लॉन्च हुई ‘वाटरशेड यात्रा,’ मृदा और जल संरक्षण पर ज़ोर

शिवराज सिंह चौहान ने “वाटरशेड यात्रा” का शुभारंभ किया

“मृदा और जल संरक्षण पर बल”

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केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने राष्ट्रीय स्तर के जन संपर्क अभियान वाटरशेड यात्रा” का हाइब्रिड मोड में शुभारंभ किया।

इस यात्रा का उद्देश्य प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (डब्ल्यूडीसी-पीएमकेएसवाई 2.0) के तहत वाटरशेड विकास गतिविधियों के प्रति जागरूकता बढ़ाना और सामुदायिक भागीदारी को प्रोत्साहित करना है।

इस अवसर पर केंद्रीय ग्रामीण विकास राज्य मंत्री डॉ. चंद्रशेखर पेम्मासानी और कमलेश पासवान भी मौजूद रहे।

शुभारंभ समारोह में विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मंत्री, वरिष्ठ अधिकारी, तथा डब्ल्यूडीसी-पीएमकेएसवाई के कार्यान्वयन से जुड़े अधिकारी भी शामिल हुए। इस यात्रा में 800 ग्राम पंचायतों और एक लाख से अधिक लोगों ने भाग लिया।

मृदा और जल संरक्षण पर बल..

चौहान ने मृदा और जल संरक्षण की महत्ता को रेखांकित करते हुए कहा कि डब्ल्यूडीसी-पीएमकेएसवाई परियोजनाओं की सफलता के लिए सामुदायिक भागीदारी आवश्यक है। उन्होंने आम जनता से इस यात्रा में सक्रिय भागीदारी निभाने और जल संरक्षण को जन आंदोलन बनाने का आह्वान किया।

उन्होंने कहा कि यह यात्रा समुदाय संचालित दृष्टिकोण” को बढ़ावा देगी, स्थानीय स्तर पर कार्यान्वयन मशीनरी को प्रेरित करेगी और कृषि उत्पादकता, आजीविका और पर्यावरणीय सुधार में योगदान देगी।

वाटरशेड-जनभागीदारी प्रतियोगिताकी घोषणा…

चौहान ने वर्ष 2025 और 2026 के लिए वाटरशेड-जनभागीदारी प्रतियोगिता की घोषणा की। इस प्रतियोगिता के तहत सार्वजनिक, निजी और सामुदायिक भागीदारी (4पी मॉडल) को बढ़ावा दिया जाएगा।

इसके तहत राज्य स्तर पर परियोजनाओं का मूल्यांकन किया जाएगा, और उत्कृष्ट कार्य करने वाली परियोजनाओं को प्रति परियोजना 20 लाख रुपये का पुरस्कार दिया जाएगा। इस पहल के लिए कुल 70.80 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जिससे हर वर्ष 177 परियोजनाएं लाभान्वित होंगी।

शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि इस प्रतियोगिता से न केवल विभागीय कार्यों में तेजी आएगी, बल्कि आम जनता भी श्रमदान जैसी गतिविधियों में सहभागिता कर जल संचयन संरचनाओं के निर्माण और रखरखाव में योगदान दे सकेगी। इसका मुख्य उद्देश्य जल और मृदा संरक्षण के प्रति जन जागरूकता, जनभागीदारी और जिम्मेदारी की भावना विकसित करना है।

वाटरशेड यात्रा का दायरा..

इस यात्रा में 805 परियोजनाओं में 60 से 90 दिनों तक वैन मूवमेंट किया जाएगा, जिससे 26 राज्यों और 2 केंद्र शासित प्रदेशों के 6673 ग्राम पंचायतों (13,587 गांवों) को जोड़ा जाएगा।

  • वाटरशेड पंचायतों में टिकाऊ मृदा और जल प्रबंधन पर विशेषज्ञों द्वारा चर्चा की जाएगी।
  • परियोजनाओं में योगदान देने वाले लगभग 8,000 व्यक्तियों को सम्मानित किया जाएगा।
  • विभिन्न कार्यक्रमों के तहत भूमि पूजन, लोकार्पण, श्रमदान, वाटरशेड महोत्सव और मार्गदर्शकों को पुरस्कार दिए जाएंगे।

डिजिटल माध्यमों से जुड़ाव..

विभाग ने वाटरशेड विकास पर एक लर्निंग मैनेजमेंट सिस्टम (LMS) विकसित किया है, जिसे डीओएलआर की वेबसाइट और माई भारत पोर्टल से जोड़ा गया है। इससे युवा बड़ी संख्या में जुड़ सकेंगे और उन्हें श्रमदान जैसी गतिविधियों में भाग लेने पर प्रमाण पत्र भी दिया जाएगा।

इसके अलावा, ‘माई भारत पोर्टल’ पर वाटरशेड यात्रा” का एक मेगा इवेंट बनाया गया है, जिससे युवाओं को वाटरशेड परियोजनाओं में सहभागिता के लिए प्रेरित किया जाएगा। यह पहल न केवल सामुदायिक भागीदारी को बढ़ाएगी बल्कि स्थानीय स्तर पर वाटरशेड कार्यकर्ताओं और नेताओं का एक मजबूत नेटवर्क तैयार करने में मदद करेगी।

वाटरशेड यात्रा” ग्रामीण भारत में जल और मृदा संरक्षण को एक जन आंदोलन में बदलने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।