डिजिटल इंडिया से बदला किसानों का जीवन—ई-केवाईसी और किसान-ईमित्र ने बढ़ाई पहुंच
नई दिल्ली,- प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 19 नवंबर 2025 को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम-किसान) योजना की 21वीं किस्त जारी करेंगे। इस केंद्रीय क्षेत्र की महत्वाकांक्षी योजना के तहत अब तक देश के 11 करोड़ से अधिक किसान परिवारों को 3.70 लाख करोड़ रुपये की राशि सीधे बैंक खातों में भेजी जा चुकी है।
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पीएम-किसान योजना के तहत पात्र किसानों को 6,000 रुपये वार्षिक वित्तीय सहायता दी जाती है। फरवरी 2019 में शुरू हुई इस प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) आधारित योजना में बिचौलियों की भूमिका पूरी तरह समाप्त कर दी गई है। योजना के लाभार्थियों में 25 प्रतिशत से अधिक महिलाएं शामिल हैं, जो इसकी समावेशी पहुंच को स्पष्ट करता है।
डिजिटल नवाचारों ने बढ़ाई योजना की प्रभावशीलता
सरकार ने योजना की पारदर्शिता और सुगमता बढ़ाने के लिए कई तकनीकी सुधार लागू किए हैं। आधार-आधारित ई-केवाईसी, बायोमेट्रिक सत्यापन और फेशियल ऑथेंटिकेशन जैसे मजबूत डिजिटल उपायों ने लाभार्थियों की पहचान प्रमाणित करने की प्रक्रिया को सरल और सुरक्षित बनाया है। अब किसान ओटीपी, बायोमेट्रिक अथवा चेहरे की पहचान के माध्यम से अपना ई-केवाईसी पूरा कर सकते हैं।
पीएम-किसान मोबाइल ऐप और “किसान कॉर्नर” पोर्टल किसानों को अपनी स्थिति जांचने, पंजीकरण और सत्यापन से जुड़ी सेवाएं घर बैठे उपलब्ध कराते हैं। आधार-आधारित खाते खोलने की सुविधा इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक के माध्यम से भी उपलब्ध है।
किसान-ईमित्र चैटबॉट से तत्काल समाधान
किसानों को शिकायत निवारण और जानकारी उपलब्ध कराने के लिए 11 भारतीय भाषाओं में किसान-ईमित्र चैटबॉट लॉन्च किया गया है। यह बड़े भाषा मॉडल (एलएलएम) आधारित प्रणाली आवाज पहचान, स्वचालित भाषा पहचान (ALD) और स्वचालित योजना पहचान (ASD) जैसी सुविधाओं से लैस है। यह किसानों को भुगतान विवरण, आवेदन स्थिति और अन्य जानकारी उनकी पसंदीदा भाषा में उपलब्ध कराता है।
किसान रजिस्ट्री: सामाजिक सुरक्षा लाभों की नई राह
कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने किसानों को सामाजिक कल्याण योजनाओं का लाभ बिना जटिल प्रक्रियाओं के उपलब्ध कराने के लिए किसान रजिस्ट्री की नई पहल शुरू की है। यह एक केंद्रीकृत और सत्यापित डेटाबेस होगा, जिससे किसानों को विभिन्न योजनाओं का लाभ सुगमता से मिलेगा।
पीएम-किसान का ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर सकारात्मक प्रभाव
अंतरराष्ट्रीय खाद्य एवं नीति अनुसंधान संस्थान (IFPRI) के अध्ययन के अनुसार, पीएम-किसान से मिलने वाली राशि ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था में नई गति दी है। इससे किसानों की ऋण बाधाएं कम हुई हैं, कृषि निवेश बढ़ा है और जोखिम उठाने की क्षमता में सुधार आया है। किसान इस राशि का उपयोग बीज, खाद, कृषि उपकरणों के साथ-साथ शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक जरूरतों में भी कर पा रहे हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना, पारदर्शी भुगतान प्रणाली और किसान-केंद्रित दृष्टिकोण के कारण पीएम-किसान योजना मजबूत हुई है और किसानों के जीवन में ठोस परिवर्तन ला रही है।