October 18, 2026 8:34 PM

Krishi Times

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PMMSY से मजबूत होगा उत्तराखंड का मत्स्य इंफ्रास्ट्रक्चर!

उत्तराखंड में मत्स्य क्षेत्र को मिलेगी नई रफ्तार, सितारगंज में आधुनिक फिश मार्केट लगभग तैयार!

प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत इंटीग्रेटेड एक्वा पार्क और आधुनिक मछली बाजार का निर्माण अंतिम चरणों में | मत्स्य विपणन, भंडारण और रोजगार के अवसरों को मिलेगा बढ़ावा

सितारगंज (उत्तराखंड)। उत्तराखंड में मत्स्य पालन के बुनियादी ढांचे को आधुनिक बनाने और मछली उत्पादकों को बेहतर बाजार सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में काम तेज हो रहा है। इसी क्रम में भारत सरकार के मत्स्य पालन विभाग के निदेशक सुभाष चंद्र ने उत्तराखंड के सितारगंज स्थित इंटीग्रेटेड एक्वा पार्क और आधुनिक फिश मार्केट का निरीक्षण किया। इस दौरान उत्तराखंड मत्स्य पालन विभाग और लोक निर्माण विभाग (PWD) के अधिकारी भी मौजूद रहे।

निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने दोनों परियोजनाओं की निर्माण प्रगति और क्रियान्वयन की स्थिति की समीक्षा की। अधिकारियों को परियोजनाओं के मौजूदा कार्यों और निर्माण की प्रगति के बारे में जानकारी दी गई। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, आधुनिक फिश मार्केट का निर्माण लगभग पूरा हो चुका है, जबकि इंटीग्रेटेड एक्वा पार्क का निर्माण भी उन्नत चरण में है।

प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना से विकसित हो रहा आधुनिक बुनियादी ढांचा

सितारगंज की ये दोनों परियोजनाएं प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) के तहत विकसित की जा रही हैं। इस योजना का उद्देश्य मत्स्य क्षेत्र के बुनियादी ढांचे को मजबूत करना, मछली उत्पादन और उत्पादकता में सुधार करना तथा मत्स्य पालन से जुड़े लोगों की आर्थिक स्थिति बेहतर बनाने के लिए अवसर उपलब्ध कराना है।

आधुनिक फिश मार्केट से मछली की बिक्री और विपणन व्यवस्था को अधिक व्यवस्थित बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है। वहीं, इंटीग्रेटेड एक्वा पार्क मत्स्य क्षेत्र से जुड़ी सुविधाओं के एकीकृत विकास की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

भंडारण से लेकर विपणन तक मजबूत होगी मत्स्य मूल्य शृंखला

मत्स्य क्षेत्र में उत्पादन के साथ-साथ मछलियों की सुरक्षित हैंडलिंग, भंडारण, प्रसंस्करण और समय पर बाजार तक पहुंच भी महत्वपूर्ण है। इन सुविधाओं के विकास से कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम करने और मत्स्य उत्पादों के बेहतर प्रबंधन में सहायता मिल सकती है।

परियोजनाओं से जुड़े प्रमुख संभावित लाभ इस प्रकार हैं:

  • बेहतर बाजार सुविधा: मछली पालकों और व्यापारियों को व्यवस्थित विपणन व्यवस्था उपलब्ध कराने में मदद।
  • भंडारण और प्रबंधन: मत्स्य उत्पादों की गुणवत्ता बनाए रखने तथा कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम करने की दिशा में सहायता।
  • मूल्य संवर्धन: मत्स्य उत्पादों के प्रसंस्करण और उनसे अधिक आर्थिक मूल्य प्राप्त करने के अवसरों को प्रोत्साहन।
  • रोजगार सृजन: मछली पालकों, व्यापारियों और स्थानीय समुदायों के लिए आजीविका के नए अवसर विकसित होने की संभावना।
  • बाजार तक बेहतर पहुंच: उत्पादकों को उपभोक्ताओं और व्यापारिक नेटवर्क से जोड़ने में सहायता।

किसानों और स्थानीय समुदायों को मिल सकते हैं नए अवसर

उत्तराखंड में मत्स्य पालन ग्रामीण आजीविका के विविधीकरण का एक महत्वपूर्ण माध्यम बन सकता है। आधुनिक बाजार सुविधाओं और एकीकृत बुनियादी ढांचे के विकास से मछली पालकों को उत्पादन के साथ-साथ विपणन और मूल्य संवर्धन से जुड़ी गतिविधियों में भी अवसर मिल सकते हैं।

हालांकि, इन परियोजनाओं का वास्तविक लाभ इस बात पर निर्भर करेगा कि सुविधाएं कब पूरी तरह चालू होती हैं, उनका संचालन किस प्रकार किया जाता है और स्थानीय मत्स्य पालकों को उनका उपयोग करने के लिए कितनी प्रभावी सहायता मिलती है।

भारत की ब्लू इकोनॉमी को मजबूती देने की दिशा में कदम

सितारगंज में इंटीग्रेटेड एक्वा पार्क और आधुनिक फिश मार्केट का विकास उत्तराखंड में एक आधुनिक, एकीकृत और टिकाऊ मत्स्य पारिस्थितिकी तंत्र तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। बेहतर बुनियादी ढांचा, मजबूत बाजार संपर्क और कटाई के बाद होने वाले नुकसान में कमी मत्स्य क्षेत्र की आर्थिक क्षमता बढ़ाने में सहायक हो सकती है।

इन सुविधाओं के संचालन में आने के बाद मत्स्य पालन से जुड़े उत्पादकों, व्यापारियों और स्थानीय समुदायों को किस स्तर तक लाभ मिलता है, यह उनके प्रभावी क्रियान्वयन और बाजार से जुड़ाव पर निर्भर करेगा। दीर्घकाल में ऐसी परियोजनाएं मत्स्य मूल्य शृंखला को मजबूत करने और भारत की ब्लू इकोनॉमी के विकास में योगदान दे सकती हैं।