कृषि बजट पर संसद में बहस, बढ़ती लागत से किसान चिंतित!

लोकसभा में कृषि बजट पर चर्चा, बढ़ती उर्वरक सब्सिडी और गेहूं कटाई के बीच कृषि क्षेत्र पर बढ़ा दबाव !!

नई दिल्ली, 16 मार्च 2026। देश में रबी सीजन की सबसे महत्वपूर्ण फसल गेहूं की कटाई शुरू होने के साथ ही कृषि क्षेत्र कई बड़े आर्थिक और नीतिगत मुद्दों के केंद्र में आ गया है। एक ओर लोकसभा में कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के 2026-27 के अनुदान मांगों पर चर्चा और मतदान हो रहा है, वहीं दूसरी ओर वैश्विक संघर्षों के कारण बढ़ती उर्वरक कीमतें, आपूर्ति संकट और किसानों के बढ़ते लागत दबाव ने सरकार की चिंता बढ़ा दी है।

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विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले महीनों में किसानों की आय स्थिर रखने और उत्पादन लागत नियंत्रित करने के लिए सरकार को कई महत्वपूर्ण कदम उठाने पड़ सकते हैं।

लोकसभा में कृषि मंत्रालय के बजट पर चर्चा !!

संसद में आज कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के लिए वर्ष 2026-27 के बजट अनुदान पर चर्चा हो रही है। इस चर्चा में मुख्य रूप से निम्न मुद्दे केंद्र में हैं:

किसानों की आय बढ़ाने के लिए योजनाओं का विस्तार !!

कृषि लागत में बढ़ोतरी

उर्वरक सब्सिडी का बढ़ता बोझ

कृषि अवसंरचना और तकनीकी निवेश

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार यदि उर्वरक और डीज़ल जैसी लागतें नियंत्रित नहीं हुईं, तो आगामी खरीफ सीजन में किसानों की लागत और बढ़ सकती है।

गेहूं कटाई ने पकड़ी रफ्तार !!

उत्तर भारत के प्रमुख राज्यों पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और राजस्थान में गेहूं की कटाई तेजी से शुरू हो रही है।

कृषि विभाग के अनुसार:

इस वर्ष गेहूं उत्पादन अच्छा रहने की उम्मीद है

आधुनिक हार्वेस्टर और मशीनरी का उपयोग बढ़ा है

कटाई के साथ-साथ सरकारी खरीद की तैयारी भी शुरू हो चुकी है

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि मौसम अनुकूल रहा तो देश में गेहूं उत्पादन मजबूत रह सकता है, जिससे खाद्य सुरक्षा को मजबूती मिलेगी।

वैश्विक संकट से उर्वरक सब्सिडी पर दबाव !!

वैश्विक बाजार में उर्वरकों की कीमतों में बढ़ोतरी ने भारत के फर्टिलाइजर सब्सिडी बजट पर दबाव बढ़ा दिया है।

मुख्य कारण !!

पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव

समुद्री परिवहन में बाधाएं

कच्चे माल की कीमतों में वृद्धि

भारत अपनी बड़ी जरूरत के लिए आयातित उर्वरकों पर निर्भर है। विशेष रूप से कतर और अन्य पश्चिम एशियाई देशों से आने वाली आपूर्ति में लॉजिस्टिक चुनौतियां सामने आ रही हैं।

सरकार फिलहाल यूरिया उत्पादन और आपूर्ति को स्थिर बनाए रखने के लिए रणनीति पर काम कर रही है।

दिल्ली में किसानों का विरोध प्रदर्शन !!

इस बीच नई दिल्ली में किसानों ने प्रस्तावित भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के विरोध में प्रदर्शन किया।

किसानों का कहना है कि:

विदेशी कृषि उत्पादों के आयात से घरेलू बाजार प्रभावित हो सकता है

फसलों के दाम पर दबाव बढ़ सकता है

किसान संगठनों ने सरकार से व्यापार समझौते में भारतीय किसानों के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।

फसल और बाजार से जुड़ी अहम खबरें !!

गन्ना

उत्तर प्रदेश में गन्ना क्रशिंग में कमी के कारण राज्य की चीनी उत्पादन बढ़त थोड़ी कम होती दिखाई दे रही है।

खाद्य तेल

विशेषज्ञों ने ब्लैक सी और पश्चिम एशिया क्षेत्र में लॉजिस्टिक जोखिमों के कारण खाद्य तेल आपूर्ति को लेकर चिंता जताई है। भारत पहले से ही खाद्य तेल का बड़ा आयातक है।

दलहन

सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को किसानों को दलहन खेती की ओर प्रोत्साहित करने की सलाह दी है, ताकि देश में दालों का उत्पादन बढ़े और आयात पर निर्भरता घटे।

एग्री-टेक और कृषि उद्योग की नई पहल !!

देसी पशु नस्लों पर अनुसंधान

कृषि जैव प्रौद्योगिकी कंपनी Leads Genetics ने उत्तर प्रदेश के बरेली में इंडिजिनस कैटल जेनेटिक्स सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की शुरुआत की है, जिससे देशी गायों की नस्ल सुधार और दुग्ध उत्पादन बढ़ाने में मदद मिलेगी।

कृषि मशीनरी में महिलाओं की भूमिका !!

कृषि उपकरण निर्माता महिंद्रा ने अपना 1000वां हार्वेस्टर लॉन्च करते हुए खेती में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी को भी सम्मानित किया।

स्मार्ट-फसल परियोजना !!

छोटे किसानों की उत्पादकता बढ़ाने के लिए स्मार्ट-फसल परियोजना शुरू की गई है। इस परियोजना में डिजिटल तकनीक, डेटा और स्मार्ट कृषि समाधान का उपयोग किया जाएगा।

किसानों की आय और लागत संतुलन सबसे बड़ी चुनौती !!

विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान परिस्थितियों में भारतीय कृषि नीति के सामने तीन प्रमुख चुनौतियां हैं:

बढ़ती उत्पादन लागत

वैश्विक बाजार का दबाव

किसानों की आय स्थिर रखना

इसी के साथ सरकार सतत कृषि, तकनीक आधारित खेती और फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने की दिशा में कदम उठा रही है।