बुंदेलखंड की खेती में तकनीक का नया अध्याय!

रानी लक्ष्मी बाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय में अखिल भारतीय किसान मेला–2026: एआई नवाचार, आधुनिक प्रयोगशालाएँ और श्री अन्न पर विशेष फोकस

झांसी। बुंदेलखंड में कृषि विकास को नई दिशा देने के उद्देश्य से रानी लक्ष्मी बाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय में आयोजित अखिल भारतीय किसान मेला–2026 का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने विश्वविद्यालय द्वारा 200 एकड़ में विकसित मॉडल फार्म, हाई-टेक पॉलीहाउस, ग्रीष्मकालीन मक्का, चिया सीड्स और क्विनोआ के उत्पादन कार्यों की सराहना करते हुए इसे बुंदेलखंड की तकदीर बदलने वाला केंद्र बताया।

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🌾 एकीकृत कृषि मॉडल से बढ़ेगी आय

कृषि मंत्री ने किसानों से संगठित खेती के साथ पशुपालन, दुग्ध उत्पादन, तिलहन, दलहन, मधुमक्खी पालन और मत्स्य पालन को एकीकृत मॉडल के रूप में अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि इससे किसानों की आय में वृद्धि, लागत में कमी और कृषि को स्थायित्व मिलेगा।

🔬 दो अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं का उद्घाटन

इस अवसर पर मंत्री ने राष्ट्रीय महत्व की दो अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं का उद्घाटन किया। उन्होंने कहा कि इन प्रयोगशालाओं से जैविक और प्राकृतिक खेती को मजबूती मिलेगी तथा मोटे अनाज ‘श्री अन्न’ का रकबा बढ़ेगा। इससे किसानों को गुणवत्तापूर्ण उत्पादन, बेहतर बाजार और अधिक आय सुनिश्चित होगी।

🐄 कृषि और गौ-संवर्धन का समन्वय

उत्तर प्रदेश गौ सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता ने कहा कि कृषि और गौ-संवर्धन एक-दूसरे के पूरक हैं। प्राकृतिक खेती, जैविक खाद, गोबर गैस और पंचगव्य आधारित प्रणाली से भूमि की उर्वरता बढ़ेगी और किसानों की लागत घटेगी। उन्होंने गौ-आधारित समेकित कृषि मॉडल अपनाने पर बल दिया।

🎓 विकसित कृषि–विकसित भारत @2047 का लक्ष्य

विश्वविद्यालय के कुलपति आलोक कुमार सिंह ने कहा कि “विकसित कृषि–विकसित भारत @2047” का लक्ष्य वैज्ञानिक अनुसंधान, नवाचार और किसानों की सक्रिय भागीदारी से ही संभव है। उन्होंने किसान मेले को किसानों, वैज्ञानिकों और उद्यमियों का सशक्त मंच बताया।

मेला संयोजक एवं निदेशक प्रसार शिक्षा सुशील कुमार सिंह ने बताया कि प्रदर्शनी में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के 14 संस्थान, 6 कृषि विश्वविद्यालय, 100 से अधिक निजी कंपनियाँ, एफपीओ, स्टार्टअप्स, एनजीओ और नाबार्ड सहित प्रमुख संस्थाएँ भाग ले रही हैं। दो थीमेटिक मिलेट पवेलियन सहित 150 स्टॉल अनुसंधान एवं नवाचार प्रदर्शित कर रहे हैं।

📚 कृषि पुस्तकों और तकनीकी बुलेटिनों का विमोचन

कार्यक्रम के दौरान विभिन्न कृषि विषयों पर आधारित पुस्तकों, तकनीकी बुलेटिनों और प्रसार प्रकाशनों का विधिवत विमोचन किया गया। इनमें “बुंदेलखंड का समावेशी विकास: कृषि एवं खाद्य संस्करण के उद्योग तक”, “बुंदेलखंड क्षेत्र में मक्का पैदावार की उन्नत तकनीक”, “श्री अन्न–श्रेष्ठ अन्न” (भाग 1 से 4), “ज्वार और बाजरा की नवीनतम उत्पादन तकनीक “रागी, सांवा एवं कोदो की वैज्ञानिक खेती”, “श्री अन्न की प्रसंस्करण तकनीकें एवं प्रसंस्कृत उत्पाद”, “बुंदेलखंड के व्यंजन: मेनू “जलवायु परिवर्तन के अनुकूल और टिकाऊ खाद्य प्रणाली के लिए बाजरा की पुनर्कल्पना” तथा “ कृषि जीवन”(Issue 13 एवं 14) जैसी महत्वपूर्ण प्रकाशन शामिल हैं।

इन सभी पुस्तकों और बुलेटिनों को विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने तैयार किया है, जिनका उद्देश्य क्षेत्रीय परिस्थितियों के अनुरूप वैज्ञानिक, पोषण-संवेदनशील और बाजारोन्मुख कृषि तकनीकों को सीधे किसानों तक पहुँचाना है।

🏆 12 प्रगतिशील किसान सम्मानित

अखिल भारतीय किसान मेला–2026 के दौरान विभिन्न फसलों में उत्कृष्ट कार्य करने वाले 12 प्रगतिशील किसानों को सम्मानित किया गया। इन किसानों ने नवाचार, फसल विविधीकरण, प्राकृतिक खेती और मूल्य संवर्धन के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियाँ हासिल की हैं।

📱 एआई आधारित मोबाइल ऐप का लोकार्पण

कृषि मंत्री ने “DraQ”, “Aqua Scan” और “पशु आहार मित्र” नामक तीन एआई आधारित मोबाइल एप्लीकेशन का लोकार्पण किया।

  • DraQ ड्रैगन फ्रूट की पकने की अवस्था पहचानकर सही तुड़ाई समय सुनिश्चित करता है।

  • Aqua Scan मछलियों के रोग की त्वरित पहचान कर वैज्ञानिक उपचार सलाह देता है।

  • पशु आहार मित्र पशुपालकों को संतुलित आहार प्रबंधन की जानकारी देकर दुग्ध उत्पादन बढ़ाने में सहायक है।

इन पहलों से स्पष्ट है कि बुंदेलखंड में कृषि अब परंपरागत सीमाओं से आगे बढ़कर तकनीक, नवाचार और वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ नई दिशा में अग्रसर हो रही है।