राष्ट्रीय सूखा न्यूनीकरण परियोजना के तहत ICRISAT–ओडिशा सरकार के बीच MoU !!
‘कृषि ओडिशा 2026’ में जलवायु-सहिष्णु कृषि की दिशा में बड़ा कदम …
ओडिशा सरकार के कृषि एवं किसान सशक्तिकरण विभाग (DAFE) द्वारा आयोजित राज्य के प्रमुख वार्षिक कृषि कार्यक्रम ‘कृषि ओडिशा 2026’ का शुभारंभ 22 जनवरी 2026 को हुआ। तीन दिवसीय इस आयोजन ने किसानों, नीति-निर्माताओं, वैज्ञानिकों, शोध संस्थानों, शिक्षाविदों और उद्योग जगत को एक साझा मंच पर एकत्र किया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य राज्य में कृषि विकास, नवाचार और किसानों की आय बढ़ाने के लिए प्रभावी रणनीतियों पर संवाद स्थापित करना रहा।
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ओडिशा कृषि सूखा न्यूनीकरण कार्यक्रम की शुरुआत !!
कार्यक्रम के उद्घाटन अवसर पर राष्ट्रीय सूखा न्यूनीकरण कार्यक्रम (NDMP) के अंतर्गत ओडिशा कृषि सूखा न्यूनीकरण कार्यक्रम (OADMP) का शुभारंभ कृषि भवन में किया गया। यह कार्यक्रम राज्य में सूखा प्रभावित और वर्षा-आश्रित क्षेत्रों में जलवायु जोखिम को कम करने, फसल उत्पादकता बढ़ाने और किसानों की आजीविका को सुरक्षित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
ICRISAT और ओडिशा सरकार के बीच समझौता ज्ञापन !!
OADMP के क्रियान्वयन को सशक्त बनाने के लिए अंतरराष्ट्रीय अर्ध-शुष्क उष्णकटिबंधीय फसल अनुसंधान संस्थान (ICRISAT) और ओडिशा सरकार के बीच एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। इस समझौते के तहत ICRISAT राज्य में जलवायु-सहिष्णु कृषि, सूखा प्रबंधन, फसल विविधीकरण और वैज्ञानिक नवाचारों के माध्यम से किसानों को लाभ पहुंचाने में प्रमुख कार्यान्वयन भागीदार की भूमिका निभाएगा।
उद्घाटन सत्र में वरिष्ठ नेतृत्व की उपस्थिति !!
उद्घाटन सत्र और MoU हस्ताक्षर समारोह की अध्यक्षता उपमुख्यमंत्री कनक वर्धन सिंह देव ने की। इस अवसर पर राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी, राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय अनुसंधान संस्थानों के प्रतिनिधि और शिक्षाविद उपस्थित रहे। कार्यक्रम में ओडिशा सरकार, ICRISAT, अंतरराष्ट्रीय धान अनुसंधान संस्थान (IRRI), ओडिशा कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (OUAT), ICAR–CRIDA सहित विभिन्न विभागों और संस्थानों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
ओडिशा को मॉडल राज्य बताते हुए ICRISAT महानिदेशक का संबोधन !!
उद्घाटन सत्र में ICRISAT के महानिदेशक डॉ. हिमांशु पाठक ने समावेशी और एकीकृत कृषि विकास के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि ओडिशा का कृषि मॉडल देश के अन्य राज्यों के लिए प्रेरणादायी बनकर उभरा है।
डॉ. पाठक ने कहा, “राज्य कृषि नीति 2020 के तहत ओडिशा ने केवल उत्पादन बढ़ाने से आगे बढ़कर लाभकारी, लचीली और पोषण-केंद्रित कृषि प्रणालियों को अपनाया है। जलवायु परिवर्तन, पोषण सुरक्षा और ग्रामीण आजीविका की चुनौतियों से निपटने के लिए यही दिशा वैश्विक कृषि को अपनानी होगी।”
किसानों की भूमिका पर उपमुख्यमंत्री का संदेश !!
उपमुख्यमंत्री कनक वर्धन सिंह देव ने अपने संबोधन में ओडिशा के किसानों के योगदान को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि राज्य का आयातक से आत्मनिर्भर और अब निर्यातक बनने का सफर किसानों की मेहनत और सरकार की नीतियों का परिणाम है। उन्होंने कहा, “समावेशिता तभी संभव है जब नीति, शिक्षा, उद्योग, किसान और वैज्ञानिक मिलकर एकीकृत विकास के लिए कार्य करें।”
ICRISAT की नवाचार प्रदर्शनी बनी आकर्षण का केंद्र !!
कृषि ओडिशा 2026 की प्रदर्शनी में ICRISAT द्वारा विकसित सौर ऊर्जा चालित जलकुंभी हार्वेस्टर विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। यह तकनीक “सस्टेनेबल वैलोराइजेशन ऑफ वाटर हायसिंथ बायोमास” परियोजना के अंतर्गत विकसित की गई है, जिसका उद्देश्य जलकुंभी जैसी समस्या को वेस्ट-टू-वेल्थ मॉडल के जरिए ग्रामीण उद्यमिता में बदलना है। यह परियोजना ओडिशा सरकार के कृषि एवं किसान सशक्तिकरण विभाग द्वारा समर्थित है।
शीर्ष तीन प्रदर्शनों में स्थान, ICRISAT को सम्मान !!
इस अभिनव प्रदर्शनी को ओपन डिस्प्ले श्रेणी में शीर्ष तीन प्रदर्शनों में शामिल किया गया। समापन सत्र के दौरान डॉ. अविराज दत्ता (ICRISAT) को यह सम्मान डॉ. अरबिंद पाढ़ी, अपर मुख्य सचिव, कृषि एवं किसान सशक्तिकरण विभाग द्वारा प्रदान किया गया।
दलहन और तिलहन में आत्मनिर्भरता पर तकनीकी सत्र !!
कार्यक्रम के दूसरे दिन, 23 जनवरी 2026 को ICRISAT द्वारा “दलहन और तिलहन में आत्मनिर्भर ओडिशा” विषय पर एक उच्चस्तरीय तकनीकी सत्र का आयोजन किया गया। इस सत्र की सह-अध्यक्षता डॉ. स्टैनफोर्ड ब्लेड, उप महानिदेशक (अनुसंधान एवं नवाचार), ICRISAT और सुश्री लिट्टी पटनायक, अपर निदेशक (विस्तार), DAFE ने की।
नीति से खेत तक प्रभाव पर विशेषज्ञ चर्चा !!
सत्र में डॉ. मंज़ूर डार, ग्लोबल हेड–सीड सिस्टम्स, ICRISAT ने मुख्य प्रस्तुति देते हुए ओडिशा में दलहन और तिलहन में आत्मनिर्भरता के लिए नीतिगत इरादों को जमीनी स्तर पर लागू करने के उपाय बताए। पैनल चर्चा में ICAR और निजी क्षेत्र के विशेषज्ञों ने धान के परती क्षेत्रों में दलहन खेती, बीज प्रणाली को मजबूत करने और नई उच्च उत्पादक किस्मों के उपयोग जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विचार साझा किए।
2030 तक आत्मनिर्भरता का स्पष्ट रोडमैप !!
तकनीकी सत्र के दौरान यह स्पष्ट किया गया कि सुनियोजित रणनीति, मजबूत बीज तंत्र, वैज्ञानिक तकनीक और किसानों की सक्रिय भागीदारी से 2030 तक ओडिशा को दलहन और तिलहन में आत्मनिर्भर बनाया जा सकता है।
ICRISAT–ओडिशा साझेदारी को नई मजबूती !!
कुल मिलाकर, कृषि ओडिशा 2026 में ICRISAT की सक्रिय भागीदारी ने ओडिशा सरकार के साथ उसकी दीर्घकालिक साझेदारी को और मजबूत किया है। यह मंच न केवल राज्य में चल रही कृषि परियोजनाओं की प्रगति साझा करने का अवसर बना, बल्कि किसानों, वैज्ञानिकों और नीति-निर्माताओं के बीच संवाद को भी नई दिशा देने में सफल रहा।



