणा

चित्र: प्रतीकात्मक

आईएफ़एडी के निवेशों ने भारत में छोटे किसानों को बाज़ार से जोड़ने, उनकी आय बढ़ाने और पारंपरिक कृषि को कृषि-व्यवसाय में बदलने में अहम योगदान दिया है।
आईएफ़एडी समर्थित परियोजनाओं ने 1980 के दशक में शुरू हुए महिला बचत समूहों को 21वीं सदी के मजबूत संस्थानों में परिवर्तित किया, जिनके माध्यम से महिलाएँ ऋण, प्रशिक्षण और बाज़ार तक पहुंच पाकर माइक्रो-उद्यम स्थापित कर रही हैं और अपने परिवारों की आय बढ़ा रही हैं।

“भारत–आईएफ़एडी साझेदारी मूल्यों पर आधारित”—वित्त मंत्रालय

कार्यक्रम में बोलते हुए भारत सरकार के वित्त मंत्रालय की अतिरिक्त सचिव और आईएफ़एडी की वैकल्पिक गवर्नर, अनु माथाई ने कहा,
हमारी साझेदारी केवल वित्तीय सहयोग नहीं, बल्कि साझा मूल्यों पर आधारित है—सहभागी, समावेशी और सतत विकास। असली परिवर्तनकर्ता ग्रामीण समुदाय हैं और हमारा दायित्व है कि उन्हें उचित साधन, ज्ञान और संस्थागत समर्थन उपलब्ध कराएँ। आईएफ़एडी ने हमेशा इन सिद्धांतों को अपनाया है, इसलिए यह साझेदारी निरंतर मजबूत हुई है।”

भारत–आईएफ़एडी सहयोग: 4.4 अरब डॉलर का प्रभाव

पिछले 48 वर्षों में भारत और आईएफ़एडी ने संयुक्त रूप से 36 ग्रामीण विकास परियोजनाएँ लागू की हैं जिनकी कुल लागत 4.4 अरब अमेरिकी डॉलर है। इसमें 1.5 अरब डॉलर आईएफ़एडी का प्रत्यक्ष निवेश है।
वर्तमान में छह परियोजनाएँ चल रही हैं, जिनकी कुल लागत 459 मिलियन डॉलर है।
भारत का घरेलू सह-वित्तपोषण अनुपात 2.65 है, जो वैश्विक लक्ष्य 0.8 से कहीं अधिक है। यह भारत द्वारा इस साझेदारी पर जताए गए विश्वास का प्रतीक है।

जलवायु–स्मार्ट कृषि और निजी क्षेत्र की भागीदारी को बढ़ावा

आईएफ़एडी की भारतीय परियोजनाएँ किसानों को विविध फसलों और जलवायु-स्मार्ट कृषि अपनाने में सहयोग दे रही हैं, ताकि वे जलवायु परिवर्तन और बाज़ार उतार-चढ़ाव से बेहतर तरीके से निपट सकें।
साथ ही किसान समूहों और निजी कंपनियों के बीच नवाचार साझेदारी को भी प्रोत्साहन मिल रहा है।

भारत के आईएफ़एडी में वैकल्पिक प्रतिनिधि डॉ. जुज्जावरप्पु बालाजी ने कहा,
“भारत–आईएफ़एडी साझेदारी वैश्विक स्तर पर ग्रामीण विकास के सफल मॉडलों का उदाहरण प्रस्तुत करती है। हम आगे भी इन मॉडलों को बड़े पैमाने पर लागू करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।”

भारत में चल रही नई परियोजनाएं

  • मेघालय: 45,000 से अधिक उद्यमों के लिए बाज़ार पहुंच बढ़ाना

  • महाराष्ट्र: ग्रामीण महिलाओं को रोजगार और कौशल विकास में सशक्त बनाना

  • जम्मू–कश्मीर: 3 लाख छोटे किसानों की जलवायु सहनशीलता बढ़ाना

  • उत्तराखंड: ग्रामीण आजीविकाओं की आय दोगुनी करना और पलायन रोकना

ग्रामीण समुदायों को आत्मनिर्भर बनाने पर संयुक्त फोकस

भारत और आईएफ़एडी मिलकर समुदाय आधारित संगठनों को मजबूत करने, कौशल बढ़ाने और सेवाओं व संसाधनों तक बेहतर पहुंच उपलब्ध कराने पर काम कर रहे हैं, ताकि ग्रामीण लोग स्वयं अपने विकास को आगे बढ़ा सकें और अपने जीवन स्तर में सुधार ला सकें।