गणतंत्र दिवस पर कृषि विज्ञान और किसानों के लिए गर्व का पल!

गणतंत्र दिवस 2026: पद्म पुरस्कारों में कृषि क्षेत्र के 8 दिग्गज सम्मानित

नई दिल्ली। 77वें गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने विभिन्न क्षेत्रों में विशिष्ट सेवाओं के लिए 131 पद्म पुरस्कारों की घोषणा की। गृह मंत्रालय द्वारा जारी सूची के अनुसार इस वर्ष 5 पद्म विभूषण, 13 पद्म भूषण और 113 पद्म श्री पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे। कला, सामाजिक कार्य, विज्ञान, चिकित्सा सहित अनेक क्षेत्रों में योगदान देने वाले इन विभूतियों में कृषि, पशुपालन और फसल विज्ञान से जुड़े आठ विशेषज्ञ भी शामिल हैं।

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कृषि अनुसंधान और नवाचार को मिला विशेष स्थान

पुरस्कार सूची में ऐसे शिक्षाविद और वैज्ञानिक शामिल हैं जिन्होंने देश के प्रमुख कृषि विश्वविद्यालयों का नेतृत्व किया, वहीं जमीनी स्तर पर नवाचार कर किसानों और ग्रामीण समुदायों को सशक्त बनाने वाले कार्यकर्ताओं को भी सम्मानित किया गया है।

अशोक कुमार सिंह

प्रख्यात पादप आनुवंशिकीविद और भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (आईएआरआई) के पूर्व निदेशक अशोक कुमार सिंह को उच्च उत्पादकता वाली बासमती धान किस्मों के विकास के लिए जाना जाता है। उन्होंने आणविक प्रजनन और पारंपरिक तकनीकों के समन्वय से दाने की गुणवत्ता और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में उल्लेखनीय योगदान दिया।

गोपालजी त्रिवेदी

कृषि शिक्षा के क्षेत्र में लंबे समय तक योगदान देने वाले गोपालजी त्रिवेदी राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा (बिहार) के पूर्व कुलपति रहे हैं। उन्होंने बिहार की विशिष्ट कृषि-जलवायु परिस्थितियों के अनुरूप कृषि शिक्षा को दिशा दी और तकनीक के माध्यम से किसानों को सशक्त बनाने पर जोर दिया।

के. रामासामी

तमिलनाडु कृषि विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति के. रामासामी ने राज्य में कृषि शिक्षा के आधुनिकीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वे आईसीएआर और यूजीसी की विभिन्न राष्ट्रीय समितियों से भी जुड़े रहे हैं।

प्रेम लाल गौतम

वर्तमान में राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के कुलाधिपति और प्रख्यात आनुवंशिकीविद प्रेम लाल गौतम आईसीएआर में फसल विज्ञान के उप महानिदेशक रह चुके हैं। उन्होंने गेहूं और कंगनी (फॉक्सटेल मिलेट) सहित 12 से अधिक उन्नत फसल किस्मों के विकास में योगदान दिया।

जोगेश देउरी

रेशम उत्पादन के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य के लिए जोगेश देउरी को सम्मानित किया गया है। वे बोडोलैंड टेरिटोरियल काउंसिल के रेशम निदेशक हैं और असम में ‘एरी’ रेशम की ‘अहिंसक’ उत्पादन पद्धति को बढ़ावा देने के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने पारंपरिक रेशम पालन को आधुनिक बनाकर ग्रामीण युवाओं और आदिवासी समुदायों की आय बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई।

श्रीरंग देवाबा लाड

महाराष्ट्र के श्रीरंग देवाबा लाड को राज्य में कृषि सेवा के लिए सम्मानित किया गया है। वे प्रगतिशील किसानों के उस वर्ग का प्रतिनिधित्व करते हैं जो खेत स्तर पर नवाचार और आधुनिक तकनीकों को अपनाकर कृषि को नई दिशा दे रहा है।

मरणोपरांत सम्मान 🙏🏻

कृषि और सहकारिता क्षेत्र के दो दिग्गजों को मरणोपरांत पद्म पुरस्कार से नवाजा गया है।
तेलंगाना के राम रेड्डी मामिडी सहकारी आंदोलन के प्रमुख स्तंभ थे। उन्होंने को-ऑपरेटिव डेवलपमेंट फाउंडेशन की स्थापना की और मुलुकानूर मॉडल के माध्यम से लोकतांत्रिक दुग्ध एवं ऋण सहकारिताओं के जरिए ग्रामीण सशक्तिकरण को बढ़ावा दिया।
उत्तर प्रदेश के रघुपत सिंह को जमीनी स्तर पर कृषि विकास में योगदान के लिए मरणोपरांत सम्मानित किया गया है।

इन पुरस्कारों के माध्यम से देश ने कृषि और ग्रामीण विकास के क्षेत्र में योगदान देने वाले वैज्ञानिकों, शिक्षाविदों और कर्मठ कार्यकर्ताओं की सेवाओं को सम्मानपूर्वक स्वीकार किया है।