“उद्यान उत्सव” में जलवायु-सहिष्णु धान उत्पादन पर विस्तृत कार्यशाला
किसानों को आधुनिक तकनीक, ऐप्स और वैज्ञानिक प्रबंधन की मिली जानकारी
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!A workshop on Climate Resilient Paddy Production Systems was organized by ICAR–Indian Institute of Rice Research (IIRR) in collaboration with MANAGE during Udyan Utsav 2026 at Rashtrapati Nilayam, Hyderabad. Scientists demonstrated rapid soil testing kits, climate-resilient rice varieties, and integrated pest and disease management practices. Mobile applications such as NAPSRI, Rice Clinic, and RAISE – Rice AI Stress Evaluator were showcased to support farmers in climate-smart rice farming. Around 80 participants, including farmers and agri-input dealers, attended the programme.
हैदराबाद- राष्ट्रपति निलयम, हैदराबाद में 11 जनवरी 2026 तक आयोजित “उद्यान उत्सव” कृषि एवं बागवानी महोत्सव के अंतर्गत जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए जलवायु-सहिष्णु धान उत्पादन प्रणालियों पर एक विस्तृत कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह आयोजन कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के सहयोग से किया जा रहा है, जिसमें राष्ट्रीय कृषि विस्तार प्रबंधन संस्थान (MANAGE) को प्रमुख नॉलेज पार्टनर के रूप में जोड़ा गया है।
इस क्रम में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद–भारतीय धान अनुसंधान संस्थान (ICAR-IIRR) द्वारा 6 जनवरी 2026 को MANAGE के सहयोग से आयोजित इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य किसानों को बदलती जलवायु परिस्थितियों में धान की टिकाऊ एवं लाभकारी खेती के लिए वैज्ञानिक जानकारी और व्यवहारिक समाधान उपलब्ध कराना रहा।
मृदा परीक्षण और डिजिटल तकनीक पर जोर
कार्यशाला के दौरान मृदा विज्ञान विषय के विशेषज्ञ डॉ. ब्रजेंद्र पी.एस. एवं डॉ. गोबीनाथ ने किसानों और प्रतिभागियों के समक्ष त्वरित मृदा परीक्षण किट का जीवंत प्रदर्शन किया। उन्होंने मृदा में उपलब्ध पोषक तत्वों की त्वरित पहचान और उसके आधार पर उर्वरक प्रबंधन की उपयोगिता को विस्तार से समझाया। साथ ही किसानों को NAPSRI मोबाइल ऐप के माध्यम से धान में पोषक तत्व प्रबंधन एवं निर्णय सहायता प्रणाली की जानकारी दी गई।
जलवायु के अनुरूप धान की किस्मों का चयन
इसके बाद डॉ. के. श्रुति, वैज्ञानिक, ने जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को ध्यान में रखते हुए जलवायु-सहिष्णु धान किस्मों के चयन पर विस्तृत प्रस्तुति दी। उन्होंने बताया कि किस प्रकार सूखा, अधिक तापमान, जलभराव और अनियमित वर्षा जैसी परिस्थितियों में उपयुक्त किस्मों का चयन कर किसान अपनी उपज और आय दोनों को सुरक्षित रख सकते हैं।
कीट एवं रोग प्रबंधन पर वैज्ञानिक मार्गदर्शन
कार्यशाला में वरिष्ठ वैज्ञानिक (कीट विज्ञान) डॉ. वी. चिन्ना बाबू नायक ने जलवायु परिवर्तन के कारण कीट प्रकोप में होने वाले बदलावों पर प्रकाश डालते हुए समेकित कीट प्रबंधन (IPM) की रणनीतियों की जानकारी दी। वहीं डॉ. जेसुदास जी, वैज्ञानिक (पादप रोग विज्ञान), ने समेकित रोग प्रबंधन (IDM) उपायों के माध्यम से धान की फसल को रोगों से सुरक्षित रखने के तरीकों पर विस्तार से चर्चा की।
FPOs और सामूहिक प्रयासों की भूमिका
कार्यशाला के अंतिम सत्र में डॉ. जयकुमार (समन्वयक) एवं डॉ. जागृति रोहित (सह-समन्वयक) ने किसान उत्पादक संगठनों (FPOs), कृषक समूहों और विस्तार गतिविधियों की भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि सामूहिक प्रयासों, तकनीकी ज्ञान और डिजिटल साधनों के माध्यम से जलवायु-सहिष्णु धान उत्पादन की चुनौतियों का प्रभावी समाधान संभव है।
इस अवसर पर किसानों को Rice Clinic तथा RAISE – Rice AI Stress Evaluator जैसे उन्नत मोबाइल ऐप्स का प्रदर्शन भी कराया गया, जिससे वे फसल में तनाव की पहचान और समय पर प्रबंधन कर सकें।
किसानों की सक्रिय भागीदारी
इस ज्ञानवर्धक कार्यशाला में संगारेड्डी जिले के किसानों, DAESI कार्यक्रम से जुड़े इनपुट डीलरों सहित लगभग 80 प्रतिभागियों ने भाग लिया। प्रतिभागियों ने वैज्ञानिकों से प्रत्यक्ष संवाद कर अपनी शंकाओं का समाधान किया और जलवायु-सहिष्णु धान उत्पादन को अपनाने का संकल्प लिया।
यह कार्यशाला किसानों के लिए न केवल तकनीकी ज्ञान का माध्यम बनी, बल्कि बदलते मौसम के दौर में टिकाऊ, सुरक्षित और लाभकारी धान उत्पादन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुई।