डेयरी विकास को जमीनी स्तर तक ले जाने के लिए ऐतिहासिक समझौता
नई दिल्ली –देश के डेयरी क्षेत्र को सुदृढ़, आधुनिक और टिकाऊ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) और राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) के बीच एक ऐतिहासिक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। यह समझौता अनुसंधान, नवाचार और विस्तार गतिविधियों को सशक्त करने के साथ-साथ डेयरी विकास को जमीनी स्तर तक प्रभावी रूप से पहुँचाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होने की उम्मीद है।
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बहुविषयक अनुसंधान और नवाचार को मिलेगा बढ़ावा
इस रणनीतिक गठबंधन का मुख्य उद्देश्य संपूर्ण डेयरी क्षेत्र में बहुविषयक अनुसंधान, तकनीकी नवाचार और क्षमता निर्माण को बढ़ावा देना है। समझौते के अंतर्गत दूध उत्पादन, पशु स्वास्थ्य, चारा विकास, दुग्ध प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन और विपणन जैसे प्रमुख क्षेत्रों में संयुक्त रूप से कार्य किया जाएगा। इससे न केवल वैज्ञानिक अनुसंधान को व्यवहारिक धरातल पर उतारा जा सकेगा, बल्कि डेयरी किसानों की आय बढ़ाने में भी मदद मिलेगी।
लाखों डेयरी किसानों को होगा सीधा लाभ
यह साझेदारी देशभर के लाखों डेयरी किसानों और पशुपालकों को केंद्र में रखकर तैयार की गई है। प्राथमिक हितधारकों के रूप में किसानों को आधुनिक तकनीकों, वैज्ञानिक सलाह और प्रशिक्षण से जोड़ने पर विशेष बल दिया गया है। इसके माध्यम से किसानों की उत्पादकता, लागत दक्षता और लाभप्रदता में सुधार होने की संभावना है।
गरिमामय उपस्थिति में समझौते पर हस्ताक्षर
समझौता ज्ञापन पर आईसीएआर के उप महानिदेशक (पशु विज्ञान) डॉ. राघवेंद्र भट्टा और एनडीडीबी के कार्यकारी निदेशक (संचालन) एस. रेगूपथी ने हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग (डीएआरई) के सचिव एवं आईसीएआर के महानिदेशक डॉ. मांगी लाल जाट तथा एनडीडीबी के अध्यक्ष डॉ. मीनेश सी. शाह की विशेष उपस्थिति रही।
संस्थागत बाधाओं को तोड़ने पर जोर
आईसीएआर के महानिदेशक डॉ. मांगी लाल जाट ने अपने संबोधन में कहा कि यह समझौता विभिन्न संस्थानों के बीच मौजूद बाधाओं को तोड़ते हुए पूरक और सहयोगात्मक अनुसंधान को नई दिशा देगा। उन्होंने एकीकृत कृषि प्रणाली को समय की आवश्यकता बताते हुए कहा कि डेयरी क्षेत्र की समस्याओं का समाधान समग्र दृष्टिकोण से ही संभव है।
जलवायु परिवर्तन और उत्पादकता चुनौतियों पर फोकस
डॉ. जाट ने कहा कि यह साझेदारी जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों, पशुधन की कम उत्पादकता, और डेयरी मूल्य श्रृंखला के विकास जैसे जटिल विषयों पर ठोस समाधान प्रस्तुत करेगी। उन्होंने आवारा पशुओं की समस्या के समाधान के लिए गोशालाओं के माध्यम से टिकाऊ मॉडल, खाद प्रबंधन तथा बायोगैस के प्रभावी उपयोग पर भी जोर दिया।
चारा विकास को बताया उत्पादकता की कुंजी
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पशुधन की उत्पादकता बढ़ाने में उन्नत चारा प्रबंधन की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। आईसीएआर द्वारा विकसित नवीन चारा किस्में और पोषण तकनीकें इस दिशा में महत्वपूर्ण योगदान देंगी।
‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को मिलेगा समर्थन
एनडीडीबी के अध्यक्ष डॉ. मीनेश सी. शाह ने कहा कि यह गठबंधन ‘विकसित भारत’ के सपने को साकार करने के लिए वैज्ञानिक और संस्थागत सहयोग का एक सशक्त मंच बनेगा। उन्होंने बताया कि एनडीडीबी पहले भी आईसीएआर के साथ राशन संतुलन, खनिज मानचित्रण और मिश्रित आहार जैसी पहलों पर सफलतापूर्वक कार्य कर चुका है।
पारंपरिक पशु चिकित्सा और नए मॉडलों पर कार्य
डॉ. शाह ने पारंपरिक पशु चिकित्सा में सहयोग की संभावनाओं पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि पशुधन और कृषि क्षेत्रों में उभरती समस्याओं के समाधान के लिए राष्ट्रीय हित में साझा प्रयास किए जाएंगे। साथ ही, देश के विभिन्न कृषि-जलवायु क्षेत्रों के लिए लागू किए जा सकने वाले और अनुकरणीय मॉडल विकसित किए जाएंगे।
मूल्य श्रृंखला विकास में व्यापक सहयोग
समझौते के तहत दूध एवं दुग्ध उत्पादों, फल और सब्जियों, तिलहन, चारा उत्पादन और संबंधित मूल्य श्रृंखलाओं में सहयोग को बढ़ावा दिया जाएगा। इससे किसानों को बेहतर बाजार, उचित मूल्य और प्रसंस्करण सुविधाएं मिल सकेंगी।
प्रशिक्षण, ज्ञान साझा करने पर विशेष जोर
यह एमओयू ज्ञान साझाकरण, प्रौद्योगिकी विकास एवं सत्यापन, मानव संसाधन विकास और शोधकर्ताओं, पेशेवरों एवं किसानों के लिए संयुक्त प्रशिक्षण कार्यक्रमों के संचालन पर विशेष बल देता है। इससे अनुसंधान और विस्तार के बीच की दूरी कम होगी।
डेयरी क्षेत्र में स्थिरता और लाभप्रदता की उम्मीद
उम्मीद जताई जा रही है कि यह समझौता अनुसंधान परिणामों को व्यवहारिक स्तर पर लागू करने में सहायक सिद्ध होगा, जिससे डेयरी क्षेत्र में उत्पादकता, आर्थिक लाभ और दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित की जा सकेगी।
इस अवसर पर आईसीएआर और एनडीडीबी के वरिष्ठ अधिकारी, वैज्ञानिक और अन्य विशिष्ट प्रतिनिधि उपस्थित रहे।