खेती से समृद्धि तक: आर्थिक समीक्षा में कृषि की बड़ी तस्वीर!

4.4% विकास दर के साथ भारतीय कृषि मजबूत, बागवानी चमकी

नई दिल्ली –कृषि क्षेत्र ‘विकसित भारत’ के संकल्प को साकार करने की धुरी बनेगा और समावेशी विकास को गति देते हुए करोड़ों लोगों की आजीविका को सशक्त करेगा। संसद में प्रस्तुत आर्थिक समीक्षा 2025-26 में यह स्पष्ट किया गया है कि बीते वर्षों में भारतीय कृषि ने स्थिर और मजबूत वृद्धि दर्ज की है, जिसमें कृषि के सहयोगी क्षेत्रों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

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कृषि क्षेत्र की सुदृढ़ होती स्थिति

आर्थिक समीक्षा के अनुसार, भारतीय कृषि की स्थिति बीते वर्षों में लगातार मजबूत हुई है। कृषि एवं इसके सहयोगी क्षेत्रों में हुए संतुलित विकास के कारण समग्र कृषि क्षेत्र ने निरंतर प्रगति दर्ज की है। समीक्षा में कहा गया है कि हाल के वर्षों में खाद्यान्न उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, वहीं पशुपालन, मत्स्य पालन और बागवानी जैसे उच्च मूल्य वाले क्षेत्र ग्रामीण आय और रोजगार के नए अवसर सृजित कर रहे हैं।

5 वर्षों में 4.4 प्रतिशत औसत वार्षिक वृद्धि

रिपोर्ट के अनुसार, पिछले पांच वर्षों के दौरान कृषि एवं सहयोगी क्षेत्रों में स्थिर मूल्य पर औसत वार्षिक विकास दर 4.4 प्रतिशत रही है। वित्तीय वर्ष 2025-26 की दूसरी तिमाही में कृषि क्षेत्र की विकास दर 3.5 प्रतिशत दर्ज की गई।
वित्तीय वर्ष 2016 से 2025 के बीच कृषि क्षेत्र की दशकीय वृद्धि दर 4.45 प्रतिशत रही, जो कि पिछले दशकों की तुलना में सर्वाधिक है।

पशुधन और मत्स्य पालन का मजबूत योगदान

आर्थिक समीक्षा में बताया गया है कि यह तेज़ वृद्धि मुख्य रूप से पशुधन क्षेत्र (7.1 प्रतिशत) और मत्स्य पालन व मछली पकड़ने (8.8 प्रतिशत) के सशक्त प्रदर्शन का परिणाम है। इसके बाद फसल क्षेत्र का स्थान रहा, जिसमें 3.5 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
वित्तीय वर्ष 2015 से 2024 के बीच पशुधन क्षेत्र के सकल मूल्य वर्धन (जीवीए) में लगभग 195 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई और इस क्षेत्र ने वर्तमान मूल्य पर 12.77 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) हासिल की।

मछली उत्पादन में 140 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी

मत्स्य पालन क्षेत्र ने भी उल्लेखनीय प्रदर्शन किया है। वर्ष 2004-14 की तुलना में 2014-2025 के दौरान मछली उत्पादन में 140 प्रतिशत से अधिक (88.14 लाख टन) की वृद्धि दर्ज की गई। आर्थिक समीक्षा के अनुसार, ये सहयोगी क्षेत्र कृषि आय बढ़ाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने के प्रमुख वाहक बनकर उभरे हैं।

रिकॉर्ड स्तर पर खाद्यान्न उत्पादन

भारत के खाद्यान्न उत्पादन में भी निरंतर वृद्धि दर्ज की गई है। कृषि वर्ष 2024-25 के दौरान खाद्यान्न उत्पादन के 3,577.3 लाख मीट्रिक टन (एलएमटी) तक पहुंचने का अनुमान है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 254.3 एलएमटी अधिक है।
यह बढ़ोतरी मुख्य रूप से चावल, गेहूं, मक्का और मोटे अनाजों (श्री अन्न) की अधिक उपज के कारण संभव हुई है।

बागवानी क्षेत्र बना उज्ज्वल पक्ष

कृषि मूल्य वर्धन (जीवीए) में लगभग 33 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ बागवानी क्षेत्र देश की कृषि विकास यात्रा का सबसे उज्ज्वल पक्ष बनकर उभरा है।
वित्तीय वर्ष 2024-25 में बागवानी उत्पादन 362.08 मिलियन टन तक पहुंच गया, जो अनुमानित खाद्यान्न उत्पादन 329.68 मिलियन टन से अधिक है।
आंकड़ों के अनुसार, बागवानी उत्पादन 2013-14 में 280.70 मिलियन टन से बढ़कर 2024-25 में 367.72 मिलियन टन तक पहुंच गया।

फल और सब्जी उत्पादन में भारत की वैश्विक पहचान

बागवानी क्षेत्र के अंतर्गत फलों का उत्पादन 114.51 मिलियन टन, सब्जियों का 219.67 मिलियन टन और अन्य बागवानी फसलों का 33.54 मिलियन टन रहा।
आर्थिक समीक्षा में बताया गया है कि भारत विश्व का सबसे बड़ा प्याज उत्पादक देश बन चुका है और वैश्विक प्याज उत्पादन में 25 प्रतिशत का योगदान देता है। वहीं सब्जियों, फलों और आलू के उत्पादन में भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक है, जो प्रत्येक श्रेणी के वैश्विक उत्पादन में 12-13 प्रतिशत का योगदान करता है।

‘विकसित भारत’ की दिशा में कृषि की केंद्रीय भूमिका

अंत में आर्थिक समीक्षा में स्पष्ट किया गया है कि कृषि ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए केंद्रीय भूमिका निभाएगी। डेयरी, पोल्ट्री, मत्स्य पालन और बागवानी जैसे क्षेत्र न केवल देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं, बल्कि समावेशी विकास को बढ़ावा देते हुए करोड़ों लोगों की आजीविका को भी बेहतर बना रहे हैं।