उर्वरक से लेकर सिंचाई तक, जानिए फल तुड़ाई के बाद की पूरी गाइड

समस्तीपुर, बिहार। डॉ. राजेन्द्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा, समस्तीपुर के वरिष्ठ फल रोग विशेषज्ञ और पूर्व प्रधान अन्वेषक, अखिल भारतीय फल अनुसंधान परियोजना (फल) प्रो. (डॉ.) एस. के. सिंह ने किसानों को महत्वपूर्ण सलाह दी है। उन्होंने कहा कि उत्तर भारत में आम और लीची की तुड़ाई लगभग पूरी हो चुकी है, ऐसे में अब सबसे ज़रूरी कार्य है बागों की देखभाल और पोषण प्रबंधन।
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अगर तुड़ाई के बाद समय पर आवश्यक कृषि कार्य नहीं किए गए, तो अगले वर्ष उत्पादन में भारी गिरावट हो सकती है, उन्होंने चेताया।
उन्होंने आगे बताया कि आम और लीची दोनों ही प्रमुख फसलें हैं जिनकी घरेलू ही नहीं, अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी भारी मांग रहती है, ऐसे में बागों की उपेक्षा करना आर्थिक रूप से नुकसानदायक साबित हो सकता है।
🌳 तोड़ाई के बाद बागों की देखभाल क्यों है जरूरी?
प्रो. सिंह के अनुसार, फल पकने के दौरान पेड़ मिट्टी से काफी मात्रा में पोषक तत्व खींचते हैं। यदि इनकी भरपाई समय पर नहीं की गई तो पेड़ कमजोर हो जाते हैं, जिससे अगले साल उनमें न तो फूल आएंगे और न ही फल।
उन्होंने कहा कि बागों में समय पर खाद, उर्वरक और सूक्ष्म पोषक तत्वों का प्रयोग ही अगले वर्ष की अच्छी फसल की नींव रखता है।
📌 आम और लीची के लिए खाद की मात्रा
आम के लिए (10 वर्ष या उससे अधिक उम्र के पेड़):
यूरिया – 850 ग्राम
डीएपी – 550 ग्राम
म्यूरेट ऑफ पोटाश – 750 ग्राम
सड़ी हुई गोबर खाद – 20 से 25 किलोग्राम
लीची के लिए (15 वर्ष या उससे अधिक उम्र के पेड़):
यूरिया – 850 ग्राम
डीएपी – 550 ग्राम
म्यूरेट ऑफ पोटाश – 750 ग्राम
सड़ी हुई गोबर खाद – 20 से 25 किलोग्राम
कम उम्र के पेड़ों के लिए खाद की मात्रा उनकी उम्र के अनुपात में तय की जानी चाहिए। उदाहरण के लिए, 5 साल के आम पेड़ को कुल अनुशंसित मात्रा को 10 से भाग देकर 5 से गुणा करना होगा।
🧪कैसे दें खाद और उर्वरक?
प्रो. सिंह ने बताया कि पेड़ के चारों ओर 1.5 से 2 मीटर की दूरी पर एक रिंग (घेरा) बनाकर लगभग 9 इंच गहराई तक खुदाई करें। उस रिंग में खाद और उर्वरक मिलाकर डालें और फिर सिंचाई अवश्य करें।
🔴 आम के लिए खाद का अंतिम समय – 15 सितंबर
🔴 लीची के लिए खाद का अंतिम समय – 10 सितंबर
इसके बाद खाद देने से पेड़ नई पत्तियां निकालने लगते हैं और पुष्पन नहीं हो पाता, जिससे उत्पादन प्रभावित होता है।
🧂 सूक्ष्म पोषक तत्वों की भूमिका
जिंक – 0.5% जिंक सल्फेट का छिड़काव दो बार: एक बार फल तुड़ाई के बाद और दूसरी बार फूल आने से पहले।
बोरान – 0.1% बोरिक एसिड का छिड़काव तुड़ाई के बाद करें।
आयरन – 0.5% फेरस सल्फेट का छिड़काव या मिट्टी में 100-200 ग्राम डालें।
🌱 जैविक खाद और मल्चिंग से मिलेगी अतिरिक्त ताकत
प्रो. सिंह ने जैविक खाद जैसे गोबर खाद और कम्पोस्ट के उपयोग पर ज़ोर देते हुए कहा कि इससे मिट्टी की उर्वरता और जल धारण क्षमता बढ़ती है। मल्चिंग करने से नमी बनी रहती है और खरपतवार पर नियंत्रण भी रहता है।
💧 सिंचाई और मृदा परीक्षण की सलाह
खाद डालने के बाद सिंचाई आवश्यक है ताकि पोषक तत्व जड़ों तक पहुंच सकें। इसके अलावा हर वर्ष मिट्टी की जांच (मृदा परीक्षण) कराना चाहिए ताकि खेत की पोषक स्थिति का सही आकलन हो सके और खाद की मात्रा उसी के अनुसार तय की जा सके।
✅ सारांश: आने वाले साल की फसल अब तय होगी
- प्रो. (डॉ.) एस. के. सिंह ने स्पष्ट किया कि तुड़ाई के बाद का यह समय फलों की अगली फसल के लिए निर्णायक होता है। इस समय की गई छोटी लापरवाही भी अगले वर्ष भारी नुकसान का कारण बन सकती है। किसानों को चाहिए कि वे समय रहते बागों की देखभाल करें और अनुशंसित तिथियों से पहले खाद और पोषक तत्वों का प्रयोग करें।