डिजिटल एक्सेस पास से गहरे समुद्र में मत्स्य क्षेत्र को नई ताकत!

रीएएलसीराफ्ट एक्सेस पास से गहरे समुद्र में मत्स्य क्षेत्र को डिजिटल बढ़ावा, छोटे मछुआरों को बड़ी राहत!

वेरावल -भारत 11,099 किलोमीटर लंबी तटरेखा और लगभग 24 लाख वर्ग किलोमीटर के विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ) के साथ समुद्री संपदा से समृद्ध राष्ट्र है। अब तक देश की अधिकांश मछली पकड़ने की गतिविधियाँ 40–50 समुद्री मील के दायरे तक सीमित रही हैं, जबकि 12 से 200 समुद्री मील तक फैला विशाल EEZ क्षेत्र अपेक्षाकृत कम उपयोग में रहा।

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वैज्ञानिक आकलन संकेत देते हैं कि इस क्षेत्र में विशेष रूप से टूना और टूना जैसी उच्च मूल्य वाली प्रजातियों की लगभग 2.48 लाख टन वार्षिक संभावित क्षमता उपलब्ध है। यह क्षमता देश के EEZ का लगभग 49 प्रतिशत हिस्सा कवर करती है, खासकर अंडमान-निकोबार और लक्षद्वीप जैसे द्वीपीय क्षेत्रों में।

📜 EEZ नियम 2025: मजबूत कानूनी और संस्थागत ढांचा

केंद्र सरकार ने 4 नवंबर 2025 को विशेष आर्थिक क्षेत्र में मत्स्य पालन के सतत दोहन संबंधी नियम अधिसूचित किए। यह पहल प्रादेशिक जल, महाद्वीपीय शेल्फ, विशेष आर्थिक क्षेत्र और अन्य समुद्री क्षेत्र अधिनियम, 1976 के अंतर्गत लागू की गई है।

इन नियमों का उद्देश्य है:

  • समुद्री जैव विविधता और इकोसिस्टम की सुरक्षा

  • अंतरराष्ट्रीय समुद्री दायित्वों का पालन

  • अवैध, अनियंत्रित और अनियमित (IUU) मत्स्य दोहन पर रोक

  • मछुआरों की आय और निर्यात क्षमता में वृद्धि

यह कदम भारत की ब्लू इकोनॉमी रणनीति को मजबूत करने की दिशा में मील का पत्थर माना जा रहा है।

🚢 वेरावल से राष्ट्रीय शुभारंभ

20 फरवरी 2026 को गुजरात के वेरावल में आयोजित कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह ने 13 तटीय राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए EEZ एक्सेस पास प्रणाली की औपचारिक शुरुआत की।

इस दौरान 24 मत्स्य सहकारी समितियों का प्रतिनिधित्व करने वाले 37 मछुआरों को एक्सेस पास प्रदान किए गए। मंत्री ने कहा कि यह पहल सुरक्षित, पारदर्शी और बेहतर विनियमित समुद्री मत्स्य संचालन की दिशा में बड़ा सुधार है।

💻 डिजिटल समाधान: रीएलक्राफ्ट पोर्टल से मुफ्त एक्सेस पास

EEZ नियमों के तहत मशीनीकृत और 24 मीटर से बड़े मोटर चालित जहाजों के लिए एक्सेस पास अनिवार्य किया गया है। लगभग 64,000 ऐसे जहाज इस दायरे में आते हैं।

एक्सेस पास पूरी तरह से ऑनलाइन और निःशुल्क है, जिसे रीएलक्राफ्ट पोर्टल के माध्यम से जारी किया जाएगा। यह पोर्टल मछली पकड़ने वाले जहाजों के पंजीकरण, लाइसेंसिंग और स्वामित्व हस्तांतरण जैसी सेवाएं प्रदान करता है।

इसे Marine Products Export Development Authority (MPEDA) और Export Inspection Council of India (EIC) से जोड़ा गया है, जिससे कैच सर्टिफिकेट और हेल्थ सर्टिफिकेट की प्रक्रिया सरल होगी।

यह एकीकृत डिजिटल प्रणाली एंड-टू-एंड ट्रैसेबिलिटी, सैनिटरी अनुपालन और इको-लेबलिंग सुनिश्चित करती है, जिससे भारतीय समुद्री उत्पादों की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता में वृद्धि होगी।

🛟 छोटे और पारंपरिक मछुआरों को सुरक्षा

सरकार ने पारंपरिक गैर-मोटर चालित नावों को एक्सेस पास से छूट दी है। इससे छोटे मछुआरों की आजीविका सुरक्षित रहेगी।

इसके अलावा:

  • 1 लाख ट्रांसपोंडर मुफ्त लगाए जा रहे हैं (अब तक 50,000 से अधिक स्थापित)

  • 6 लाख मछुआरा परिवारों को बंद मौसम के दौरान आजीविका सहायता

  • 33 लाख से अधिक मछुआरों को 5 लाख रुपये तक दुर्घटना बीमा कवरेज

यह प्रणाली भारतीय तटरक्षक बल से समन्वय कर समुद्री सुरक्षा को भी मजबूत करेगी।

🎓 कौशल विकास और सहकारिता को बढ़ावा

मत्स्य पालन विभाग, सिफनेट और एफएसआई के सहयोग से गहरे समुद्र में मछली पकड़ने, निर्यात-ग्रेड हैंडलिंग और सुरक्षा प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए जाएंगे।

सहकारिता मंत्रालय के साथ संयुक्त कार्य समूह गठित कर छोटे मछुआरों और सहकारी समितियों को गहरे समुद्र, प्रसंस्करण और निर्यात मूल्य श्रृंखला से जोड़ने की योजना है।

📈 अर्थव्यवस्था और निर्यात पर संभावित प्रभाव

विशेषज्ञों के अनुसार, यदि EEZ की संभावित क्षमता का 70–80 प्रतिशत भी उपयोग हो सके तो:

  • समुद्री निर्यात में 20–30% तक वृद्धि संभव

  • ग्रामीण तटीय अर्थव्यवस्था में रोजगार सृजन

  • विदेशी मुद्रा आय में उल्लेखनीय बढ़ोतरी

  • भारत वैश्विक टूना बाजार में प्रमुख निर्यातक के रूप में उभर सकता है

यह पहल “आत्मनिर्भर भारत” और “डिजिटल इंडिया” मिशन के अनुरूप समुद्री क्षेत्र में संरचनात्मक बदलाव लाने की क्षमता रखती है।

🔥 संभावित प्रभाव: क्यों अहम है यह पहल?

✔ गहरे समुद्र में संसाधनों का संतुलित उपयोग
✔ डिजिटल ट्रैकिंग से पारदर्शिता
✔ निर्यात में गुणवत्ता और प्रमाणन सुधार
✔ छोटे मछुआरों की सुरक्षा और आय संरक्षण
✔ समुद्री सुरक्षा और आपदा प्रबंधन में मजबूती

भारत अब तटीय सीमाओं से आगे बढ़कर गहरे समुद्र की ओर कदम बढ़ा रहा है। एक्सेस पास प्रणाली केवल एक प्रशासनिक सुधार नहीं, बल्कि समुद्री अर्थव्यवस्था में नई क्रांति की शुरुआत मानी जा रही है।