October 3, 2026 9:42 AM

Krishi Times

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महिला किसान: खेतों की रीढ़ और भारत की शक्ति

मlहिला किसान दिवस : कृषि में महिलाओं की अहम भूमिका का सम्मान

महिला किसान दिवस पर विशेष

भारत की कृषि व्यवस्था की असली ताकत खेतों में काम करने वाली महिलाएं हैं। वे सिर्फ फसलों की देखभाल ही नहीं करतीं, बल्कि परिवार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ भी हैं। हर साल 15 अक्टूबर को महिला किसान दिवस मनाया जाता है, ताकि समाज को यह याद दिलाया जा सके कि खेती सिर्फ पुरुषों का नहीं, बल्कि महिलाओं का भी समर्पित और परिश्रमी क्षेत्र है। यह दिवस उन अनदेखी नायिकाओं को सम्मान देने का अवसर है, जो मिट्टी से सोना उगाने का अद्भुत हुनर रखती हैं।

भारत में लगभग 80 प्रतिशत ग्रामीण महिलाएं प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से खेती-बाड़ी से जुड़ी हैं, फिर भी लंबे समय तक उन्हें “किसान” की पहचान नहीं दी गई।

🌾 महिलाओं की भागीदारी

खेती के हर चरण में—बीज बोने से लेकर फसल की कटाई, पशुपालन, खाद्य प्रसंस्करण और विपणन तक—महिलाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही है। खेतों में पुरुषों के बराबर मेहनत कर रहीं हैं..

👩‍🌾 सशक्तिकरण की दिशा में कदम

सरकार ने महिलाओं को कृषि के केंद्र में लाने के लिए कई योजनाएँ शुरू की हैं—जैसे महिला किसान सशक्तिकरण परियोजना, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन, और सेल्फ हेल्प ग्रुप (SHG) मॉडल। इन पहलों ने ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक स्वतंत्रता और तकनीकी प्रशिक्षण दोनों प्रदान किए हैं। कई राज्यों में महिलाएं अब किसान उत्पादक संगठन (FPO) चला रही हैं और जैविक खेती की दिशा में उदाहरण प्रस्तुत कर रही हैं।

🌱 बदलती सोच और नई दिशा

महिला किसान अब केवल खेतों तक सीमित नहीं हैं; वे एग्री-स्टार्टअप, फूड प्रोसेसिंग यूनिट, और डिजिटल एग्रीकल्चर प्लेटफॉर्म तक अपनी पहचान बना रही हैं। शिक्षा और तकनीकी जागरूकता के साथ अब वे बाजार की मांग और मूल्य शृंखला को भी समझ रही हैं।

🌺 सारांश

महिला किसान दिवस यह संदेश देता है कि कृषि में समानता के बिना आत्मनिर्भर भारत संभव नहीं है। यदि महिलाओं को समान अवसर, भूमि अधिकार और प्रशिक्षण मिले, तो वे न केवल परिवार बल्कि पूरे देश की खाद्य सुरक्षा को मजबूत बना सकती हैं।