संसाधन-कुशल और एकीकृत कृषि प्रणालियां ही शुष्क कृषि का भविष्य: डॉ. एम. एल. जाट
बीकानेर -भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के महानिदेशक एवं कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग (DARE) के सचिव डॉ. एम. एल. जाट ने कहा कि शुष्क कृषि का भविष्य संसाधन-कुशल और एकीकृत कृषि प्रणालियों में निहित है। वे आईसीएआर–केन्द्रीय शुष्क क्षेत्र अनुसंधान संस्थान (CAZRI) के क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र, बीकानेर के भ्रमण के दौरान वैज्ञानिकों और अधिकारियों को संबोधित कर रहे थे।
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अनुसंधान एवं विस्तार कार्यों की समीक्षा
भ्रमण के दौरान डॉ. जाट ने शुष्क क्षेत्रों के लिए चल रहे प्रमुख अनुसंधान एवं विस्तार कार्यक्रमों की समीक्षा की। इसमें अजैविक तनाव प्रबंधन, प्रमुख फसल प्रणालियों में जल व ऊर्जा उपयोग दक्षता, वर्षा-जल आधारित एकीकृत कृषि प्रणालियाँ तथा शुष्क क्षेत्रों के अनुरूप कृषि-वानिकी (एग्रोफॉरेस्ट्री) मॉडल शामिल रहे।
किसान-केंद्रित अनुसंधान पर जोर
डॉ. जाट ने कहा कि अनुसंधान की दिशा किसान-केंद्रित होनी चाहिए, ताकि तकनीकें सीधे खेत तक प्रभावी ढंग से पहुँच सकें। उन्होंने बीकानेर क्षेत्र में आईसीएआर के अन्य संस्थानों और राज्य कृषि विश्वविद्यालयों (SAUs) के साथ मजबूत समन्वय स्थापित करने की आवश्यकता पर बल दिया, जिससे संसाधनों का बेहतर उपयोग हो और अनुसंधान परिणामों का त्वरित प्रसार संभव हो सके।
शुष्क क्षेत्रों के लिए समेकित दृष्टिकोण आवश्यक
उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि जल-अभाव और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों के बीच एकीकृत खेती प्रणालियाँ, जल-संरक्षण, और ऊर्जा-कुशल तकनीकें शुष्क क्षेत्रों में टिकाऊ कृषि विकास की कुंजी हैं।
चित्र: सौजन्य सोशल मीडिया ICAR