आईसीएआर की 96वीं बैठक में कृषि मंत्री शिवराज सिंह के बड़े ऐलान!

किसानों की मांग के अनुरूप होगी शोध और योजना

आईसीएआर की 96वीं वार्षिक आम बैठक में कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान का ऐलान – राज्यवार और फसलवार कार्ययोजना बनेगी, किसानों की मांग के अनुसार होगा शोध

नई दिल्ली–केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में आज भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) की 96वीं वार्षिक आम बैठक का आयोजन नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय कृषि विज्ञान परिसर के भारत रत्न सी. सुब्रमण्यम सभागार में किया गया।

इस महत्वपूर्ण बैठक में कृषि, मत्स्य, पशुपालन, बागवानी एवं ग्रामीण विकास से संबंधित केंद्रीय और राज्य सरकारों के 18 से अधिक मंत्रीगण एवं वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। बैठक में देश की कृषि प्रणाली को सशक्त करने, किसानों की आय बढ़ाने और खाद्यान्न उत्पादन को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए कई बड़े निर्णय और घोषणाएं की गईं।

🪸 राज्यों के सहयोग से बनेगी कृषि की रणनीति

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि “कृषि राज्य का विषय है, और जब तक राज्यों का सक्रिय सहयोग नहीं होगा, तब तक कृषि क्षेत्र में सुधार अधूरा रहेगा। इसलिए अब राज्यवार और फसलवार कार्ययोजना तैयार की जाएगी।” उन्होंने कहा कि खेती की उन्नति के लिए केंद्र और राज्य मिलकर ठोस कदम उठाएं।

🥀 खेती को विज्ञान से जोड़ने पर ज़ोर

मंत्री ने कहा कि “आज की खेती तकनीक आधारित होनी चाहिए। किसानों की जरूरतों और बाजार की मांग को ध्यान में रखते हुए शोध कार्य किए जाएं। अनुसंधान सिर्फ कागजी औपचारिकता नहीं होनी चाहिए, बल्कि उसका व्यावहारिक लाभ किसानों तक पहुँचना चाहिए।” उन्होंने किसानों की मांग पर आधारित अनुसंधान और आधुनिक यंत्रों के निर्माण की दिशा में काम करने की जरूरत पर बल दिया।

🪹 फसल औषधि केंद्र खोलने पर विचार

शिवराज सिंह चौहान ने ‘फसल औषधि केंद्र’ खोलने का सुझाव रखा। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार जन औषधि केंद्रों से लोगों को सस्ती दवाएं मिलती हैं, उसी तरह किसानों को गुणवत्तापूर्ण और सस्ती कृषि दवाएं उपलब्ध कराने के लिए यह पहल आवश्यक है।

🍂 कपास पर सम्मेलन, रबी पर विशेष योजना

मंत्री ने जानकारी दी कि आगामी 11 जुलाई को कोयम्बटूर में कपास पर राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया जाएगा, जिसमें कपास मिशन को और अधिक उपयोगी और प्रभावी बनाने की रणनीति तैयार की जाएगी। साथ ही रबी सम्मेलन दो दिवसीय होगा, जिसमें विकसित कृषि संकल्प अभियान की दिशा और भविष्य की रणनीतियों को अंतिम रूप दिया जाएगा।

🫐 खराब बीज पर सख्ती और खाद की कीमतों पर निगरानी

चौहान ने बताया कि उन्होंने मध्य प्रदेश में सोयाबीन की खेती का निरीक्षण किया, जहां खराब बीज की वजह से अंकुरण नहीं हो पाया। इसके लिए उन्होंने तत्काल जांच के आदेश दिए हैं और आश्वासन दिया कि खराब बीज, अमानक उर्वरक और खाद के विरुद्ध कड़े कानून लाए जाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि उर्वरकों के मूल्य निर्धारण (MRP) की प्रणाली को सुधारने की आवश्यकता है।

🥗 देश को फूड बॉस्केट बनाने का संकल्प

कृषि मंत्री ने कहा, “भारत की माटी की उर्वरक क्षमता अतुलनीय है। हमें न केवल देश की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करनी है, बल्कि विश्व के लिए भी अन्न उत्पादन में अग्रणी भूमिका निभानी है।” उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत’ के विजन को साकार करने के लिए कृषि क्षेत्र में नवाचार, अनुसंधान और आधुनिक तकनीक का समावेश आवश्यक है।

📛 अन्य राज्यों के मंत्रियों ने भी दिए सुझाव

बैठक में बिहार, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, महाराष्ट्र, मिजोरम, अरुणाचल, ओडिशा, हरियाणा समेत कई राज्यों के कृषि और संबंधित विभागों के मंत्रियों ने अपने सुझाव और विचार साझा किए। उन्होंने खेती में बदलाव, जलवायु अनुकूल तकनीकों और किसानों के प्रशिक्षण पर बल दिया।

📝 शोध और प्रयोगशालाओं को किसान से जोड़ने का आह्वान

चौहान ने वैज्ञानिकों को ‘आधुनिक महर्षि’ बताते हुए कहा, “शोध तब ही सार्थक है जब उसका लाभ खेतों तक पहुंचे। लैब का ज्ञान व्यवहार में तब्दील हो, यह हमारी जिम्मेदारी है। जो उपकरण और तकनीक किसान को आसानी से मिले, उसकी जरूरत को ध्यान में रखकर काम करना होगा।”

🌾  कृषि केवल व्यवसाय नहीं, राष्ट्रसेवा है 🌱

अपने भाषण के अंत में कृषि मंत्री ने कहा, “खेती सिर्फ व्यवसाय नहीं, बल्कि यह भारत की सेवा है। हमें आने वाली पीढ़ियों के लिए धरती को सुरक्षित और उपजाऊ बनाए रखना है। हमारी जिम्मेदारी है कि 144 करोड़ जनता को पोषणयुक्त और पर्याप्त भोजन उपलब्ध कराएं।”

सारांश

आईसीएआर की इस 96वीं वार्षिक बैठक ने यह स्पष्ट कर दिया कि अब भारतीय कृषि नीति का फोकस वैज्ञानिक शोध, तकनीक के उपयोग और किसानों की ज़मीनी जरूरतों को जोड़ने पर है। केंद्र और राज्यों के समन्वय से कृषि को नई दिशा देने की तैयारी है। इस बैठक में उठे विषयों और लिए गए संकल्पों से यह उम्मीद की जा रही है कि आने वाले समय में भारतीय खेती वैश्विक स्तर पर और अधिक सशक्त और आत्मनिर्भर बनेगी।

Leave a Comment