किसानों की ताकत बनेगा नामरूप प्लांट, असम से आत्मनिर्भर भारत की मजबूत नींव!

प्रधानमंत्री मोदी ने नामरूप में 11 हजार करोड़ की उर्वरक परियोजना का शिलान्यास किया

डिब्रूगढ़ (असम)प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज असम के डिब्रूगढ़ जिले के नामरूप में असम वैली उर्वरक एवं रसायन कंपनी लिमिटेड (बीवीएफसीएल) की अमोनिया-यूरिया उर्वरक परियोजना की आधारशिला रखी। इस अवसर पर आयोजित विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने इसे असम और पूरे पूर्वोत्तर भारत के लिए ऐतिहासिक दिन बताया।

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असम की वीर भूमि को नमन

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन की शुरुआत असम की गौरवशाली परंपरा को नमन करते हुए की। उन्होंने चाओलुंग सुखापा, महावीर लछित बोडफुकन, भीमबर देउरी, शहीद कुशल कुंवर, मोरन राजा बोदूसा, मालती मेम, इंदिरा मीरी, स्वर्गदेव सरबानंदा सिंह और वीर सती साधनी जैसे महापुरुषों के योगदान को स्मरण किया और उजानी असम की वीर भूमि को प्रणाम किया।

जनसभा में उमड़ा जनसैलाब

प्रधानमंत्री मोदी ने बड़ी संख्या में उपस्थित जनता, विशेषकर माताओं और बहनों की मौजूदगी का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि असम के चाय बागानों की सुगंध उनके और असम के बीच एक भावनात्मक संबंध को दर्शाती है और जनता का यह स्नेह उन्हें प्रेरणा देता है।

असम ने पकड़ी विकास की नई रफ्तार

प्रधानमंत्री ने कहा कि आज असम ने विकास की नई गति पकड़ ली है। नामरूप और डिब्रूगढ़ का वर्षों पुराना सपना अब साकार हो रहा है और इससे औद्योगिक प्रगति का नया अध्याय शुरू हुआ है। उन्होंने कहा कि यह तो केवल शुरुआत है और असम को अभी और आगे जाना है।

11 हजार करोड़ का निवेश, 12 लाख टन उत्पादन

प्रधानमंत्री ने बताया कि इस उर्वरक परियोजना में लगभग 11 हजार करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा। इससे प्रतिवर्ष 12 लाख मीट्रिक टन से अधिक यूरिया का उत्पादन होगा। स्थानीय स्तर पर उत्पादन होने से किसानों को समय पर उर्वरक मिलेगा और परिवहन लागत में भी कमी आएगी।

हजारों रोजगार के नए अवसर

उन्होंने कहा कि नामरूप इकाई से हजारों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित होंगे। संयंत्र के संचालन, रखरखाव, आपूर्ति और अन्य सहायक गतिविधियों से स्थानीय युवाओं को स्थायी रोजगार मिलेगा।

किसानों के कल्याण पर सरकार का फोकस

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि उनकी सरकार किसानों के कल्याण को अपने सभी प्रयासों के केंद्र में रख रही है। विकसित भारत के निर्माण में अन्नदाताओं की भूमिका सबसे अहम है और सरकार किसान हितैषी योजनाओं को प्राथमिकता दे रही है।

यूरिया आपूर्ति को मजबूत करेगा नया संयंत्र

उन्होंने कहा कि कृषि कल्याण योजनाओं के साथ-साथ उर्वरकों की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित करना भी जरूरी है। नामरूप का नया यूरिया संयंत्र इस दिशा में बड़ा कदम है, जिससे पूर्वोत्तर राज्यों के किसानों को राहत मिलेगी।

बीते दौर की समस्याओं का समाधान

प्रधानमंत्री ने कहा कि एक समय नामरूप उर्वरक उत्पादन का प्रमुख केंद्र था, लेकिन पुरानी तकनीक और उपेक्षा के कारण कई इकाइयां बंद हो गईं। इससे किसानों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य की मौजूदा सरकारें अब इन समस्याओं का समाधान कर रही हैं।

यूरिया उत्पादन में आत्मनिर्भरता की ओर भारत

प्रधानमंत्री ने बताया कि वर्ष 2014 में देश में 225 लाख मीट्रिक टन यूरिया का उत्पादन होता था, जो आज बढ़कर लगभग 306 लाख मीट्रिक टन हो गया है। सरकार का लक्ष्य आयात पर निर्भरता कम कर देश को आत्मनिर्भर बनाना है।

किसानों को सस्ती दरों पर उर्वरक

उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में महंगे दामों के बावजूद किसानों को यूरिया का एक बोरा मात्र 300 रुपये में उपलब्ध कराया जा रहा है। शेष लागत सरकार सब्सिडी के रूप में वहन कर रही है ताकि किसानों पर बोझ न पड़े।

बीज से बाजार तक किसानों के साथ सरकार

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि सरकार बीज से लेकर बाजार तक किसानों के साथ खड़ी है। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के तहत अब तक करीब 4 लाख करोड़ रुपये सीधे किसानों के खातों में भेजे जा चुके हैं।

नई कृषि योजनाओं से मिलेगा बल

उन्होंने बताया कि कृषि को बढ़ावा देने के लिए प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना और दलहन आत्मनिर्भरता मिशन जैसी नई पहलें शुरू की गई हैं। फसल बीमा, किसान क्रेडिट कार्ड और प्राकृतिक खेती मिशन से किसानों की आय बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।

चाय बागान श्रमिकों को मिला लाभ

प्रधानमंत्री ने असम के चाय बागान श्रमिकों का उल्लेख करते हुए कहा कि साढ़े सात लाख से अधिक श्रमिकों के जनधन खाते खुलवाए गए हैं। इससे उन्हें सीधे लाभ हस्तांतरण का फायदा मिल रहा है और बुनियादी सुविधाओं का भी विस्तार हुआ है।

‘सबका साथ, सबका विकास’ से बदली तस्वीर

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि ‘सबका साथ, सबका विकास’ के मंत्र से पिछले 11 वर्षों में 25 करोड़ से अधिक लोग गरीबी से बाहर निकले हैं। गांवों और दूरदराज के इलाकों में जीवन स्तर में सुधार आया है।

पूर्वोत्तर बनेगा विकसित भारत का इंजन

प्रधानमंत्री ने कहा कि पूर्वी भारत और पूर्वोत्तर भारत विकसित भारत के विकास इंजन बनेंगे। नामरूप की यह उर्वरक इकाई असम के साथ-साथ बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल और पूर्वी उत्तर प्रदेश तक किसानों की जरूरतें पूरी करेगी।

गणमान्य जन रहे उपस्थित

इस अवसर पर असम के राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य, मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा, केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।