अब एआई बताएगा कब बोएं और कैसे बचाएं फसल!

भारत में कृषि में एआई क्रांति: डिजिटल एग्रीकल्चर मिशन से किसानों को मिलेगा सीधा लाभ!

देश में कृषि क्षेत्र को आधुनिक और तकनीक-समर्थ बनाने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के उपयोग को तेजी से बढ़ावा दिया जा रहा है। इसके लिए सबसे पहले आवश्यक बुनियादी प्रणालियों के निर्माण पर ध्यान केंद्रित किया गया है। सरकार द्वारा स्पष्ट एआई रणनीतियों का निर्माण, अनुकूल नीतियों का निर्धारण, डेटा-साझाकरण ढांचे का विकास और मजबूत डिजिटल अवसंरचना तैयार की जा रही है, ताकि एआई तकनीकों को बड़े पैमाने पर अपनाया जा सके।

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इस पहल का उद्देश्य केवल तकनीक उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि उसे व्यवहारिक और उपयोगी बनाना है, जिससे छोटे और सीमांत किसान भी इसका लाभ उठा सकें।

‘क्रिएट’ पिलर: कृषि के लिए नवाचार और परीक्षण की प्रक्रिया

एआई मिशन के अंतर्गत ‘क्रिएट’ स्तंभ कृषि क्षेत्र के लिए एआई समाधान विकसित करने और उनका परीक्षण करने पर केंद्रित है। इस चरण में स्टार्टअप, टेक्नोलॉजी कंपनियां और कृषि अनुसंधान संस्थान मिलकर नई तकनीकों का विकास कर रहे हैं।

इन साझेदारियों के माध्यम से एआई आधारित अनुप्रयोगों को डिजाइन किया जाता है, उनके फील्ड ट्रायल किए जाते हैं और फिर उन्हें किसानों की जरूरतों के अनुरूप परिष्कृत किया जाता है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि तकनीक केवल प्रयोगशाला तक सीमित न रहे, बल्कि खेतों में प्रभावी रूप से कार्य करे।

‘डिलीवर’ पिलर: तकनीक किसानों तक 

‘डिलीवर’ स्तंभ का लक्ष्य एआई आधारित समाधानों को सीधे किसानों तक पहुंचाना है। इसके लिए कृषि विस्तार तंत्र को मजबूत किया जा रहा है और एआई को सलाहकार सेवाओं में एकीकृत किया जा रहा है।

फील्ड स्तर से प्राप्त फीडबैक के आधार पर तकनीकों में निरंतर सुधार किया जा रहा है, जिससे समाधान अधिक उपयोगी और प्रभावी बन सकें। इससे किसानों को समय पर जानकारी, जोखिम प्रबंधन और पैदावार बढ़ाने में सहायता मिल रही है।

डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर से तैयार हो रहा सशक्त आधार

भारत में कृषि क्षेत्र के डिजिटल रूपांतरण की नींव मजबूत डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना पर आधारित है। Digital Agriculture Mission और AgriStack जैसी पहलों के माध्यम से किसानों का सत्यापित डिजिटल डेटाबेस तैयार किया जा रहा है।

यह डेटाबेस किसानों को लक्षित सेवाएं, सब्सिडी, बीमा और सलाह उपलब्ध कराने में मदद करता है। इससे योजनाओं का लाभ सीधे पात्र किसानों तक पहुंचाने में पारदर्शिता और दक्षता बढ़ी है।

रीयल-टाइम सलाह से निर्णय क्षमता में सुधार

एआई आधारित उपकरण जैसे Bharat-VISTAAR और Kisan e-Mitra किसानों को बहुभाषी और रीयल-टाइम सलाह प्रदान कर रहे हैं।

ये प्लेटफॉर्म मौसम, फसल प्रबंधन, उर्वरक उपयोग और बाजार भाव से जुड़ी जानकारी तुरंत उपलब्ध कराते हैं। दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले किसान भी अब विशेषज्ञ सलाह तक आसानी से पहुंच पा रहे हैं, जिससे उनकी निर्णय लेने की क्षमता सशक्त हो रही है।

जलवायु और कीट जोखिम प्रबंधन में एआई की भूमिका

कृषि में जलवायु परिवर्तन और कीट प्रकोप बड़ी चुनौतियां हैं। इनसे निपटने के लिए एआई आधारित पूर्वानुमान और निगरानी प्रणालियां विकसित की गई हैं।

National Pest Surveillance System के माध्यम से कीटों की समय रहते पहचान और नियंत्रण संभव हो पा रहा है। साथ ही मानसून पूर्वानुमान प्रणाली किसानों को पहले से तैयारी करने में मदद कर रही है, जिससे संभावित नुकसान में कमी आ रही है।

प्रिसिजन फार्मिंग और बीमा में पारदर्शिता

एआई तकनीक प्रिसिजन फार्मिंग, एग्री-रोबोटिक्स और संसाधनों के सटीक उपयोग को बढ़ावा दे रही है। इससे पानी, उर्वरक और कीटनाशकों का उपयोग नियंत्रित और संतुलित हो रहा है।

फसल बीमा के क्षेत्र में YES-TECH और CROPIC जैसी प्रणालियां दावों के त्वरित और पारदर्शी निपटान में सहायक बन रही हैं। इससे किसानों को समय पर मुआवजा मिल रहा है और भरोसा बढ़ रहा है।

बाजार और आपूर्ति श्रृंखला में सुधार

एआई आधारित विश्लेषण से आपूर्ति श्रृंखला की कमियों को दूर करने का प्रयास किया जा रहा है। मूल्य खोज प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाने और छोटे किसानों को बेहतर बाजार पहुंच दिलाने के लिए डेटा आधारित निर्णय लिए जा रहे हैं।

इससे किसानों की आय में वृद्धि और कृषि क्षेत्र में स्थिरता सुनिश्चित करने की दिशा में सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं।

समावेशी और सतत कृषि विकास की दिशा में पहल

कुल मिलाकर, भारत कृषि में एआई को अपनाकर एक मानव-केंद्रित तकनीकी मॉडल विकसित कर रहा है। यह परिवर्तन केवल उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि किसानों की आय, सुरक्षा और स्थिरता को प्राथमिकता देता है।

डिजिटल अवसंरचना, नवाचार और प्रभावी डिलीवरी तंत्र के समन्वय से कृषि क्षेत्र में एक नई तकनीकी क्रांति आकार ले रही है, जो आने वाले समय में देश के ग्रामीण परिदृश्य को पूरी तरह बदल सकती है।

Source:PIB, चित्र प्रतीकात्मक