छत्तीसगढ़ में कृषि विकास को नई दिशा: वैज्ञानिक–कृषक टीम से बढ़ेगी उत्पादकता, आय होगी दोगुनी
रायपुर/ दिल्ली –कृषि और ग्रामीण विकास को नई दिशा देने की दिशा में छत्तीसगढ़ में केंद्र और राज्य सरकार मिलकर व्यापक रणनीति लागू करने जा रही हैं। केंद्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि राज्य में वैज्ञानिक–कृषक–संचालन की संयुक्त टीम गठित की जाएगी, जो स्थानीय कृषि-जलवायु परिस्थितियों के अनुरूप फसल विविधता और उत्पादकता बढ़ाने की ठोस कार्ययोजना तैयार करेगी। आधुनिक तकनीक और एकीकृत कृषि प्रणाली के माध्यम से किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि करना सरकार का प्रमुख लक्ष्य है।
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राज्य स्तरीय समीक्षा बैठक में महत्वपूर्ण घोषणाएं
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आज रायपुर में आयोजित राज्य स्तरीय समीक्षा बैठक और पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ में कृषि और ग्रामीण विकास के क्षेत्र में निरंतर प्रगति हो रही है। उन्होंने बताया कि इस सप्ताह वैज्ञानिकों, किसानों तथा केंद्र–राज्य के अधिकारियों की एक संयुक्त टीम बनाई जाएगी, जो फसल चक्र में सुधार, नई तकनीकों के उपयोग और लागत घटाकर उत्पादन बढ़ाने पर काम करेगी। इसके साथ ही छोटे और सीमांत किसानों के लिए विविध आय स्रोत विकसित करने की योजनाएं भी लागू की जाएंगी।
मुख्यमंत्री के नेतृत्व में कृषि नवाचार को बढ़ावा
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार कृषि एवं ग्रामीण विकास के हर पहलू पर सक्रियता से कार्य कर रही है। उन्होंने खपरी क्षेत्र में किसानों से संवाद कर आधुनिक कृषि तकनीकों का प्रत्यक्ष अवलोकन किया। इस अवसर पर पत्रकार वार्ता में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा और राज्य के कृषि मंत्री रामविचार नेताम भी उपस्थित रहे।
आधुनिक खेती से बढ़ेगी किसानों की आय
चौहान ने किसानों को फल एवं सब्जियों की उन्नत खेती, पौधों की ग्राफ्टिंग नर्सरी, भाटा पद्धति से टमाटर और शिमला मिर्च की खेती, ड्रैगन फ्रूट, खजूर, ब्लूबेरी और केले जैसी फसलों की खेती के लाभों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जहां पारंपरिक फसलों से प्रति एकड़ 35 से 40 हजार रुपये तक की आय होती है, वहीं आधुनिक बागवानी और उच्च तकनीक अपनाने से यह आय 1 से 2 लाख रुपये प्रति एकड़ तक पहुंच सकती है। कृषि विभाग की टीम ने कीटनाशकों के वैज्ञानिक उपयोग, रोग नियंत्रण और उच्च उत्पादक किस्मों के चयन पर भी किसानों का मार्गदर्शन किया।
दलहन और तिलहन उत्पादन को मिलेगा प्रोत्साहन
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि राज्य में खाली पड़ी कृषि भूमि पर दलहन उत्पादन को विशेष रूप से बढ़ावा दिया जाएगा। मसूर, उड़द, मूंग और अरहर जैसी फसलों की न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद सुनिश्चित की जाएगी। इसके साथ ही मूंगफली, सरसों और पाम ऑयल जैसी तिलहन फसलों की खेती को भी प्रोत्साहित किया जाएगा, जिससे किसानों की आय में स्थायित्व आएगा।
एकीकृत कृषि प्रणाली से बहुआयामी लाभ
उन्होंने बताया कि राज्य में एकीकृत कृषि प्रणाली लागू की जाएगी, जिसके तहत पशुपालन, मत्स्य पालन, बागवानी, औद्योगिक फसलें और जैविक खेती को एक साथ जोड़ा जाएगा। इससे छोटे और सीमांत किसानों को वर्ष भर आय के विभिन्न स्रोत उपलब्ध होंगे।
ग्रामीण विकास में ऐतिहासिक प्रगति
ग्रामीण विकास के क्षेत्र में उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए केंद्रीय मंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पिछले डेढ़ वर्षों में छत्तीसगढ़ में 18,12,742 आवास स्वीकृत और वितरित किए गए हैं। वहीं प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत राज्य में 47,847 किलोमीटर लंबी 10,199 सड़कें और 123 बड़े पुलों का निर्माण किया गया है, जिससे ग्रामीण संपर्क में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।
महिला सशक्तिकरण को मिली नई गति
महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण पर जोर देते हुए चौहान ने कहा कि स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से ‘लखपति दीदी’ योजना तेजी से आगे बढ़ रही है। राज्य में 2,76,000 स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी 30,68,000 महिलाएं इस अभियान का हिस्सा हैं, जिनमें से 4,32,000 महिलाएं लघु उद्योगों में सक्रिय रूप से कार्य कर रही हैं। इसके अलावा महिलाओं को अब तक 11,196.16 करोड़ रुपये का ऋण उपलब्ध कराया गया है।
केंद्र–राज्य समन्वय से होगा सर्वांगीण विकास
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ में कृषि और ग्रामीण विकास के हर क्षेत्र में केंद्र और राज्य सरकार मिलकर कार्य कर रही हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत सरकार राज्य के किसानों, ग्रामीण परिवारों और महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए हरसंभव सहयोग प्रदान करेगी। उन्होंने मुख्यमंत्री और राज्य सरकार की पूरी टीम को उत्कृष्ट कार्य के लिए बधाई देते हुए कहा कि विकास से जुड़ी सभी योजनाएं राज्य में तेजी से और प्रभावी ढंग से लागू की जा रही हैं।