SHG–FPO मॉडल ने बदली तस्वीर, मिनी चाय फैक्ट्रियों से बढ़ी आय
चाय विकास एवं संवर्धन योजना से असम में चाय उद्योग को मिला नया संबल, उत्पादन–गुणवत्ता से लेकर निर्यात तक हर स्तर पर दिखा सकारात्मक असर
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!
नई दिल्ली। भारत सरकार चाय बोर्ड के माध्यम से असम सहित पूरे देश में चाय विकास एवं संवर्धन योजना (Tea Development & Promotion Scheme – TDPS) संचालित कर रही है, जिसके तहत चाय क्षेत्र के समग्र विकास के लिए बहुआयामी कदम उठाए जा रहे हैं। संसद में प्रस्तुत नवीनतम आंकड़ों से स्पष्ट है कि यह योजना न केवल छोटे चाय उत्पादकों को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है, बल्कि चाय की उत्पादन क्षमता, गुणवत्ता और निर्यात में भी उल्लेखनीय सुधार दर्ज कर रही है।
चाय उत्पादन, गुणवत्ता और निर्यात पर फोकस
सरकार की यह योजना चाय उद्योग के विभिन्न पहलुओं को मजबूत करने के उद्देश्य से तैयार की गई है। इसके तहत मुख्य फोकस—
-
उत्पादन और उत्पादकता में वृद्धि,
-
बाजार में उपलब्ध होने वाली चाय की गुणवत्ता में सुधार,
-
भारत के चाय निर्यात को बढ़ावा,
-
छोटे चाय उत्पादकों को SHG और FPO के रूप में संगठित कर मूल्य श्रृंखला में आगे बढ़ाना
पर रखा गया है।
मंत्रालय के अनुसार, छोटे चाय उत्पादकों के समूह गठन से लेकर उन्हें लघु चाय फैक्ट्रियां स्थापित करने तक हर स्तर पर सहायता प्रदान की जा रही है, ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें और अपने उत्पाद का बेहतर मूल्य प्राप्त कर सकें।
152.76 करोड़ रुपये के बजट में से असम को 150.20 करोड़ का लाभ
टीडीपीएस योजना के लिए चाय बोर्ड को कुल 152.76 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे। इनमें से 150.20 करोड़ रुपये असम राज्य में 2021–22 से 2025–26 (31 अक्टूबर 2025 तक) के बीच चाय विकास संबंधी गतिविधियों पर खर्च किए जा चुके हैं।
असम, देश के प्रमुख चाय उत्पादक राज्यों में शामिल है, इसलिए योजना का बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र में केंद्रित है।
सरकार की ओर से यह भी बताया गया कि जिला-वार और वर्ष-वार लाभान्वित हुए छोटे चाय उत्पादकों की विस्तृत सूची अनुलग्नक-I के रूप में सदन में प्रस्तुत की गई है।
असम में हुए प्रमुख कार्य: पुनःरोपण से लेकर मिनी चाय फैक्ट्रियों तक
योजना के तहत असम में चाय उद्योग को मजबूत करने के लिए कई ठोस गतिविधियाँ संचालित की गईं। इनमें प्रमुख हैं—
✔ 437.42 हेक्टेयर क्षेत्र में चाय का पुनःरोपण—पुराने पौधों के स्थान पर उच्च उत्पादक किस्मों के पौधे लगाने से उत्पादकता में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की उम्मीद।
✔ 318 स्व–सहायता समूह (SHG), 143 किसान उत्पादक संगठन (FPO) और 26 किसान उत्पादक कंपनियाँ (FPC) गठित—छोटे उत्पादकों की संगठित क्षमता बढ़ी।
✔ 31 मिनी चाय फैक्ट्रियों की स्थापना—छोटे उत्पादकों को अपने पत्तों का स्थानीय स्तर पर प्रसंस्करण करने का मौका, समय और लागत दोनों की बचत।
✔ 30.32 हेक्टेयर क्षेत्र को जैविक खेती में परिवर्तन—बाजार में ऑर्गेनिक चाय की बढ़ती मांग को देखते हुए यह बड़ा कदम माना जा रहा है।
✔ 30 फार्म फील्ड स्कूलों की स्थापना—किसानों को आधुनिक तकनीक, फसल प्रबंधन, कीट नियंत्रण और गुणवत्तापूर्ण उत्पादन के प्रशिक्षण।
✔ 1343 क्षमता निर्माण कार्यक्रम—छोटे चाय उत्पादकों को प्रशिक्षण, कौशल विकास और तकनीकी ज्ञान उपलब्ध कराया गया।
भारतीय चाय निर्यात में निरंतर वृद्धि, 7.15% की औसत वार्षिक वृद्धि दर
योजना के सकारात्मक प्रभावों का सबसे बड़ा प्रमाण भारतीय चाय के निर्यात आंकड़ों में नजर आता है।
वर्ष 2021-22 में भारत ने 751.07 मिलियन अमेरिकी डॉलर मूल्य की चाय का निर्यात किया था, जो 2024-25 में बढ़कर 923.89 मिलियन अमेरिकी डॉलर हो गया। यह 7.15% की सीएजीआर वृद्धि को दर्शाता है।
असम चाय की वैश्विक मांग लगातार बढ़ रही है और इसकी गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देने से निर्यात में मजबूती आई है।
नीति आयोग द्वारा योजना का मूल्यांकन सकारात्मक
नीति आयोग के विकास निगरानी एवं मूल्यांकन कार्यालय (DMEO) ने टीडीपीएस योजना का विस्तृत मूल्यांकन किया। मई 2023 में प्रस्तुत अपनी रिपोर्ट में उन्होंने योजना की कई उपलब्धियों को रेखांकित किया, जिनमें—
-
छोटे चाय उत्पादकों के SHG/FPO गठन में सफलता,
-
मिनी चाय फैक्ट्रियों की स्थापना में सहायता,
-
बागान आधारित योजनाओं का संतोषजनक क्रियान्वयन,
-
उत्पादकता वृद्धि पर सकारात्मक प्रभाव
शामिल हैं।
रिपोर्ट में कुछ प्रमुख सिफारिशें भी दी गईं, जैसे—
-
पुनर्रोपण कार्यक्रम को और बढ़ावा देना,
-
ब्रांड प्रमोशन को मजबूत करना,
-
किसानों तक उन्नत कृषि प्रणालियाँ पहुंचाना,
-
छोटे चाय उत्पादकों का बड़े पैमाने पर क्षमता निर्माण।
सरकार ने इन सिफारिशों को 2023-24 से 2025-26 की योजना अवधि में शामिल किया है।
संसद में दी गई जानकारी
वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में उक्त जानकारियाँ प्रदान कीं। उन्होंने आश्वस्त किया कि सरकार चाय उद्योग, विशेषकर छोटे चाय उत्पादकों की प्रगति के लिए निरंतर प्रतिबद्ध है।